Dhullu Mahto ने FCIL सिंदरी में VSS कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर केंद्र सरकार को लिखा पत्र

FCIL सिंदरी में Circular-2004 का उल्लंघन Dhullu Mahto ने उठाई आवाज

FCIL सिंदरी में Circular-2004 का उल्लंघन Dhullu Mahto ने उठाई आवाज

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धनबाद/सिंदरी। धनबाद लोकसभा क्षेत्र से सांसद Dhullu Mahto ने एफसीआईएल (FCIL) सिंदरी इकाई में कार्यरत VSS (Voluntary Separation Scheme) कर्मचारियों और विस्थापितों से जुड़ी गंभीर समस्याओं को लेकर केंद्र सरकार का ध्यान आकृष्ट किया है। इस संबंध में उन्होंने केंद्रीय इस्पात एवं भारी उद्योग मंत्री को पत्र लिखकर Circular-2004 के उल्लंघन, भूमि प्रबंधन और पुनर्वास से जुड़ी विसंगतियों के समाधान की मांग की है।

Circular-2004 के उल्लंघन का आरोप

पत्र में Dhullu Mahto ने उल्लेख किया है कि वर्ष 2003–04 में एफसीआईएल सिंदरी में भारी संख्या में कर्मचारियों को VSS के तहत हटाया गया था। उस समय Circular No. FCIS/Est.-72/Lease/04 (16/03/2004) के अंतर्गत VSS कर्मचारियों एवं विस्थापितों को दुकान/व्यवसाय हेतु भूमि उपलब्ध कराने का प्रावधान था, लेकिन आज तक कई पात्र लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पाया है।

पुनर्वास और रोजगार के वादे अधूरे

Dhullu Mahto ने कहा कि प्रबंधन द्वारा 2004 में यह सहमति बनी थी कि VSS लेने वाले कर्मचारियों को 33 वर्ष की अवधि तक पुनर्वास संबंधी सुविधाएं दी जाएंगी। इसके बावजूद आज भी कई परिवार बुनियादी सुविधाओं और आजीविका के साधनों से वंचित हैं, जो घोर अन्याय है।

भूमि डंपिंग और नियमों की अनदेखी

सांसद Dhullu Mahto ने अपने पत्र में यह भी मुद्दा उठाया कि FCIL सिंदरी क्षेत्र में ओबी डंपिंग (Over Burden Dumping) की जा रही है, जिससे आसपास की भूमि अनुपयोगी हो रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब विस्थापितों के लिए भूमि उपलब्ध कराई जानी थी, तो फिर ऐसी गतिविधियां किस नियम के तहत की जा रही हैं।

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हाट-बाजार और दुकानों के ट्रांसफर का मामला

सरकार से हस्तक्षेप की मांग

Dhullu Mahto ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि पूरे मामले की गंभीरता से समीक्षा कर संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए जाएं, ताकि VSS कर्मचारियों और विस्थापितों को उनका हक मिल सके।

क्षेत्रीय जनता के हक में आवाज

स्थानीय लोगों का मानना है कि Dhullu Mahto लगातार औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़े विस्थापितों और मजदूरों की समस्याओं को संसद और केंद्र सरकार के समक्ष मजबूती से उठा रहे हैं। यह पत्र भी उसी कड़ी का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है।

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