MPLADS Funds Jharkhand: झारखंड में सांसद निधि खर्च करने में आदित्य साहू सबसे आगे, हजारीबाग सांसद मनीष जायसवाल सबसे फिसड्डी
MPLADS Funds Jharkhand: झारखंड में सांसदों द्वारा MPLADS (Member of Parliament Local Area Development Scheme) फंड के इस्तेमाल का रिकॉर्ड मिला-जुला रहा है। योजना के तहत हर सांसद को अपने क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए सालाना 5 करोड़ रुपये मिलते हैं। ताजा रिपोर्टों और 18वीं लोकसभा (2024-till now) के आंकड़ों के आधार पर झारखंड के सांसदों के प्रदर्शन का विश्लेषण यहाँ दिया गया है:
MPLADS Funds Jharkhand- झारखंड सांसदों का रिपोर्ट कार्ड (18वीं लोकसभा)
झारखंड के सांसदों ने कुल मिलाकर लगभग 90% से अधिक फंड का उपयोग किया है, लेकिन कुछ सांसदों ने अपनी पूरी राशि खर्च करने में तत्परता दिखाई, जबकि कुछ का प्रदर्शन औसत और कुछ का बेहद कम रहा।
MPLADS Funds Jharkhand- सबसे फिसड्डी हजारीबाग सांसद मनीष जायसवाल
18वीं लोकसभा के शुरुआती 02 वर्षों के आंकड़ों के अनुसार काम कराने में सबसे फिसड्डी हजारीबाग का प्रतिनिधित्व कर रहे मनीष जायसवाल का रहा है, अभीतक के आंकड़ों के मुताबिक़ इनकी अनुशंसित राशि: ₹9.8 करोड़ (लगभग पूरा उपलब्ध फंड विकास कार्यों के लिए प्रस्तावित किया जा चुका है)।हालांकि परियोजनाओं की अनुशंसा (Recommendation) 100% हो चुकी है, लेकिन पर वास्तविक खर्च और कार्य पूर्ण होने की गति अभी भी प्रारंभिक चरण में है।
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MPLADS Funds Jharkhand: 103 करोड़ रुपये अनुपयोगित, विकास की संभावनाएं बर्बाद?
रांची, 28 मार्च 2026 – MPLADS Funds Jharkhand में एक बार फिर बड़ी चिंता का विषय सामने आया है। झारखंड के 19 सांसदों को सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MPLADS) के तहत कुल 225.8 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, लेकिन इनमें से केवल 122.8 करोड़ रुपये (54.4%) ही खर्च हो पाए। बाकी 103 करोड़ रुपये से ज्यादा राशि अनुपयोगित पड़ी हुई है। यह राशि सड़क, स्कूल, अस्पताल, पेयजल और बुनियादी सुविधाओं जैसे जरूरी विकास कार्यों के लिए ‘डेड कैपिटल’ बन गई है।
MPLADS Funds Jharkhand की यह स्थिति न केवल राज्य के विकास को प्रभावित कर रही है, बल्कि पूरे देश में सांसद निधि की उपयोगिता पर सवाल खड़े कर रही है। जन-मन की बात की हालिया रिपोर्ट और MPLADS डैशबोर्ड के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, झारखंड 36 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में 9वें स्थान पर है। राष्ट्रीय औसत उपयोगिता 40.1% है, लेकिन झारखंड का 54.4% भी संतोषजनक नहीं माना जा रहा है।
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MPLADS Funds Jharkhand में सांसदों का प्रदर्शन: कौन आगे, कौन पीछे?
आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर सांसदों का उपयोगिता प्रतिशत इस प्रकार है:
| रैंकिंग | सांसद का नाम | उपयोगिता प्रतिशत | खर्च (करोड़ में) |
|---|---|---|---|
| टॉप परफॉर्मर | आदित्य साहू | 85.86% | उच्च |
| टॉप परफॉर्मर | महुआ मांझी | 83.97% | उच्च |
| टॉप परफॉर्मर | दीपक प्रकाश | 82.06% | उच्च |
| औसत प्रदर्शन | प्रदीप वर्मा | 65.28% | मध्यम |
| कमजोर प्रदर्शन | बीडी राम | 49.30% | निम्न |
| सबसे कम | निशिकांत दूबे | 1.82% | न्यूनतम |
| निष्क्रिय | मनीष जायसवाल | 0% | शून्य |
(स्रोत: MPLADS डैशबोर्ड और Jharkhand Reporter.Com विश्लेषण, मार्च 2026)
MPLADS Funds Jharkhand में हजारीबाग के सांसद का 0% उपयोग और कई सांसदों का 50% से कम खर्च विकास कार्यों की प्राथमिकता पर सवाल उठाता है।
MPLADS Funds Jharkhand में अनुपयोग के मुख्य कारण
MPLADS Funds Jharkhand के अनुपयोग के पीछे कई संरचनात्मक और व्यावहारिक समस्याएं हैं:
- प्रशासनिक जटिलताएं: प्रस्ताव से स्वीकृति और कार्यान्वयन तक की प्रक्रिया लंबी होती है। जिला प्रशासन और सांसद के बीच समन्वय की कमी आम है।
- सांसदों की प्राथमिकताएं: कई सांसद राजनीतिक गतिविधियों, चुनावी रणनीति और अन्य मुद्दों में व्यस्त रहते हैं। स्थानीय विकास कार्यों को प्राथमिकता नहीं मिलती।
- जवाबदेही का अभाव: योजना गैर-लैप्सेबल है, यानी खर्च न होने पर भी पैसा अगले साल चला जाता है। कोई सख्त दंड या राजनीतिक नुकसान नहीं होता।
- कोविड के बाद का प्रभाव: 2020-21 में योजना निलंबित रही थी। 17वीं लोकसभा में राष्ट्रीय स्तर पर फंड 65% कम हो गए थे, जिसका असर झारखंड पर भी पड़ा।
राष्ट्रीय स्तर पर भी MPLADS Funds की उपयोगिता 98-99% रही है, लेकिन झारखंड में जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन कमजोर रहा है। 2023 के संशोधित दिशा-निर्देशों में समयबद्ध स्वीकृति, निगरानी और e-SAKSHI पोर्टल के जरिए पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश की गई है, लेकिन राज्य स्तर पर इसका पूरा लाभ नहीं मिल पाया है।
MPLADS Funds Jharkhand- विकास पर क्या असर पड़ा?
MPLADS Funds Jharkhand अगर पूरी तरह उपयोग होता तो राज्य के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में सैकड़ों छोटे-बड़े प्रोजेक्ट पूरे हो सकते थे। उदाहरण के लिए:
- सड़क और पुल निर्माण से कनेक्टिविटी बढ़ती।
- स्कूल और स्वास्थ्य केंद्रों में बुनियादी सुविधाएं मजबूत होतीं।
- पेयजल और स्वच्छता परियोजनाओं से आदिवासी इलाकों में जीवन स्तर सुधरता।
लेकिन 103 करोड़ रुपये अनुपयोगित रहने से हजारों काम अधर में लटक गए हैं। पुराने आंकड़ों के अनुसार, झारखंड में MPLADS के तहत 4,919 कार्य लंबित थे। यह स्थिति राज्य के विकास लक्ष्यों को पीछे धकेल रही है, खासकर तब जब झारखंड खनिज-समृद्ध होने के बावजूद बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है।
राष्ट्रीय संदर्भ और सुधार की जरूरत
राष्ट्रीय MPLADS डैशबोर्ड के अनुसार कुल 8,874 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, जिनमें से 3,465 करोड़ रुपये (40.1%) ही खर्च हुए। झारखंड का 54.4% उपयोग राष्ट्रीय औसत से बेहतर है, लेकिन फिर भी सुधार की गुंजाइश है।
सरकार ने 2023 में संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए, जिसमें:
- समयबद्ध स्वीकृति की समयसीमा तय की गई।
- जिला अधिकारियों को पूर्ण वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार दिए गए।
- e-SAKSHI पोर्टल पर रियल-टाइम निगरानी शुरू की गई।
MPLADS Funds Jharkhand में इन दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन जरूरी है। संसदीय समिति ने GST छूट और पोर्टल में सुधार की भी सिफारिश की है ताकि सांसद आसानी से फंड उपयोग कर सकें।
निष्कर्ष: MPLADS Funds Jharkhand को नई दिशा देने का समय
MPLADS Funds Jharkhand की यह स्थिति विकास की राजनीति का मौन संकट है। समस्या किसी एक पार्टी या सांसद की नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की है। सांसदों को स्थानीय विकास को प्राथमिकता देनी होगी, जिला प्रशासन को तेजी से काम करना होगा और केंद्र को निगरानी बढ़ानी होगी।अगर MPLADS Funds Jharkhand का 100% उपयोग सुनिश्चित किया जाए तो राज्य के लाखों लोगों को सीधा लाभ मिल सकता है। समय आ गया है कि सांसद निधि को सिर्फ ‘वोट बैंक’ का हथियार नहीं, बल्कि वास्तविक विकास का माध्यम बनाया जाए।
MPLADS Funds Jharkhand पर सभी सांसदों, जिला प्रशासन और नागरिक समाज को गंभीरता से विचार करना चाहिए। विकास की खोई हुई संभावनाओं को बचाने का यह आखिरी मौका हो सकता है।
नोट: यह विश्लेषण MPLADS आधिकारिक डैशबोर्ड, और अन्य विश्वसनीय स्रोतों जैसे Jharkhand Reporter के शोध विश्लेषण पर आधारित है।
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