Jharkhand Politics : आदित्य जायसवाल 13 महीने बाद कांग्रेस में लौटे, सैकड़ों नेताओं ने भी सदस्यता ली
आदित्य जायसवाल की कांग्रेस में वापसी, कई और नेता भी शामिल हुए
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रांची। झारखंड की राजनीतिक सरगर्मी में एक बड़ा मोड़ आया है। युवा नेता आदित्य विक्रम जायसवाल ने 13 महीने बाद कांग्रेस में वापसी की है। उन्होंने कहा कि भाजपा में जाना उनका गलत निर्णय था। रांची में आयोजित मिलन समारोह में प्रदेश प्रभारी के. राजू, अध्यक्ष केशव महतो कमलेश और विधायक दल के नेता प्रदीप यादव सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें कांग्रेस में स्वागत किया।
मिलन समारोह में नेताओं की उपस्थिति
मिलन समारोह में कांग्रेस के कई नेता शामिल हुए, जिनमें जवाहरलाल यादव और वीरेंद्र विक्रम भी थे। समारोह में सैकड़ों अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी कांग्रेस की सदस्यता ली। उपस्थित नेताओं ने राष्ट्रीय कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की नीतियों एवं सिद्धांतों में आस्था व्यक्त की।
आदित्य जायसवाल का संदेश
आदित्य जायसवाल ने कहा कि भाजपा में जाना उनके विवेक के खिलाफ था। उन्होंने कांग्रेस में लौटकर संगठन के लिए समर्पित होकर काम करने का संकल्प लिया। उनके इस कदम को झारखंड कांग्रेस संगठन के लिए मजबूती का संकेत माना जा रहा है।
प्रदेश प्रभारी के. राजू ने कहा, “आदित्य की वापसी से संगठन को मजबूती मिलेगी। कांग्रेस हमेशा अपने नीतियों और सिद्धांतों पर कायम रहने वाली पार्टी रही है। यही हमारी शक्ति है।”
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संगठन और कार्यकर्ताओं की भागीदारी
मिलन समारोह में मुख्य रूप से हीरालाल कुमार, सुमन कुमार, अजय कुमार, रवि, सोनू नायक, संजय भगत, अमित तिर्की, रिया देवी, उमाशंकर तिवारी, नितून, नौषाद अहमद, विमल टोप्पो, पंकज केशरी, रमेश साहु, आर्यन, रोशन साहू, भीम साव, नित्यानंद दूबे, रूबी देवी, कंचन कुमारी, सुहेल देवी, रोहित, अंकित, खुशी सहित सैकड़ों नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। इस कदम को झारखंड की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। आदित्य जायसवाल की वापसी और कई नेताओं की सदस्यता ने कांग्रेस संगठन की स्थिति को मजबूत किया है और आगामी Jharkhand Politics में पार्टी की भूमिका को प्रभावशाली बनाने की संभावना जताई है।
निष्कर्ष
Jharkhand Politics में आदित्य जायसवाल की वापसी और नए नेताओं की शामिल होने से कांग्रेस संगठन में नई ऊर्जा आई है। यह कदम पार्टी के लिए संगठनात्मक मजबूती के साथ-साथ आगामी चुनावों में रणनीतिक लाभ भी सुनिश्चित करता है। सियासी जानकारों के अनुसार, यह वापसी राज्य की राजनीति में कांग्रेस की पकड़ को मजबूत करने और पार्टी के युवाओं के बीच प्रभाव बढ़ाने में महत्वपूर्ण साबित होगी।