Jharkhand News, रिम्स में अव्यवस्था की खुली पोल, गर्भवती महिला की ट्रॉली खुद धकेलने को मजबूर हुआ पति

RIMS Jharkhand News

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Jharkhand News : राजधानी रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर खामियां एक बार फिर सामने आई हैं। हाल ही में स्थापित नई एमआरआई मशीन मरीजों के लिए राहत बनने के बजाय परेशानी का कारण बनती दिख रही है। अस्पताल में भर्ती मरीजों को जांच के लिए करीब 800 मीटर दूर स्थित एमआरआई केंद्र तक पहुंचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जहां न तो समुचित मार्ग की व्यवस्था है और न ही पर्याप्त स्टाफ की।

शुक्रवार को सामने आई एक घटना ने रिम्स की व्यवस्थाओं पर कई सवाल खड़े कर दिए। एक गर्भवती महिला को एमआरआई जांच के लिए उसका पति खुद ट्रॉली धकेलते हुए ले जाने को मजबूर हुआ, क्योंकि रास्ते में कोई ट्रॉलीमैन या स्वास्थ्यकर्मी मौजूद नहीं था।

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800 मीटर दूर जांच केंद्र बना मरीजों की मुश्किल

रिम्स में नई एमआरआई मशीन को गेट नंबर दो के पास स्थित क्षेत्रीय नेत्र संस्थान के बेसमेंट में लगाया गया है, जबकि अधिकतर मरीज पुराने भवनों में भर्ती रहते हैं। ऐसे में गंभीर हालत वाले मरीजों को लगभग 800 मीटर की दूरी तय करनी पड़ रही है। इस रास्ते में उबड़-खाबड़ सड़क, छोटे गड्ढे और अव्यवस्थित मार्ग मरीजों की पीड़ा को और बढ़ा रहे हैं।

Jharkhand News : गर्भवती महिला के साथ अमानवीय स्थिति

हरमू क्षेत्र निवासी मुकेश कुमार ने बताया कि उनकी पत्नी रूबी कुमारी गर्भवती हैं और गंभीर स्थिति में रिम्स के पुराने भवन के चौथे तल्ले में भर्ती हैं। लगातार रक्तस्राव की शिकायत के बाद डॉक्टरों ने एमआरआई जांच की सलाह दी। उन्हें केवल एक ट्रॉली उपलब्ध कराई गई और कहा गया कि जांच केंद्र तक खुद पहुंचना होगा।

मुकेश कुमार के अनुसार, कई बार अनुरोध करने के बावजूद न तो कोई ट्रॉलीमैन मिला और न ही मार्गदर्शन के लिए कोई कर्मचारी। मजबूरी में उन्हें खुद अपनी पत्नी की ट्रॉली धकेलनी पड़ी, जबकि महिला दर्द से कराहती रही।

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जांच केंद्र पहुंचने पर भी नहीं मिली राहत

एमआरआई केंद्र तक पहुंचने के बाद भी परेशानी कम नहीं हुई। रैंप से ऊपर पहुंचने पर फ्रंट डेस्क पर कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था। बाद में पता चला कि जांच बेसमेंट में होती है। वहां पहुंचने पर जानकारी दी गई कि सभी कर्मी लंच पर गए हैं और जांच के लिए इंतजार करना होगा, जबकि परिसर में 24 घंटे जांच सेवा उपलब्ध होने का बोर्ड लगा हुआ है।

व्यवस्थाओं पर उठे गंभीर सवाल

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान एक जूनियर डॉक्टर ने मानवीय संवेदना दिखाते हुए कुछ समय के लिए ट्रॉली संभालने में मदद जरूर की, लेकिन यह व्यवस्था का स्थायी समाधान नहीं था। घटना ने रिम्स प्रशासन की तैयारियों और संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

इतनी दूर जांच केंद्र स्थापित करने के बावजूद मरीजों के लिए सुरक्षित मार्ग, समर्पित ट्रॉली सेवा और पर्याप्त स्टाफ की व्यवस्था क्यों नहीं की गई, इस पर प्रबंधन की ओर से अब तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

(झारखंड अपडेट्स : Ranchi News)

Jharkhand News : मरीजों की पीड़ा बनी सिस्टम पर सवाल

रिम्स जैसे राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में इस तरह की अव्यवस्था न सिर्फ मरीजों की सेहत के लिए खतरा है, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था की प्राथमिकताओं पर भी सवाल खड़े करती है। मरीजों और उनके परिजनों की पीड़ा यह साफ दिखाती है कि आधुनिक मशीनें लगाने के साथ-साथ मानवीय व्यवस्था और आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करना भी उतना ही जरूरी है।

FAQs – Jharkhand News (RIMS Ranchi)

Q1. Jharkhand News में RIMS Ranchi से जुड़ा मामला क्या है?

रांची के RIMS में नई MRI मशीन लगने के बावजूद मरीजों को जांच के लिए 800 मीटर दूर जाना पड़ रहा है। स्टाफ की कमी के कारण एक गर्भवती महिला की ट्रॉली उसका पति खुद धकेलने को मजबूर हुआ।

Q2. RIMS में MRI जांच केंद्र कहां स्थित है?

नई MRI मशीन RIMS गेट नंबर दो के पास स्थित क्षेत्रीय नेत्र संस्थान के बेसमेंट में लगाई गई है, जबकि अधिकांश मरीज पुराने भवनों में भर्ती रहते हैं।

Q3. मरीजों को किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है?

मरीजों को खराब रास्ते, गड्ढों, लंबी दूरी, ट्रॉलीमैन की कमी और मार्गदर्शन के अभाव जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

Q4. क्या MRI जांच के समय स्टाफ मौजूद था?

मरीज के परिजनों के अनुसार, MRI केंद्र पहुंचने पर बताया गया कि कर्मचारी लंच पर हैं, जबकि वहां 24 घंटे सेवा उपलब्ध होने का बोर्ड लगा हुआ था।

Q5. इस मामले में RIMS प्रशासन की क्या प्रतिक्रिया है?

अब तक RIMS प्रबंधन की ओर से इस घटना को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

Q6. Jharkhand News में यह मामला क्यों अहम है?

यह घटना झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था, संवेदनशीलता और बुनियादी सुविधाओं की कमी को उजागर करती है।

Q7. मरीजों और परिजनों की मुख्य मांग क्या है?

मरीजों और उनके परिजन सुरक्षित मार्ग, पर्याप्त ट्रॉली सेवा, सहयोगी स्टाफ और बेहतर प्रबंधन की मांग कर रहे हैं।

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