CM Hemant Soren: ने PM Modi को लिखा पत्र, खनिज विधेयक 2026 पर पुनर्विचार की मांग

CM Hemant Soren:

रांची/नई दिल्ली। झारखंड के मुख्यमंत्री CM Hemant Soren ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Bill, 2026 के प्रस्तावित प्रावधानों पर गंभीर आपत्ति जताई है। CM Hemant Soren ने प्रधानमंत्री से इस विधेयक पर पुनर्विचार करने और इसे मौजूदा स्वरूप में आगे नहीं बढ़ाने का आग्रह किया है। मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में इसे झारखंड के संवैधानिक अधिकारों, राजस्व, विकास योजनाओं और केंद्र-राज्य संबंधों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताया है।

CM Hemant Soren का यह पत्र ऐसे समय आया है जब Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Bill, 2026 को लेकर खनिज संपदा वाले राज्यों में चर्चा तेज है। मुख्यमंत्री ने पत्र में कहा है कि प्रस्तावित संशोधन से राज्यों की खनिज अधिकारों और खनिजयुक्त भूमि पर कर, सेस या अन्य शुल्क लगाने की शक्ति प्रभावित हो सकती है। झारखंड के लिए यह मुद्दा विशेष महत्व रखता है, क्योंकि राज्य की अर्थव्यवस्था में खनन और खनिज संसाधनों की बड़ी भूमिका है।

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CM Hemant Soren ने किन प्रावधानों पर जताई आपत्ति

CM Hemant Soren ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में खास तौर पर विधेयक की Clauses 2, 3, 4 और 5 पर पुनर्विचार की मांग की है। पत्र के अनुसार, प्रस्तावित संशोधन के तहत Mines and Minerals (Development and Regulation) Act, 1957 में Section 9D जोड़ने का प्रस्ताव है।

इस प्रावधान के जरिए खनिज अधिकारों या खनिजयुक्त भूमि पर राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले किसी भी Tax, Cess या अन्य Levy को केंद्र सरकार की ओर से निर्धारित शर्तों या प्रतिबंधों के अधीन करने का प्रस्ताव है।

CM Hemant Soren ने अपने पत्र में कहा है कि झारखंड सरकार विधेयक के उन उद्देश्यों को समझती है, जिनमें खनिज क्षेत्र में निश्चितता, स्थिरता और पूर्वानुमेयता लाने की बात कही गई है। हालांकि, मुख्यमंत्री के मुताबिक झारखंड के संदर्भ में प्रस्तावित संशोधन कई संवैधानिक, वित्तीय, विकासात्मक और संघीय चिंताएं पैदा करता है।

CM Hemant Soren: सुप्रीम कोर्ट के 2024 के फैसले का दिया हवाला

मुख्यमंत्री के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने बहुमत के फैसले में राज्य विधानसभाओं की उस विधायी क्षमता को मान्यता दी थी, जिसके तहत Entry 49 of List II के अंतर्गत खदानों और खदानों वाली जमीन सहित भूमि पर कर लगाया जा सकता है। पत्र में कहा गया है कि खनिजयुक्त भूमि को इस उद्देश्य के लिए ‘lands’ की श्रेणी में माना गया है।

CM Hemant Soren ने तर्क दिया है कि Entry 49 और Entry 50 के बीच सुप्रीम कोर्ट द्वारा किया गया अंतर महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, Entry 50 के संबंध में संसद की ओर से लगाए जा सकने वाले प्रतिबंधों को Entry 49 के तहत राज्यों की भूमि पर कर लगाने की शक्ति तक स्वतः विस्तारित नहीं किया जा सकता।

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Jharkhand Mineral Bearing Land Cess Act 2024 का भी उल्लेख

CM Hemant Soren ने पत्र में झारखंड सरकार की ओर से बनाए गए Jharkhand Mineral Bearing Land Cess Act, 2024 का भी उल्लेख किया है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि यह कोई प्रशासनिक अथवा कार्यपालिका स्तर पर लगाया गया शुल्क नहीं था, बल्कि राज्य विधानसभा द्वारा संवैधानिक विधायी प्रक्रिया के तहत पारित कानून था।

पत्र के अनुसार, इस कानून के माध्यम से खनिजयुक्त भूमि पर सेस लगाने और उससे प्राप्त राशि का इस्तेमाल स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, ग्रामीण बुनियादी ढांचे, पेयजल, स्वच्छता, कृषि और अन्य आवश्यक कार्यों में करने की व्यवस्था की गई है।

इसके बाद राज्य सरकार ने Jharkhand Mineral Bearing Land Cess Rules, 2024 भी तैयार किए, जिनके जरिए इस राशि के प्रशासन और उपयोग के लिए संस्थागत व्यवस्था बनाई गई।

CM Hemant Soren ने बताया खनन से जुड़े सामाजिक और पर्यावरणीय नुकसान

CM Hemant Soren ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में केवल राजस्व का मुद्दा ही नहीं उठाया है, बल्कि खनन से झारखंड को होने वाले सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभावों की भी चर्चा की है।

पत्र में कहा गया है कि झारखंड में कई दशकों से बड़े पैमाने पर खनन गतिविधियां होती रही हैं। इसके कारण विस्थापन, भूमि अलगाव, पर्यावरणीय क्षति, प्रदूषण, स्थानीय आधारभूत संरचनाओं पर दबाव तथा पारंपरिक सामाजिक और सांस्कृतिक व्यवस्थाओं में व्यवधान जैसी समस्याएं पैदा हुई हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा है कि झारखंड ने अपने खनिज संसाधनों के माध्यम से देश के औद्योगीकरण, ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास में बड़ा योगदान दिया है। ऐसे में खनिज संपदा को केवल आर्थिक लाभ के रूप में नहीं देखा जा सकता। खनिज संपदा वाले क्षेत्रों के लोगों ने इसके सामाजिक, पर्यावरणीय और विकासात्मक प्रभावों की कीमत भी चुकाई है।

CM Hemant Soren: खनिज राजस्व को विकास योजनाओं से जोड़ा

CM Hemant Soren ने पत्र में कहा है कि राज्य को खनिज संसाधनों से मिलने वाली Royalty, District Mineral Foundation से प्राप्त राशि और अन्य वैधानिक राजस्व का इस्तेमाल सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, ग्रामीण बुनियादी ढांचे, पुनर्वास और सामाजिक सुरक्षा जैसे कार्यों में किया जाता है।

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मुख्यमंत्री ने Mukhyamantri Maiya Samman Yojana का भी उल्लेख करते हुए कहा है कि खनिज राजस्व से पैदा होने वाले वित्तीय संसाधनों ने राज्य को बड़े स्तर पर सामाजिक कल्याण और विकास योजनाएं चलाने में मदद की है।

पत्र में 2025-26 के राज्य आर्थिक सर्वेक्षण का हवाला देते हुए कहा गया है कि वर्ष 2024-25 में Mining Revenue राज्य के अपने Non-Tax Revenue का लगभग 84.9 प्रतिशत था। पत्र में Mineral Bearing Land Cess से सालाना लगभग 311,000 करोड़ रुपये राजस्व आने की अपेक्षा का भी उल्लेख किया गया है।

CM Hemant Soren: पिछली देनदारियों को अमान्य करने पर भी CM Hemant Soren की आपत्ति

CM Hemant Soren ने विधेयक में प्रस्तावित उस व्यवस्था पर भी चिंता जताई है, जिसके तहत संशोधन लागू होने से पहले राज्य को जमा या वसूल नहीं किए गए कुछ Tax, Cess या अन्य Levy को पिछली तारीख से अमान्य माना जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा है कि इससे राज्य के उन वैधानिक दावों और बकाया राशि पर असर पड़ सकता है, जो उस समय लागू राज्य कानून और संवैधानिक एवं न्यायिक स्थिति के आधार पर निर्धारित किए गए थे।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के 14 अगस्त 2024 के आदेश का भी उल्लेख किया है और कहा है कि अदालत ने पूर्व के मामलों में राज्यों और करदाताओं के हितों के बीच संतुलन बनाने के लिए चरणबद्ध व्यवस्था अपनाई थी। CM Hemant Soren ने आग्रह किया है कि यदि किसी तरह की Transitional Arrangement की जरूरत महसूस होती है तो वह भी इसी तरह संतुलित और चरणबद्ध होनी चाहिए।

CM Hemant Soren: अन्य खनिज उत्पादक राज्यों से भी बातचीत की मांग

मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से खनिज उत्पादक राज्यों के साथ संरचित और व्यापक विचार-विमर्श करने की मांग की है। उन्होंने इसके लिए GST Council जैसी परामर्श व्यवस्था की तर्ज पर बातचीत की प्रक्रिया अपनाने का सुझाव दिया है, ताकि राज्यों की चिंताओं को भी विधेयक में उचित स्थान मिल सके।

CM Hemant Soren:विधेयक को मौजूदा स्वरूप में आगे नहीं बढ़ाने की अपील

CM Hemant Soren ने प्रधानमंत्री से स्पष्ट तौर पर आग्रह किया है कि Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Bill, 2026 को मौजूदा स्वरूप में आगे नहीं बढ़ाया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा है कि राज्यों के खनिजयुक्त भूमि से संबंधित संवैधानिक अधिकारों को सुरक्षित रखा जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी मांग की है कि खनिज से जुड़े राज्यों के वैध Statutory Dues को पिछली तारीख से अमान्य करने वाला कोई प्रावधान नहीं होना चाहिए। यदि केंद्र सरकार खनिज क्षेत्र में एकरूपता, अत्यधिक कर भार या अलग-अलग Levies से जुड़ी चिंताओं का समाधान चाहती है, तो इसके लिए राज्यों के साथ सहमति से व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।

CM Hemant Soren ने वैकल्पिक सुझाव भी दिए हैं। उन्होंने कहा है कि यदि विधेयक को किसी रूप में आगे बढ़ाना आवश्यक समझा जाए तो Section 9D के प्रतिबंध को केवल Entry 50 के अंतर्गत आने वाले “mineral rights” तक सीमित किया जाए और Entry 49 के अंतर्गत आने वाली “mineral bearing lands” को इससे बाहर रखा जाए।

उन्होंने विधेयक की Clauses 2 और 3 को भी इसी अनुरूप सीमित करने, Unrecovered Dues को पिछली तारीख से अमान्य करने की व्यवस्था के स्थान पर Transitional Mechanism लाने और Rule-making Power का इस्तेमाल खनिज उत्पादक राज्यों से पूर्व परामर्श के बाद करने की मांग की है।

जरूरत पड़ी तो कानूनी विकल्प अपनाने का संकेत

CM Hemant Soren ने पत्र में कहा है कि अगर विधेयक मौजूदा स्वरूप में पारित होता है तो राज्य सरकार अपने उपलब्ध संवैधानिक और कानूनी उपायों का इस्तेमाल करने का अधिकार सुरक्षित रखती है। इसमें सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना भी शामिल है।

हालांकि, मुख्यमंत्री ने पत्र के अंत में Cooperative Federalism पर जोर दिया है। CM Hemant Soren ने कहा है कि झारखंड केंद्र सरकार को राज्य और देश के विकास में साझेदार के रूप में देखता है। उन्होंने राष्ट्रीय विकास और Mineral Security के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि झारखंड ने हमेशा देश की औद्योगिक और ऊर्जा जरूरतों में अपनी खनिज संपदा के माध्यम से योगदान दिया है।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से अपील की है कि संविधान में निहित संघीय सिद्धांतों, सुप्रीम कोर्ट के फैसले, झारखंड विधानसभा द्वारा पारित कानून, खनन से राज्य को होने वाली सामाजिक और पर्यावरणीय लागत तथा राज्य की विकासात्मक और कल्याणकारी जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए विधेयक पर पुनर्विचार किया जाए। CM Hemant Soren ने उम्मीद जताई है कि केंद्र सरकार झारखंड और यहां के लोगों के वैध हितों की रक्षा सुनिश्चित करेगी।

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Content Edited & Published By
Niraj Kumar Sharma