Jharkhand School News: झारखंड में बढ़े एकल शिक्षक वाले स्कूल, UDISE Plus रिपोर्ट ने शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
रांची: राज्य की स्कूली शिक्षा व्यवस्था को लेकर जारी UDISE Plus 2025-26 रिपोर्ट ने कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने रखे हैं। रिपोर्ट के अनुसार झारखंड में ऐसे विद्यालयों की संख्या बढ़ गई है, जहां पूरे स्कूल की जिम्मेदारी केवल एक शिक्षक के कंधों पर है। इसके साथ ही राज्य में शून्य नामांकन वाले स्कूलों की संख्या भी बढ़ी है। वहीं, पिछले वर्ष ड्रॉपआउट दर कम करने में देशभर में सराहना पाने वाला झारखंड इस बार सभी प्रमुख स्तरों पर मामूली बढ़ोतरी दर्ज करता दिखाई दिया है।
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केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से जारी एकीकृत जिला शिक्षा सूचना प्रणाली (UDISE Plus) 2025-26 की रिपोर्ट राज्य के शिक्षा तंत्र की वर्तमान स्थिति का विस्तृत चित्र प्रस्तुत करती है। रिपोर्ट में सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी विद्यालयों के आंकड़ों को शामिल किया गया है।
Jharkhand School News: 9,827 स्कूलों में केवल एक शिक्षक
रिपोर्ट के मुताबिक, झारखंड में 9,827 स्कूल ऐसे हैं जहां केवल एक शिक्षक कार्यरत है। पिछले शैक्षणिक वर्ष 2024-25 में यह संख्या 9,172 थी। यानी एक वर्ष में ऐसे विद्यालयों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
इन विद्यालयों में लगभग 4,40,346 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं। इतने बड़े छात्र समूह की पढ़ाई, अलग-अलग कक्षाओं का संचालन, प्रशासनिक कार्य और अन्य जिम्मेदारियां एक ही शिक्षक के भरोसे होना शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर गंभीर चिंता पैदा करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि एकल शिक्षक वाले विद्यालयों में बच्चों को व्यक्तिगत मार्गदर्शन, विषयवार पढ़ाई और नियमित शैक्षणिक गतिविधियां उपलब्ध कराना कठिन हो जाता है।
Jharkhand School News: शून्य नामांकन वाले स्कूल भी बढ़े
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि राज्य में 125 विद्यालय ऐसे हैं जहां एक भी विद्यार्थी नामांकित नहीं है। इसके अलावा 43 स्कूल ऐसे हैं जहां शिक्षक तो नियुक्त हैं, लेकिन वहां किसी भी छात्र का नामांकन नहीं हुआ है।
यह स्थिति संकेत देती है कि कई क्षेत्रों में विद्यालयों की उपयोगिता, विद्यार्थियों की उपलब्धता तथा शिक्षा संसाधनों के बेहतर प्रबंधन पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।
Jharkhand School News: ड्रॉपआउट दर में हुई आंशिक वृद्धि
पिछले वर्ष झारखंड ने स्कूल छोड़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या कम करने में राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन किया था। हालांकि, 2025-26 की रिपोर्ट में प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
हालांकि राहत की बात यह है कि राष्ट्रीय औसत की तुलना में झारखंड की ड्रॉपआउट दर अभी भी कम बनी हुई है।
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Jharkhand School News: स्कूल स्तर के अनुसार ड्रॉपआउट दर
| स्कूल स्तर | 2025-26 | 2024-25 |
|---|---|---|
| प्राथमिक | 0.1% | 0.0% |
| उच्च प्राथमिक | 2.5% | 1.7% |
| माध्यमिक | 6.6% | 3.5% |
आंकड़े बताते हैं कि सबसे अधिक वृद्धि माध्यमिक स्तर पर देखने को मिली है, जहां पिछले वर्ष की तुलना में ड्रॉपआउट दर लगभग दोगुनी हो गई है।
Jharkhand School News: छात्र-शिक्षक अनुपात राष्ट्रीय औसत से अधिक
UDISE Plus रिपोर्ट के अनुसार झारखंड में छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) भी राष्ट्रीय औसत से अधिक है। इसका अर्थ है कि प्रत्येक शिक्षक के जिम्मे देश के औसत की तुलना में अधिक विद्यार्थी हैं।
सबसे चिंताजनक स्थिति माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में देखी गई है, जहां झारखंड का छात्र-शिक्षक अनुपात देश में सबसे अधिक बताया गया है।
Jharkhand School News: छात्र-शिक्षक अनुपात
| स्कूल स्तर | झारखंड | राष्ट्रीय औसत |
|---|---|---|
| प्राथमिक | 26:1 | 19:1 |
| उच्च प्राथमिक | 24:1 | 17:1 |
| माध्यमिक | 31:1 | 15:1 |
| उच्च माध्यमिक | 52:1 | 23:1 |
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि विशेषकर माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर पर शिक्षकों की कमी विद्यार्थियों की पढ़ाई पर प्रभाव डाल सकती है।
Jharkhand School News: शिक्षा व्यवस्था के सामने नई चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में कई सकारात्मक पहल की हैं, लेकिन शिक्षकों की कमी, खाली स्कूल और बढ़ती ड्रॉपआउट दर जैसी चुनौतियों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
यदि समय रहते पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति, स्कूलों का पुनर्गठन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और विद्यार्थियों को विद्यालय से जोड़कर रखने की योजनाओं पर प्रभावी काम किया जाए तो आने वाले वर्षों में स्थिति में उल्लेखनीय सुधार संभव है।
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Jharkhand School News: क्या कहते हैं आंकड़े?
UDISE Plus 2025-26 की रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि झारखंड में शिक्षा के क्षेत्र में प्रगति के साथ-साथ कई गंभीर चुनौतियां भी मौजूद हैं। एक ओर राज्य की ड्रॉपआउट दर राष्ट्रीय औसत से कम है, वहीं दूसरी ओर एकल शिक्षक वाले विद्यालयों की बढ़ती संख्या और उच्च छात्र-शिक्षक अनुपात शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में आने वाले समय में शिक्षकों की नियुक्ति, संसाधनों के बेहतर वितरण और विद्यालयों की प्रभावी निगरानी राज्य सरकार की प्राथमिकता बन सकती है।
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Content Edited & Published By
Niraj Kumar Sharma