Lohardaga News : सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में खून की भारी कमी, लाइसेंस और जांच प्रक्रिया से बढ़ी मरीजों की परेशानी
सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में खून की भारी कमी
Lohardaga News : झारखंड के लोहरदगा सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में इन दिनों खून की गंभीर कमी देखने को मिल रही है। हालात ऐसे बन गए हैं कि मरीजों को जरूरत के समय रक्त उपलब्ध नहीं हो पा रहा है और कई मामलों में उन्हें घंटों या कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है। ब्लड बैंक को स्थायी लाइसेंस नहीं मिलने और जांच प्रक्रिया के लिए रक्त को रांची भेजने की मजबूरी के कारण यह समस्या और गंभीर हो गई है।
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लोहरदगा ब्लड बैंक में खून की कमी से बढ़ी मुश्किलें
Lohardaga News के अनुसार सदर अस्पताल स्थित ब्लड बैंक में रक्त की उपलब्धता काफी कम हो गई है। अस्पताल में आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को समय पर खून नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनकी परेशानी बढ़ रही है।
जिले में हर महीने लगभग 600 यूनिट रक्त की आवश्यकता होती है, लेकिन वर्तमान में ब्लड बैंक इस जरूरत को पूरा नहीं कर पा रहा है। इसका मुख्य कारण रक्तदान की कम संख्या और प्रशासनिक प्रक्रिया में हो रही देरी है।
स्थायी लाइसेंस न मिलने से प्रभावित हो रही व्यवस्था
इस Lohardaga News रिपोर्ट के मुताबिक ब्लड बैंक को अब तक स्थायी लाइसेंस नहीं मिला है। इसी वजह से यहां एकत्र किए गए रक्त की जांच स्थानीय स्तर पर नहीं हो पाती।
जब तक लाइसेंस नहीं मिलता, तब तक हर यूनिट रक्त की जांच के लिए उसे दूसरे शहर भेजना पड़ता है, जिससे मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध नहीं हो पाता।
रांची भेजने से जांच प्रक्रिया में लग रहे कई दिन
ब्लड बैंक में एकत्र किए गए रक्त को जांच के लिए रांची भेजा जाता है। प्रक्रिया कुछ इस प्रकार है:
रक्त जांच की प्रक्रिया
- पहले रक्तदान के बाद ब्लड बैंक में यूनिट जमा किया जाता है
- इसके बाद कर्मचारियों द्वारा रक्त को रांची सदर अस्पताल ले जाया जाता है
- वहां से रक्त को आगे जांच के लिए रिम्स (RIMS) भेजा जाता है
- जांच पूरी होने के बाद ही रक्त वापस उपलब्ध कराया जाता है
इस पूरी प्रक्रिया में 2 से 3 दिन का समय लग जाता है, जिससे मरीजों को तत्काल रक्त उपलब्ध नहीं हो पाता।
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रक्तदान करने वालों की संख्या भी कम
Lohardaga News के अनुसार समस्या का एक बड़ा कारण रक्तदान करने वालों की कम संख्या भी है।
कई बार केवल 2 से 3 यूनिट रक्तदान ही हो पाता है। ऐसी स्थिति में ब्लड बैंक के कर्मचारी कुछ और यूनिट जमा होने का इंतजार करते हैं ताकि एक साथ जांच के लिए भेजा जा सके।
इस कारण जांच प्रक्रिया और अधिक देर से पूरी होती है और जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त नहीं मिल पाता।
थैलेसिमिया और प्रसव मामलों में बढ़ी चिंता
ब्लड बैंक में खून की कमी का सबसे ज्यादा असर थैलेसिमिया मरीजों और गर्भवती महिलाओं पर पड़ रहा है।
सरकारी नियमों के अनुसार थैलेसिमिया मरीजों को प्राथमिकता के आधार पर रक्त उपलब्ध कराना जरूरी है। इसके बाद प्रसव और अन्य गंभीर मामलों में खून दिया जाता है।
लेकिन मौजूदा स्थिति में कई बार इन मरीजों को भी समय पर रक्त नहीं मिल पा रहा है।
रक्तदान शिविरों की गतिविधियां हुईं धीमी
Lohardaga News में यह भी सामने आया है कि जिले में रक्तदान शिविरों की गतिविधियां भी काफी कम हो गई हैं।
जिले में कई सामाजिक और राजनीतिक संगठन रक्तदान अभियान से जुड़े रहे हैं, जिनमें शामिल हैं:
- इमरजेंसी केयर संस्था
- जय श्री राम समिति
- मुस्लिम यूथ वेलफेयर सोसाइटी
- आदिवासी समिति
- रेड क्रॉस सोसाइटी
- भारतीय जनता पार्टी
- युवा कांग्रेस
इन संगठनों के सहयोग से पहले समय-समय पर रक्तदान शिविर आयोजित होते थे, लेकिन हाल के दिनों में इन गतिविधियों में काफी कमी आ गई है।
वाहन और संसाधनों की कमी से बढ़ी समस्या
ब्लड बैंक के कर्मचारियों को कई व्यावहारिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
प्रमुख समस्याएं
- जांच के लिए रक्त ले जाने के लिए वाहन की कमी
- वाहन के लिए डीजल की व्यवस्था नहीं होना
- सीमित संसाधन और कर्मचारियों की कमी
कई बार ऐसी स्थिति बन जाती है कि रक्त जांच के लिए भेजने में भी देरी हो जाती है।
जिले में रक्त की मासिक आवश्यकता
| श्रेणी | अनुमानित आवश्यकता |
|---|---|
| मासिक रक्त आवश्यकता | लगभग 600 यूनिट |
| औसत रक्तदान | काफी कम |
| जांच समय | 2 से 3 दिन |
| सबसे ज्यादा प्रभावित | थैलेसिमिया व प्रसव मरीज |
यह आंकड़े बताते हैं कि जिले में रक्त की मांग और उपलब्धता के बीच बड़ा अंतर है।
समस्या के समाधान के लिए जरूरी कदम
Lohardaga News के अनुसार विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या को दूर करने के लिए कुछ जरूरी कदम उठाने होंगे।
संभावित समाधान
- ब्लड बैंक को जल्द स्थायी लाइसेंस देना
- स्थानीय स्तर पर रक्त जांच की व्यवस्था करना
- नियमित रक्तदान शिविर आयोजित करना
- ब्लड बैंक के लिए अलग वाहन उपलब्ध कराना
- लोगों में रक्तदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना
अगर ये कदम उठाए जाते हैं तो लोहरदगा जिले में रक्त संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
निष्कर्ष
Lohardaga News के अनुसार सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में खून की कमी एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। स्थायी लाइसेंस की कमी, जांच प्रक्रिया में देरी और रक्तदान गतिविधियों में कमी के कारण मरीजों को समय पर रक्त नहीं मिल पा रहा है।
यदि प्रशासन जल्द ठोस कदम उठाता है और समाज भी रक्तदान के लिए आगे आता है, तो इस समस्या का समाधान संभव है। जरूरत है जागरूकता और बेहतर व्यवस्था की ताकि किसी भी मरीज को खून की कमी के कारण परेशानी न झेलनी पड़े।