Jharkhand SIR: फर्जी दस्तावेज से वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने की कोशिश, CEO ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश
Jharkhand SIR News: झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) के दौरान कथित फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल का मामला सामने आया है। राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) के. रवि कुमार ने ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। हालिया जांच के दौरान पाकुड़ विधानसभा क्षेत्र में कुछ ऐसे मामले सामने आए, जिनमें कथित तौर पर फर्जी आवासीय प्रमाणपत्र के जरिए मतदाता सूची में नाम शामिल कराने का प्रयास किया गया।
मामले की जांच के दौरान चार आवेदकों और एक कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) संचालक की भूमिका सामने आने की बात कही गई है। अधिकारियों के अनुसार, CEO ने मौके पर जाकर संबंधित मामलों की जांच की और दस्तावेजों की सत्यता को लेकर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
Jharkhand SIR में फर्जी दस्तावेजों को लेकर सख्ती
झारखंड में चल रही SIR प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाना है। इसी प्रक्रिया के दौरान फर्जी या अनधिकृत दस्तावेजों के इस्तेमाल की शिकायतें मिलने के बाद चुनाव विभाग ने निगरानी बढ़ाई है।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के स्तर से पहले भी अधिकारियों को निर्देश दिया गया था कि SIR के लिए किसी भी व्यक्ति को फर्जी प्रमाणपत्र या अनधिकृत दस्तावेज तैयार कराने अथवा जमा करने से रोकने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाए। साथ ही, ऐसे मामलों में कानून के तहत कार्रवाई करने की बात कही गई थी।
इसका सीधा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता सूची में केवल पात्र नागरिकों के नाम शामिल हों और किसी अपात्र व्यक्ति का नाम गलत तरीके से दर्ज न हो।
पाकुड़ और बरहरवा में सामने आया मामला
हालिया कार्रवाई के दौरान पाकुड़ विधानसभा क्षेत्र के बरहरवा इलाके में कथित फर्जी दस्तावेजों से जुड़े मामलों की जांच की गई। रिपोर्टों के अनुसार, चार लोगों—रूबेदा बेवा, रबी शेख, पिंटू शेख और सेन्टु शेख—पर कथित रूप से फर्जी आवासीय प्रमाणपत्र के जरिए मतदाता सूची में नाम शामिल कराने का प्रयास करने का आरोप है। एक CSC संचालक मोहम्मद सलीम पर भी कथित तौर पर ऐसे प्रमाणपत्र तैयार करने या उपलब्ध कराने से जुड़ी भूमिका होने की बात सामने आई है।
हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि संबंधित जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही होगी। किसी व्यक्ति पर आरोप लगना अपने आप में अपराध सिद्ध होने के बराबर नहीं है।
CEO ने खुद की मौके पर जांच
इस मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने संबंधित क्षेत्र का दौरा किया। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कुछ मामलों में संबंधित लोगों के घर जाकर भौतिक सत्यापन किया और दस्तावेजों से जुड़े मामलों की जानकारी ली।
अधिकारियों का मानना है कि मतदाता सूची तैयार करने के दौरान केवल दस्तावेजों की औपचारिक जांच पर्याप्त नहीं है। जहां किसी दस्तावेज पर संदेह हो, वहां आवश्यक सत्यापन किया जाना महत्वपूर्ण है। इसी वजह से SIR प्रक्रिया में शिकायतों और संदिग्ध मामलों की जांच पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
CSC संचालकों की भूमिका पर भी नजर
इस मामले में एक CSC संचालक का नाम सामने आने के बाद दस्तावेज तैयार करने और सरकारी सेवाओं से जुड़ी प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाले केंद्रों की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
कॉमन सर्विस सेंटर आम नागरिकों को विभिन्न सरकारी और डिजिटल सेवाओं तक पहुंच उपलब्ध कराने में मदद करते हैं। ऐसे में यदि किसी केंद्र से कथित रूप से गलत या फर्जी प्रमाणपत्र तैयार किए जाने की पुष्टि होती है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल मामले में जांच और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
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मतदाता सूची की पारदर्शिता पर जोर
SIR का एक प्रमुख उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना है। चुनाव विभाग की ओर से लगातार यह बात कही गई है कि पात्र नागरिकों का नाम सूची में बना रहे और अपात्र नामों को हटाने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाए।
ऐसी स्थिति में गलत दस्तावेजों के जरिए नाम जोड़ने की कोशिश चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकती है। इसलिए चुनाव अधिकारियों की ओर से दस्तावेजों की जांच और शिकायतों के सत्यापन को गंभीरता से लिया जा रहा है।
पहले भी CEO ने दी थी चेतावनी
झारखंड CEO के. रवि कुमार ने जून 2026 में भी SIR को लेकर फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल पर सख्त चेतावनी दी थी। उस समय विभिन्न जिलों से फर्जी प्रमाणपत्र बनाए जाने की शिकायतें मिलने की बात सामने आई थी। CEO ने जिला निर्वाचन अधिकारियों और उपायुक्तों को ऐसे मामलों में कानून के तहत समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि नागरिक SIR प्रक्रिया के लिए फर्जी अथवा अनधिकृत दस्तावेज हासिल न करें। चुनाव विभाग ने लोगों से सही जानकारी और वैध दस्तावेजों के साथ प्रक्रिया में भाग लेने की अपील की है।
आगे क्या होगा?
फर्जी दस्तावेजों से जुड़े मामलों में पुलिस और संबंधित प्रशासनिक एजेंसियां जांच करेंगी। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि दस्तावेज कहां से तैयार हुए, उनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।
मामले में यदि जानबूझकर फर्जी दस्तावेज तैयार करने या इस्तेमाल करने की पुष्टि होती है, तो संबंधित कानूनों के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने से जुड़े निर्णय निर्धारित चुनावी प्रक्रिया और सत्यापन के आधार पर लिए जाएंगे।
Jharkhand SIR News से जुड़े इस मामले ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान दस्तावेजों की सत्यता और पात्रता की जांच बेहद महत्वपूर्ण है। चुनाव विभाग की सख्ती का उद्देश्य मतदाता सूची को विश्वसनीय और पारदर्शी बनाए रखना है। आने वाले दिनों में जांच के आधार पर इस मामले में और कार्रवाई सामने आ सकती है।