Economic Survey 2026, भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत आधार पर, 7.4% जीडीपी ग्रोथ और महंगाई पर ऐतिहासिक नियंत्रण
Economic Survey 2026
नई दिल्ली, 29 जनवरी 2026: संसद में आज पेश किए गए Economic Survey 2026 ने भारत की आर्थिक स्थिति को अत्यंत सकारात्मक चित्रित किया है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत अनुमानित की गई है, जबकि महंगाई दर ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंचकर 1.7 प्रतिशत पर स्थिर हो गई है। यह सर्वेक्षण वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की घरेलू मजबूती, सुधारों और समावेशी विकास पर जोर देता है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा लोकसभा में पेश यह रिपोर्ट 1 फरवरी को आने वाले केंद्रीय बजट की नींव रखती है। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने प्रस्तावना में ‘सतर्कता बरतें, निराशावादी न बनें’ का संदेश दिया है।
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Economic Survey 2026 के प्रमुख आंकड़ों से साफ है कि भारत लगातार चौथे साल दुनिया की सबसे तेज बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है। सर्वेक्षण में भारत की संभावित विकास दर (potential growth) को 7 प्रतिशत तक बढ़ा दिया गया है, जो तीन साल पहले 6.5 प्रतिशत थी। यह उपलब्धि निरंतर सुधारों, डिजिटल बुनियादी ढांचे, पूंजी निर्माण और नीतिगत स्थिरता से हासिल हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ की सफलता बताया, जिसमें किसान, एमएसएमई और युवा रोजगार को विशेष महत्व दिया गया है।
जीडीपी ग्रोथ की मजबूत गति
Economic Survey 2026 में वित्त वर्ष 2025-26 के लिए रियल जीडीपी ग्रोथ 7.4 प्रतिशत और जीवीए ग्रोथ 7.3 प्रतिशत अनुमानित है। नाममात्र जीडीपी 357.1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। ग्रोथ के मुख्य इंजन निजी उपभोग (जीडीपी का 61.5 प्रतिशत) और निवेश (30 प्रतिशत) हैं। सेवा क्षेत्र में 9.1 प्रतिशत की उछाल आई, जबकि कृषि और विनिर्माण क्षेत्र भी मजबूत प्रदर्शन कर रहे हैं। कोविड पूर्व औसत 6.4 प्रतिशत से ऊपर यह दर अर्थव्यवस्था की मजबूत रिकवरी दर्शाती है। अगले वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ग्रोथ 6.8 से 7.2 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है। वैश्विक व्यापार युद्ध, जियोपॉलिटिकल जोखिम और कमजोर निर्यात के बावजूद घरेलू मांग ने अर्थव्यवस्था को सहारा दिया है।
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महंगाई पर शानदार काबू
Economic Survey 2026 की सबसे बड़ी सफलता महंगाई नियंत्रण है। अप्रैल-दिसंबर 2025 तक हेडलाइन सीपीआई इन्फ्लेशन औसतन 1.7 प्रतिशत रहा, जो सीपीआई सीरीज की शुरुआत से सबसे कम स्तर है। खाद्य और ईंधन कीमतों में बड़ी गिरावट इसका कारण है, जो सीपीआई बास्केट का आधे से ज्यादा हिस्सा हैं। अच्छी फसल, सब्जियों-दालों-मसालों में दाम कम होना और सरकार की सप्लाई मैनेजमेंट ने योगदान दिया। कोर इन्फ्लेशन भी 2.9 प्रतिशत पर नियंत्रित है, जो आरबीआई के 4 प्रतिशत लक्ष्य से काफी नीचे है। ग्रामीण महंगाई में कमी से ग्रामीण क्षेत्रों का तनाव कम हुआ है। इससे ब्याज दर कटौती की संभावना बढ़ी है, हालांकि नाममात्र जीडीपी ग्रोथ 8 प्रतिशत पर रही, जो बजट अनुमान से कम है।
राजकोषीय अनुशासन और बैंकिंग मजबूती
Economic Survey 2026 में राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 4.4 प्रतिशत पर रखने का लक्ष्य ट्रैक पर है। राजस्व संग्रह में वृद्धि हुई, बैलेंस शीट मजबूत हैं। बैंकिंग सेक्टर में एसेट क्वालिटी सुधरी, एनपीए रिकवरी रेट FY18 के 13.2 प्रतिशत से बढ़कर FY25 में 26.2 प्रतिशत हो गया। क्रेडिट ग्रोथ अच्छी, कॉर्पोरेट बैलेंस शीट हेल्दी हैं। सेवा निर्यात में मजबूत बढ़ोतरी हुई, लेकिन ग्लोबल टैरिफ से चुनौतियां हैं। सर्वेक्षण में इनोवेशन, शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट पर जोर दिया गया है।
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चुनौतियां और भविष्य की दिशा
Economic Survey 2026 वैश्विक अनिश्चितताओं जैसे एआई से स्किल गैप, राज्य स्तर पर राजकोषीय जोखिम और भू-राजनीतिक तनाव को चुनौती मानता है। लेकिन यह ‘गोल्डीलॉक्स’ मोमेंट की बात करता है—उच्च ग्रोथ और कम महंगाई का संतुलन। सर्वेक्षण समावेशी विकास पर फोकस करता है, जिसमें किसान, छोटे उद्योग और युवा रोजगार शामिल हैं। कुल मिलाकर, Economic Survey 2026 भारत को ‘विकसित भारत’ की ओर मजबूत कदम दिखाता है। यह आंकड़ों से ज्यादा नीति ब्लूप्रिंट है, जो राष्ट्रीय लचीलापन और सुधारों पर भरोसा जगाता है।