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India US Trade Deal: को लेकर किसानों का विरोध तेज, जानिए क्यों चिंतित हैं किसान?

नई दिल्ली। प्रस्तावित India us trade deal को लेकर देश के कई राज्यों के किसान संगठनों ने विरोध तेज कर दिया है। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान समेत कई राज्यों के किसान 21 जुलाई को दिल्ली में आयोजित किसान महापंचायत में शामिल होने के लिए आगे बढ़े। हालांकि, दिल्ली पहुंचने से पहले ही पंजाब-हरियाणा सीमा पर भारी बैरिकेडिंग कर कई किसान समूहों को रोक दिया गया।

किसान संगठनों का कहना है कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते में कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क कम किया गया, तो सस्ते अमेरिकी कृषि उत्पाद भारतीय बाजार में बड़ी मात्रा में पहुंच सकते हैं। इससे घरेलू बाजार में कीमतों पर दबाव पड़ेगा और छोटे एवं सीमांत किसानों की आय प्रभावित हो सकती है।

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India US Trade Deal:

India US Trade Deal: क्या है India us trade deal?

भारत और अमेरिका के बीच एक Bilateral Trade Agreement (BTA) को लेकर बातचीत चल रही है। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा देना तथा वस्तुओं और सेवाओं के कारोबार में आने वाली व्यापारिक बाधाओं को कम करना है।

प्रस्तावित India us trade deal में मैन्युफैक्चरिंग, सर्विसेज, डिजिटल ट्रेड और बाजार तक पहुंच जैसे कई क्षेत्रों पर चर्चा हो रही है। हालांकि, कृषि क्षेत्र इस बातचीत का सबसे संवेदनशील और विवादित मुद्दा बनकर सामने आया है।

दोनों देशों के बीच बातचीत अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। कृषि क्षेत्र में भारत की स्थिति को लेकर मतभेदों के कारण वार्ता में अब तक कोई निर्णायक सफलता नहीं मिली है।

India US Trade Deal: किसानों को समझौते से क्यों है चिंता?

किसान संगठनों का सबसे बड़ा डर यह है कि India us trade deal के तहत अमेरिका से आने वाले कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क कम हो सकता है। ऐसी स्थिति में अमेरिकी उत्पाद भारतीय बाजार में कम कीमत पर उपलब्ध हो सकते हैं।

किसानों का तर्क है कि अमेरिका में कृषि क्षेत्र को बड़े पैमाने पर सरकारी सहायता और सब्सिडी मिलती है। वहां बड़े वाणिज्यिक फार्म सैकड़ों और हजारों एकड़ में फैले होते हैं। इसके विपरीत भारत में बड़ी संख्या में किसान छोटे भू-भाग पर खेती करते हैं और उन्हें तुलनात्मक रूप से कम वित्तीय सहायता मिलती है।

किसान संगठनों का कहना है कि ऐसी असमान परिस्थितियों में भारतीय किसानों के लिए सब्सिडी वाले अमेरिकी उत्पादों के साथ प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल होगा। सस्ते आयात से घरेलू कीमतों में गिरावट आ सकती है, जिसका सीधा असर किसानों की आय पर पड़ेगा।

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India US Trade Deal: किन कृषि उत्पादों को लेकर विवाद?

प्रस्तावित India us trade deal के अंतिम प्रावधान अभी सार्वजनिक नहीं हुए हैं। हालांकि, बातचीत में अमेरिका के कुछ कृषि उत्पादों को भारतीय बाजार में अधिक पहुंच देने पर चर्चा की खबरें सामने आई हैं।

इनमें कथित तौर पर शामिल हैं:

  • डीडीजी (DDGs), जिसका इस्तेमाल पशु आहार के रूप में किया जाता है
  • लाल ज्वार
  • सोयाबीन तेल
  • ट्री नट्स
  • ताजे और प्रोसेस्ड फल

किसान संगठन इस बात को लेकर भी चिंतित हैं कि भविष्य में समझौते का दायरा डेयरी, पोल्ट्री, गेहूं, चावल, चीनी और सोयाबीन जैसे संवेदनशील क्षेत्रों तक बढ़ सकता है। हालांकि, सरकार की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि ये सभी उत्पाद अंतिम समझौते का हिस्सा होंगे।

किसानों का कहना है कि इसका असर केवल फसल उत्पादकों तक सीमित नहीं रहेगा। पशुपालक, डेयरी किसान, मछुआरे, छोटे कारोबारी और ग्रामीण रोजगार भी प्रभावित हो सकते हैं।

India US Trade Deal: सरकार का क्या है रुख?

केंद्र सरकार ने लगातार यह स्पष्ट करने की कोशिश की है कि भारत अपने कृषि हितों से समझौता नहीं करेगा। सरकार के अनुसार कृषि क्षेत्र बातचीत में भारत की महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में शामिल है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि भारत किसी ऐसे समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करेगा, जो देश के हितों के खिलाफ हो। सरकार का कहना है कि व्यापार समझौता तभी किया जाएगा, जब वह दोनों देशों के कारोबार, श्रमिकों, किसानों और उपभोक्ताओं के लिए संतुलित और लाभकारी हो।

भारत ने कृषि को बातचीत में अपनी प्रमुख ‘रेड लाइन’ के तौर पर रखा है। अधिकारियों के अनुसार समझौते का ढांचा तैयार है, लेकिन अंतिम हस्ताक्षर तभी होंगे जब परिस्थितियां उपयुक्त हों।

India US Trade Deal: किसानों की प्रमुख मांगें क्या हैं?

किसान संगठन प्रस्तावित India us trade deal में कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों को विदेशी प्रतिस्पर्धा के लिए अधिक खोलने वाले प्रावधानों का विरोध कर रहे हैं।

किसानों की प्रमुख मांगों में शामिल हैं:

  1. कृषि क्षेत्र से जुड़े ऐसे प्रावधानों को हटाया जाए, जिनसे सस्ते विदेशी उत्पादों का आयात बढ़ सकता है।
  2. व्यापार वार्ता में अधिक पारदर्शिता लाई जाए।
  3. किसानों, पशुपालकों और अन्य संबंधित हितधारकों से व्यापक चर्चा की जाए।
  4. समझौते से जुड़े दस्तावेजों को सार्वजनिक किया जाए।
  5. कृषि क्षेत्र के हितों की रक्षा के लिए ठोस सुरक्षा उपाय किए जाएं।

किसान संगठनों का कहना है कि समझौता अंतिम रूप लेने के बाद बदलाव करना मुश्किल हो सकता है। इसलिए वे समझौते पर हस्ताक्षर से पहले ही अपनी चिंताओं को सरकार के सामने रखना चाहते हैं।

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India US Trade Deal: आगे बढ़ सकता है किसान आंदोलन

21 जुलाई को आयोजित किसान महापंचायत को किसान संगठनों ने व्यापक आंदोलन की शुरुआत के तौर पर पेश किया है। किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों और कृषि क्षेत्र से जुड़ी चिंताओं पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक किया जा सकता है।

फिलहाल India us trade deal को लेकर भारत और अमेरिका के बीच बातचीत जारी है। इस समझौते का अंतिम स्वरूप सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कृषि क्षेत्र के लिए वास्तविक प्रावधान क्या होंगे। लेकिन इससे पहले ही किसान संगठनों ने सरकार से पारदर्शिता और किसानों के हितों की सुरक्षा की मांग तेज कर दी है।

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Content Edited & Published By
Niraj Kumar Sharma