jharkhand news:गुरपा-गुझंडी की 120 साल पुरानी रेल सुरंगों को मिलेगा नया जीवन, रेलवे ने शुरू की सुदृढ़ीकरण योजना

झुमरीतिलैया (कोडरमा): नई दिल्ली-हावड़ा ग्रैंड कॉर्ड रेलमार्ग के महत्वपूर्ण गुरपा-गुझंडी घाट सेक्शन में स्थित तीन ऐतिहासिक रेल सुरंगों को आधुनिक तकनीक से और अधिक सुरक्षित एवं मजबूत बनाने की दिशा में रेलवे ने बड़ा कदम उठाया है। 120 वर्ष से अधिक पुरानी इन सुरंगों के संरचनात्मक सुदृढ़ीकरण के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा रही है, जिससे आने वाले वर्षों में इस व्यस्त रेलखंड की परिचालन क्षमता और सुरक्षा दोनों में उल्लेखनीय सुधार होने की उम्मीद है।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, देश में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) के विस्तार और लंबी तथा अधिक भार क्षमता वाली मालगाड़ियों के बढ़ते संचालन को देखते हुए इन सुरंगों को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है। परियोजना का उद्देश्य न केवल मौजूदा संरचना को मजबूत करना है, बल्कि रेल यातायात को और अधिक सुचारु एवं सुरक्षित बनाना भी है।

jharkhand news:वरिष्ठ अधिकारियों ने किया निरीक्षण

हाल ही में पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक और धनबाद मंडल के मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) अखिलेश कुमार मिश्रा ने गुरपा-गुझंडी घाट सेक्शन का निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकारियों ने सुरंगों की वर्तमान स्थिति, रखरखाव व्यवस्था तथा सुरक्षा मानकों की समीक्षा की।

निरीक्षण के दौरान तकनीकी विशेषज्ञों के साथ विस्तृत चर्चा भी की गई, जिसमें सुरंगों की मजबूती, भविष्य की परिचालन आवश्यकताओं और प्रस्तावित विकास कार्यों पर विचार-विमर्श किया गया। रेलवे का मानना है कि इन सुरंगों का संरक्षण और उन्नयन आने वाले दशकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

गुरपा-गुझंडी रेल सुरंग

jharkhand news:ब्रिटिश काल की इंजीनियरिंग का अद्भुत उदाहरण

गुरपा-गुझंडी घाट सेक्शन में स्थित तीनों सुरंगों का निर्माण ब्रिटिश शासनकाल में 6 दिसंबर 1906 को पूरा हुआ था। ये सुरंगें क्रमशः लगभग 496 मीटर, 454 मीटर और 395 मीटर लंबी हैं। उस समय ग्रैंड कॉर्ड रेल परियोजना के निर्माण में इनका विशेष योगदान रहा था।

करीब 120 साल पहले पहाड़ी और कठिन भूभाग में सुरंगों का निर्माण करना एक बड़ी इंजीनियरिंग चुनौती थी। आधुनिक मशीनों के अभाव में हजारों मजदूरों और इंजीनियरों ने कठिन परिस्थितियों में काम करते हुए इन सुरंगों को आकार दिया था। उस दौर में चट्टानों की खुदाई, जल रिसाव की समस्या और सुरंगों की स्थिरता बनाए रखना बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य माना जाता था।

गुरपा-गुझंडी रेल सुरंग

jharkhand news:समय के साथ सामने आईं कई चुनौतियां

एक सदी से अधिक पुराने इतिहास वाली इन सुरंगों में समय-समय पर जल रिसाव, प्राकृतिक क्षरण और चट्टानों से पत्थर गिरने जैसी समस्याएं सामने आती रही हैं। हालांकि रेलवे द्वारा नियमित निरीक्षण और रखरखाव कार्यों के कारण इन चुनौतियों पर काफी हद तक नियंत्रण बनाए रखा गया है।

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि अब विशेषज्ञ एजेंसियों की सहायता से सुरंगों की संरचनात्मक स्थिति का गहन अध्ययन किया जाएगा। इसके बाद आवश्यकतानुसार विस्तार, पुनर्रचना और अतिरिक्त सुदृढ़ीकरण के कार्य किए जाएंगे। आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों के उपयोग से सुरंगों की दीर्घकालिक मजबूती सुनिश्चित करने की योजना बनाई गई है।

jharkhand news:मालगाड़ियों के संचालन को मिलेगा फायदा

रेलवे के अनुसार, अतीत में सुरंगों की गोलाई और आयामों में सुधार किए जाने के बाद भारी बीओबीआर (BOBR) कोयला रेकों का संचालन संभव हो पाया था। वर्तमान समय में गया-कोडरमा रेलखंड देश के सबसे व्यस्त रेल मार्गों में गिना जाता है, जहां प्रतिदिन लगभग 300 यात्री और मालगाड़ियां अप एवं डाउन लाइन पर संचालित होती हैं।

ऐसे में सुरंगों के सुदृढ़ीकरण से न केवल रेल परिचालन अधिक सुरक्षित होगा, बल्कि लंबी और अधिक भार क्षमता वाली मालगाड़ियों का संचालन भी आसान हो जाएगा। इससे माल परिवहन की दक्षता बढ़ेगी और रेलवे नेटवर्क की क्षमता में भी वृद्धि होगी।

गुरपा-गुझंडी रेल सुरंग

jharkhand news:भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार हो रही योजना

रेलवे का मानना है कि आने वाले वर्षों में माल ढुलाई और यात्री ट्रेनों की संख्या लगातार बढ़ेगी। इसी को ध्यान में रखते हुए यह परियोजना तैयार की जा रही है। सुदृढ़ीकरण के बाद गुरपा-गुझंडी घाट सेक्शन आधुनिक परिचालन मानकों के अनुरूप अधिक सक्षम और सुरक्षित बन सकेगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस परियोजना से रेलवे को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा और यह सेक्शन भविष्य में भी बिना किसी बड़ी संरचनात्मक समस्या के सुचारु रूप से कार्य करता रहेगा।

jharkhand news:आज भी रेलवे की महत्वपूर्ण धरोहर हैं ये सुरंगें

गुरपा-गुझंडी घाट सेक्शन लंबे समय से भारतीय रेलवे के सबसे चुनौतीपूर्ण रेलखंडों में शामिल रहा है। पहाड़ी इलाके में लगभग 22 किलोमीटर लंबे घाट क्षेत्र के बीच स्थित ये सुरंगें आज भी ब्रिटिश इंजीनियरिंग कौशल की जीवंत मिसाल मानी जाती हैं।

सुरंगों के भीतर ईंट और पत्थरों से बनाई गई मेहराबी संरचना उनकी मजबूती का प्रमाण है। यही कारण है कि एक सदी से अधिक समय बीत जाने के बाद भी ये सुरंगें भारतीय रेलवे के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। रेलवे अब इन्हें आधुनिक तकनीक से और अधिक सुरक्षित बनाकर आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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