पूर्व मंत्री Mithilesh Thakur

Popular Posts

Dr Ajeet Singh:

Dr Ajeet Singh: परिवार बचेंगे तो भारत बचेगा: विकास की दौड़ में कहीं हम अपना आधार तो नहीं खो रहे?

Dr Ajeet Singh: भारत केवल एक भौगोलिक सीमा या राजनीतिक इकाई नहीं है। भारत एक विचार, एक संस्कृति और जीवन जीने की एक विशिष्ट परंपरा का नाम है। हजारों वर्षों से भारतीय समाज की सबसे बड़ी ताकत उसकी पारिवारिक व्यवस्था रही है। संयुक्त परिवार, बड़ों का सम्मान, त्याग, कर्तव्य और आपसी सहयोग जैसे मूल्य भारतीय सभ्यता की मजबूत नींव रहे हैं।

लेकिन आज विकास और आधुनिकता की तेज दौड़ के बीच एक गंभीर सवाल खड़ा हो रहा है—क्या हम प्रगति के साथ अपने सामाजिक आधार यानी परिवार को कहीं पीछे तो नहीं छोड़ रहे हैं?

Dr Ajeet Singh का मानना है कि परिवार केवल साथ रहने की व्यवस्था नहीं है, बल्कि यह संस्कार, संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी का पहला विद्यालय है। आज तकनीक और आर्थिक विकास ने जीवन को पहले से कहीं अधिक सुविधाजनक बना दिया है। दुनिया एक क्लिक की दूरी पर आ गई है, लेकिन इसके साथ लोगों के बीच भावनात्मक दूरी भी बढ़ती दिखाई दे रही है।

Jharkhand समेत देशभर के Important News पायें, Group Join करें

Dr Ajeet Singh:

Jharkhand समेत देशभर के Important News पायें, Group Join करें

Dr Ajeet Singh: तकनीक ने दूरी घटाई, लेकिन भावनात्मक दूरी बढ़ी

आज हमारे पास संवाद के पहले से कहीं अधिक साधन हैं। सोशल मीडिया, मोबाइल और इंटरनेट ने पूरी दुनिया को जोड़ दिया है। इसके बावजूद वास्तविक जीवन में आत्मीय संवाद और रिश्तों की गर्माहट कम होती जा रही है।

हमारे पास संपर्कों की लंबी सूची है, लेकिन आत्मीय संबंधों की संख्या घट रही है। हम हजारों लोगों से डिजिटल रूप से जुड़े हैं, लेकिन अपने ही परिवार के सदस्यों के साथ बैठकर बातचीत करने का समय कम होता जा रहा है।

Dr Ajeet Singh के अनुसार, यह केवल जीवनशैली में बदलाव नहीं है, बल्कि सामाजिक मूल्यों में हो रहे परिवर्तन का संकेत भी है।

Dr Ajeet Singh: परिवार भारतीय समाज का पहला विद्यालय रहा है

भारतीय परंपरा में परिवार को केवल रहने की जगह नहीं माना गया। परिवार वह स्थान रहा है जहाँ बच्चे संस्कार सीखते हैं, बुजुर्गों के अनुभवों से जीवन की समझ हासिल करते हैं और कठिन समय में एक-दूसरे का सहारा बनते हैं।

परिवार बच्चों को स्वार्थ से ऊपर उठकर सामूहिक जीवन, सहयोग और जिम्मेदारी का महत्व समझाता है। लेकिन आज आर्थिक प्रतिस्पर्धा, व्यस्त जीवनशैली और डिजिटल दुनिया के बढ़ते प्रभाव ने परिवारों के भीतर संवाद को प्रभावित किया है।

माता-पिता रोजगार और जिम्मेदारियों में व्यस्त हैं। बच्चे डिजिटल दुनिया में अधिक समय बिता रहे हैं और बुजुर्ग कई बार खुद को उपेक्षित महसूस करते हैं। घर में भौतिक निकटता होने के बावजूद भावनात्मक दूरी बढ़ती जा रही है।

Jharkhand समेत देशभर के Important News पायें, Group Join करें

Dr Ajeet Singh: नई पीढ़ी के सामने सबसे बड़ी चुनौती

आज की पीढ़ी सूचना और तकनीक के दौर में बड़ी हो रही है। उसके पास दुनिया की लगभग हर जानकारी उपलब्ध है। लेकिन जानकारी और ज्ञान में अंतर होता है।

चरित्र, संवेदना, सहानुभूति, धैर्य और जिम्मेदारी जैसी मानवीय विशेषताएं केवल इंटरनेट या किताबों से नहीं सीखी जा सकतीं। इनका विकास परिवार और समाज के जीवंत अनुभवों से होता है।

आज कई बच्चों को दुनिया भर की खबरें पता होती हैं, लेकिन वे अपने दादा-दादी की जीवन यात्रा से अनजान रहते हैं। उन्हें सोशल मीडिया पर हजारों लोगों की पोस्ट दिखाई देती हैं, लेकिन कई बार वे अपने माता-पिता की थकान और संघर्ष को समझ नहीं पाते।

Dr Ajeet Singh का कहना है कि इसके लिए केवल नई पीढ़ी को दोषी ठहराना सही नहीं होगा। कहीं न कहीं पूरे समाज को आत्ममंथन करने की आवश्यकता है।

हमने बच्चों को करियर बनाना सिखाया, लेकिन चरित्र निर्माण पर उतना ध्यान नहीं दिया। हमने उन्हें प्रतियोगिता सिखाई, लेकिन करुणा और सहयोग का महत्व कम समझाया। हमने उन्हें अधिकारों के बारे में बताया, लेकिन कर्तव्यों का बोध उतना मजबूत नहीं किया।

Dr Ajeet Singh:

Jharkhand समेत देशभर के Important News पायें, Group Join करें

Dr Ajeet Singh: राष्ट्र केवल इमारतों और सड़कों से महान नहीं बनता

कोई भी राष्ट्र केवल ऊंची इमारतों, चौड़ी सड़कों, उद्योगों और आर्थिक विकास से महान नहीं बनता। किसी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसके मजबूत समाज और परिवारों में निहित होती है।

यदि परिवार कमजोर होंगे तो संस्कारों का पहला विद्यालय कमजोर होगा। संस्कार कमजोर होंगे तो समाज में विश्वास कम होगा। और जब सामाजिक विश्वास कमजोर पड़ता है, तो राष्ट्र की एकता और सामाजिक स्थिरता भी प्रभावित होती है।

इसलिए आधुनिकता का विरोध समाधान नहीं है। तकनीक और विकास आवश्यक हैं, लेकिन उनके साथ मानवीय मूल्यों का संतुलन भी जरूरी है।

Dr Ajeet Singh: आधुनिक भारत के साथ मजबूत पारिवारिक मूल्य भी जरूरी

भारत को तकनीकी रूप से आधुनिक और सांस्कृतिक रूप से मजबूत दोनों बनना होगा। बच्चों को केवल सफल नहीं, बल्कि संवेदनशील बनाना होगा। उन्हें केवल प्रतिस्पर्धा नहीं, सहयोग का महत्व भी समझाना होगा।

उन्हें अधिकारों के साथ कर्तव्यों का बोध कराना होगा। करियर के साथ चरित्र और सफलता के साथ मानवीयता का महत्व भी सिखाना होगा।

परिवारों को भी खुद से कुछ सवाल पूछने होंगे—

  • क्या हम अपने बच्चों से रोज खुलकर बातचीत करते हैं?
  • क्या हम बुजुर्गों के अनुभवों को महत्व देते हैं?
  • क्या परिवार के साथ भोजन और समय बिताने की परंपरा बची हुई है?
  • क्या हम बच्चों को सफलता का सही अर्थ समझा रहे हैं?

इन सवालों के जवाब ही आने वाले भारत की दिशा तय करेंगे।

Dr Ajeet Singh:

Jharkhand समेत देशभर के Important News पायें, Group Join करें

Dr Ajeet Singh: vपरिवारों को मजबूत करना ही राष्ट्र निर्माण की पहली शर्त

इतिहास बताता है कि सभ्यताएं केवल बाहरी चुनौतियों से नहीं, बल्कि आंतरिक कमजोरी से भी कमजोर होती हैं। जब समाज के मूल मूल्य कमजोर पड़ते हैं, तो विकास की बड़ी-बड़ी उपलब्धियां भी उस कमी को पूरा नहीं कर पातीं।

भारत की वास्तविक शक्ति उसके परिवारों में है। जब तक परिवारों में प्रेम, सम्मान, त्याग और विश्वास जीवित रहेगा, तब तक भारतीय समाज की आत्मा भी मजबूत रहेगी।

इसलिए आज आवश्यकता है कि परिवार को फिर से समाज के केंद्र में स्थापित किया जाए। संवाद को बढ़ावा दिया जाए, बच्चों को समय दिया जाए, बुजुर्गों का सम्मान किया जाए और संस्कारों को जीवन का हिस्सा बनाया जाए।

भारत का भविष्य केवल संसदों, कार्यालयों और उद्योगों में तय नहीं होगा। इसका सबसे बड़ा हिस्सा घरों के भीतर तय होगा।

क्योंकि राष्ट्र परिवारों से बनता है।

यदि परिवार बचेंगे, तो समाज बचेगा।
यदि समाज बचेगा, तो संस्कृति बचेगी।
और यदि संस्कृति बचेगी, तो भारत एक जीवंत सभ्यता के रूप में सदैव आगे बढ़ता रहेगा।

Jharkhand समेत देशभर के Important News पायें, Group Join करें

Content Edited & Published By
Niraj Kumar Sharma