SIR In Jharkhand: गढ़वा में पहले से भरे Form-7 मिलने से SIR की निष्पक्षता पर उठे सवाल, JMM ने मामले की निष्पक्ष जांच की रखी मांग
Ranchi/Garhwa SIR In Jharkhand: झारखंड में SIR की निष्पक्षता को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हुये हैं, झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए गढ़वा में SIR यानी Special Intensive Revision से जुड़े दस्तावेज और कथित तौर पर पहले से भरे हुए Form-7 मिलने का दावा किया है। पार्टी ने पूरे मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और दस्तावेज-आधारित जांच की मांग की है।
JMM Jamtara पर किए गए X पोस्ट के अनुसार, गढ़वा की एक दुकान से ऐसे Form-7 मिले हैं, जिनमें मतदाताओं का विवरण पहले से कंप्यूटर के माध्यम से दर्ज था। पार्टी ने सवाल उठाया है कि इन प्रपत्रों को किसने तैयार किया और किन मतदाताओं के नाम के संबंध में उनका इस्तेमाल किया जाना था।
गढ़वा में Form-7 को लेकर JMM ने क्या दावा किया?
JMM की ओर से किए गए सोशल मीडिया पोस्ट में कहा गया है कि गढ़वा की एक दुकान से ऐसे Form-7 बरामद हुए, जो पहले से कंप्यूटर द्वारा भरे हुए थे। पार्टी के अनुसार, इन forms में मतदाताओं की जानकारी पहले से अंकित थी।
बता दें कि Form-7 मतदाता सूची से किसी नाम को हटाने के लिए इस्तेमाल होने वाला निर्वाचन संबंधी प्रपत्र है। ऐसे में JMM ने पहले से भरे हुए forms मिलने के दावे को गंभीर बताते हुए इनके स्रोत और इस्तेमाल की परिस्थितियों की जांच की मांग की है।
पार्टी का कहना है कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि इन forms को किसने तैयार किया, उनका उद्देश्य क्या था और वे किन मतदाताओं के नाम हटाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले थे।
Jharkhand समेत देशभर के Important News पायें, Group Join करें
BJP से जुड़े सामग्री वाले झोले में SIR दस्तावेज मिलने का दावा
JMM ने अपने पोस्ट में एक अन्य दावा भी किया है। पार्टी के मुताबिक, गढ़वा की मतदाता सूची और SIR से संबंधित दस्तावेज एक ऐसे झोले में मिले, जिस पर भाजपा विधायक सत्येन्द्र नाथ तिवारी द्वारा प्रकाशित भाजपा संबंधी सामग्री अंकित थी।
JMM ने कहा है कि इस तथ्य को महज संयोग मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए और झोले में मौजूद सामग्री का स्रोत, उसकी अभिरक्षा तथा वहां तक पहुंचने की परिस्थितियों की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
JMM ने BJP और विधायक से मांगा स्पष्टीकरण
झारखंड मुक्ति मोर्चा ने अपने पोस्ट के माध्यम से BJP Jharkhand और विधायक सत्येन्द्र नाथ तिवारी से स्पष्टीकरण की मांग की है।
JMM का सवाल है कि भाजपा संबंधी सामग्री वाले झोले में SIR से जुड़े मतदाता दस्तावेज और मतदाता सूची किस परिस्थिति में पहुंची। पार्टी ने यह भी पूछा है कि कथित रूप से पहले से भरे हुए Form-7 किसने तैयार किए और उन्हें किन मतदाताओं के नाम के संबंध में प्रस्तुत किया जाना था।
इन सवालों पर संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया इस मामले की आगे की तस्वीर स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण हो सकती है।
मतदाता सूची में नाम हटाने को लेकर उठाया सवाल
JMM ने आशंका जताई है कि यदि कथित पूर्व-भरे Form-7 के माध्यम से पात्र मतदाताओं के नाम हटाने का कोई सुनियोजित या अनधिकृत प्रयास हुआ है, तो यह निर्वाचन प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।
पार्टी ने इस संदर्भ में मतदाताओं के वैधानिक और संवैधानिक अधिकारों का मुद्दा भी उठाया है। JMM का कहना है कि मतदाता सूची किसी राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं, बल्कि नागरिक के मताधिकार की महत्वपूर्ण आधारशिला है।
CEO Jharkhand और Garhwa प्रशासन से जांच की मांग
JMM ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, झारखंड (CEO Jharkhand) और गढ़वा के उपायुक्त (DC Garhwa) से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।
पार्टी की मांगों में कथित Form-7 के स्रोत की पहचान करना, उन्हें तैयार करने वालों का पता लगाना, संबंधित दस्तावेजों की अभिरक्षा की जांच करना और यह पता लगाना शामिल है कि ये दस्तावेज राजनीतिक कार्यकर्ताओं तक किन परिस्थितियों में पहुंचे।
JMM ने यह भी मांग रखी है कि जांच पूरी होने तक केवल ऐसे संदिग्ध पूर्व-भरे प्रपत्रों के आधार पर किसी पात्र मतदाता का नाम हटाने की कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।
SIR In Jharkhand को लेकर क्यों महत्वपूर्ण है मामला?
SIR In Jharkhand के संदर्भ में मतदाता सूची से जुड़े किसी भी विवाद का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि electoral roll सीधे नागरिक के मतदान के अधिकार से जुड़ी होती है।
मतदाता सूची के revision की प्रक्रिया में नाम जोड़ने, सुधार करने और पात्र परिस्थितियों में नाम हटाने के लिए निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन आवश्यक होता है। ऐसे में किसी भी पक्ष द्वारा अनियमितता का आरोप लगाए जाने पर तथ्यों की स्वतंत्र जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।
गढ़वा से सामने आए इस मामले में भी सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि कथित Form-7 वास्तव में किस उद्देश्य से तैयार किए गए थे, उनमें दर्ज जानकारी किस स्रोत से आई और उनका इस्तेमाल किस प्रक्रिया के तहत किया जाना था। इन सवालों का जवाब संबंधित दस्तावेजों और आधिकारिक जांच से ही स्पष्ट हो सकता है।
राजनीतिक आरोपों के बीच जांच का इंतजार
झारखंड की राजनीति में SIR को लेकर पहले से ही चर्चा जारी है। ऐसे में गढ़वा से संबंधित JMM के इस दावे ने मामले को राजनीतिक रूप से और महत्वपूर्ण बना दिया है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी JMM के सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित है। इसलिए इस मामले में किसी व्यक्ति या संगठन को दोषी मानने से पहले आधिकारिक जांच और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया का इंतजार करना जरूरी है।
यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो उसके आधार पर आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ होगा। वहीं यदि आरोपों की पुष्टि नहीं होती है, तो उससे भी स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
निष्कर्ष
SIR In Jharkhand को लेकर गढ़वा में सामने आए कथित पूर्व-भरे Form-7 और SIR से जुड़े दस्तावेजों के मामले ने मतदाता सूची की पारदर्शिता और निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर नए सवाल खड़े किए हैं। JMM ने इस संबंध में BJP और संबंधित विधायक से स्पष्टीकरण मांगने के साथ-साथ CEO Jharkhand और Garhwa प्रशासन से स्वतंत्र जांच की मांग की है।
हालांकि, अभी यह मामला राजनीतिक आरोप और दावे के स्तर पर है। इसलिए पूरे प्रकरण में वास्तविक स्थिति जानने के लिए आधिकारिक जांच, दस्तावेजों की सत्यता और संबंधित अधिकारियों की रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदाता सूची की शुचिता बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए SIR In Jharkhand से जुड़े किसी भी विवाद का समाधान राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि पारदर्शी और तथ्य-आधारित जांच के माध्यम से होना चाहिए।
Jharkhand समेत देशभर के Important News पायें, Group Join करें