Bihar Job Fair में 48 हजार की नौकरी का दिखाया सपना, दिल्ली पहुंचते ही बना दिया कॉल गर्ल!
पटना: बिहार के युवाओं को रोजगार देने के लिए आयोजित Bihar Job Fair 2026 अब एक गंभीर आरोप को लेकर चर्चा में है। पटना की रहने वाली एक युवती ने दावा किया है कि रोजगार मेले में मिला नियुक्ति पत्र लेकर जब वह दिल्ली पहुंची, तो नौकरी के बजाय उसके साथ कथित तौर पर ऐसा व्यवहार किया गया जिसने उसके होश उड़ा दिए।
पूजा कुमारी के मुताबिक, उन्हें ICU नर्स की नौकरी के लिए 48 हजार रुपये महीने की सैलरी का ऑफर मिला था। 23 अगस्त को पटना के ज्ञान भवन में आयोजित रोजगार मेले के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के हाथों उन्हें नियुक्ति पत्र भी दिया गया था। इसके बाद बेहतर भविष्य का सपना लेकर वह दिल्ली रवाना हुईं।
दिल्ली पहुंचते ही बदल गई पूरी कहानी?
पूजा का आरोप है कि दिल्ली पहुंचने के बाद उन्हें अस्पताल में नौकरी देने के बजाय एक हॉस्टल में रखा गया। उनका दावा है कि वहां मौजूद लड़कियों के साथ भी कथित तौर पर गलत व्यवहार किया जाता था।
पूजा ने आरोप लगाया कि लड़कियों को लड़कों के सामने पेश किया जाता था। विरोध करने या बात मानने से इनकार करने पर कथित रूप से उन्हें खाना नहीं दिया जाता था और उनसे शौचालय साफ कराया जाता था।
सबसे गंभीर दावा यह है कि पूजा के अनुसार, उन्हें विदेश भेजने की तैयारी भी की जा रही थी। इन आरोपों ने रोजगार के नाम पर होने वाली संभावित धोखाधड़ी और मानव तस्करी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
किसी तरह निकलीं बाहर, अब पटना में मदद की गुहार
पूजा का कहना है कि वह किसी तरह वहां से निकलने में कामयाब हुईं और वापस पटना पहुंचीं। अब वह मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात कर अपनी शिकायत रखने की कोशिश कर रही हैं।
इस पूरे मामले ने Bihar Job Fair के जरिए युवाओं को निजी कंपनियों में नौकरी दिलाने की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर दूसरे राज्यों में भेजे जाने वाले अभ्यर्थियों के लिए कंपनी, नौकरी की जगह और नियुक्ति की वास्तविकता की जांच कितनी पुख्ता है—यह सवाल अब अहम हो गया है।
आखिर क्या है Bihar Job Fair का पूरा संदर्भ?
पटना में आयोजित मेगा रोजगार मेले में बड़ी संख्या में कंपनियों ने हिस्सा लिया था और हजारों युवाओं के चयन की बात सामने आई थी। चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र भी दिए गए थे।
लेकिन पूजा के आरोप सामने आने के बाद अब सवाल सिर्फ एक नौकरी का नहीं रह गया है। सवाल यह है कि रोजगार के नाम पर युवाओं को भेजने से पहले कंपनियों और नौकरी की पूरी प्रक्रिया का सत्यापन कैसे किया जाता है?
फिलहाल पूजा द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित कंपनी और प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी।