Jharkhand News: झारखंड में 100 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र होंगे अपग्रेड, 600 डॉक्टरों की जरूरत
रांची: झारखंड में ग्रामीण और प्रखंड स्तर की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार ने अहम पहल की है। स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के 100 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) को अपग्रेड करने की योजना तैयार की है। इस कदम का उद्देश्य इन केंद्रों पर मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ डॉक्टरों, पैरामेडिकल कर्मियों और अन्य जरूरी मानव संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने इस संबंध में सभी जिलों के सिविल सर्जनों से प्रस्ताव मांगा है। अधिकारियों को मौजूदा पदों और अस्पतालों की वास्तविक जरूरत का आकलन कर 10 दिनों के भीतर रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।
प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र से एक CHC के चयन की योजना
सरकार की योजना के तहत प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में कम से कम एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को अपग्रेड करने पर काम किया जा रहा है। इसके लिए संबंधित क्षेत्रों में मौजूद स्वास्थ्य केंद्रों की सुविधाओं, मरीजों के दबाव, भवन की स्थिति और उपलब्ध चिकित्सा स्टाफ की समीक्षा की जाएगी।
रांची जिले में बुंडू, नामकुम, सिल्ली, रातू, कांके और मांडर जैसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को अपग्रेड करने के लिए चयनित किए जाने की जानकारी सामने आई है। इन केंद्रों पर आवश्यक सुविधाएं बढ़ाने के साथ मानव संसाधन की जरूरत का भी आकलन किया जाएगा।
100 CHC के लिए करीब 600 डॉक्टरों की जरूरत
स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा में सामने आया है कि 100 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के उन्नयन के बाद यहां अतिरिक्त चिकित्सकीय मानव संसाधन की जरूरत पड़ेगी। विभाग के अनुसार, इन केंद्रों के लिए लगभग 600 डॉक्टरों की आवश्यकता हो सकती है।
इसके साथ ही पैरामेडिकल स्टाफ और अन्य जरूरी पदों की भी समीक्षा की जाएगी। सरकार के सामने अब प्रमुख चुनौती इन पदों को भरने और अपग्रेड किए जाने वाले केंद्रों में पर्याप्त चिकित्सा कर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की होगी।
अधिकारियों को डॉक्टरों की उपलब्धता और नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर भी आवश्यक विचार-विमर्श करने को कहा गया है।
पुराने और अनुपयोगी पदों का होगा पुनर्गठन
स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों में पदों के पुनर्गठन पर भी जोर दिया है। जिन अस्पतालों या स्वास्थ्य केंद्रों में पुराने अथवा अनुपयोगी पद मौजूद हैं, उन्हें सरेंडर कर जरूरत वाले स्थानों पर नए पदों के सृजन में इस्तेमाल करने की योजना है।
जिन इलाकों में नए अस्पताल भवन बनकर तैयार हो चुके हैं, वहां जरूरत के मुताबिक नए पद सृजित करने का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए सभी जिलों के सिविल सर्जनों को अपने-अपने क्षेत्र की वास्तविक आवश्यकता के आधार पर प्रस्ताव तैयार करना होगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल अस्पतालों की संख्या या भवन बढ़ाना नहीं, बल्कि उपलब्ध संसाधनों को जरूरत के अनुसार व्यवस्थित करना भी है।
Jharkhand समेत देशभर के Important News पायें, Group Join करें
30 और 50 बेड वाले अस्पतालों पर भी फोकस
स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा केवल 100 CHC तक सीमित नहीं है। बैठक में प्रस्तावित 30 और 50 बेड वाले MCH केंद्रों तथा 100 बेड वाले जिला अस्पतालों के लिए भी डॉक्टरों और पैरामेडिकल कर्मियों के पदों के पुनर्गठन पर चर्चा की गई।
इससे संकेत मिलता है कि राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को अलग-अलग स्तरों पर मजबूत करने के लिए मानव संसाधन की जरूरत का व्यापक आकलन किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए CHC स्तर पर विशेषज्ञ सेवाओं और पर्याप्त स्टाफ की उपलब्धता महत्वपूर्ण होगी।
छह CHC को ट्रामा सेंटर के रूप में विकसित करने पर विचार
Jharkhand News में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी इस योजना का एक अहम हिस्सा कुछ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को ट्रामा सेंटर के रूप में विकसित करना भी है।
स्वास्थ्य विभाग ने तोपचांची, बरही, निरसा, हंसडीहा, बुंडू और चैनपुर स्थित CHC को ट्रामा सेंटर के तौर पर अपग्रेड करने के लिए प्रस्ताव देने को कहा है। इन केंद्रों का चयन होने पर दुर्घटना और अन्य आपात स्थितियों में मरीजों को शुरुआती उपचार स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कदम
झारखंड जैसे राज्य में ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंचाने के लिए प्रखंड स्तर के अस्पतालों की भूमिका महत्वपूर्ण है। CHC को मजबूत करने से मरीजों को हर छोटी-बड़ी चिकित्सा जरूरत के लिए जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज की ओर जाने की आवश्यकता कम हो सकती है।
इससे रेफरल व्यवस्था पर दबाव घटाने और गंभीर मामलों को समय पर उचित केंद्र तक पहुंचाने में भी मदद मिल सकती है। पहले से ही राज्य में CHC को फर्स्ट रेफरल यूनिट (FRU) के तौर पर विकसित करने की व्यापक योजना पर चर्चा होती रही है, जिसमें आपात चिकित्सा, जटिल प्रसव और अन्य जरूरी सेवाओं को ब्लॉक स्तर पर मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है।
अब जिलों से मांगा गया विस्तृत प्रस्ताव
स्वास्थ्य विभाग ने सभी सिविल सर्जनों को निर्देश दिया है कि वे अपने जिलों में मौजूद स्वास्थ्य संस्थानों की स्थिति और जरूरत के आधार पर प्रस्ताव तैयार करें। इसमें डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और अन्य पदों की आवश्यकता के साथ मौजूदा पदों की उपयोगिता का भी आकलन किया जाएगा।
अगले चरण में इन प्रस्तावों के आधार पर यह तय किया जा सकता है कि किन CHC में किस स्तर की सुविधा विकसित की जानी है और उसके लिए कितने मानव संसाधन की आवश्यकता होगी।
कुल मिलाकर, 100 CHC को अपग्रेड करने की यह योजना झारखंड की प्रखंड और ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक पहल है। हालांकि योजना को प्रभावी बनाने के लिए पर्याप्त डॉक्टरों, पैरामेडिकल कर्मियों, उपकरणों और आवश्यक आधारभूत सुविधाओं की उपलब्धता अहम होगी।

