सुदिव्य कुमार सोनू का निधन: झारखंड के मंत्री ने गिरिडीह में ली अंतिम सांस, राजनीतिक जगत में शोक
गिरिडीह/रांची: झारखंड की राजनीति से रविवार, 6 सितंबर 2026 को एक बेहद दुखद खबर सामने आई। झारखंड सरकार के मंत्री और गिरिडीह सदर विधानसभा क्षेत्र से झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के विधायक सुदिव्य कुमार सोनू का निधन हो गया। अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें गिरिडीह के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों के प्रयास के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके निधन की खबर सामने आते ही झारखंड के राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
अचानक बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में कराया गया भर्ती
मिली जानकारी के अनुसार, शनिवार देर रात सुदिव्य कुमार सोनू की तबीयत अचानक खराब हुई। उन्हें असहज महसूस होने के बाद परिवार के लोग तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे। रिपोर्टों के मुताबिक उन्हें गिरिडीह के मर्सी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहां चिकित्सकों की टीम ने उनका उपचार शुरू किया, लेकिन उनकी स्थिति गंभीर बनी रही।
न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें देर रात सीने में परेशानी के बाद अस्पताल लाया गया था और चिकित्सकों ने हार्ट अटैक के संकेत मिलने की जानकारी दी। उपचार के दौरान उनकी स्थिति नहीं संभल सकी और रविवार तड़के उनका निधन हो गया।
झारखंड सरकार में संभाली थीं महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां
सुदिव्य कुमार सोनू झारखंड सरकार में कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। वे उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ नगर विकास, आवास, पर्यटन, कला-संस्कृति तथा खेल और युवा मामलों से जुड़े विभागों के मंत्री रहे। इन विभागों के माध्यम से वे राज्य की शिक्षा, शहरी विकास, पर्यटन और युवा क्षेत्र से संबंधित नीतियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे।
वे गिरिडीह सदर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते थे। वर्ष 2019 में उन्होंने पहली बार विधानसभा चुनाव जीता था और 2024 में भी अपनी सीट बरकरार रखी। इसके बाद उन्हें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी मिली।
JMM के वरिष्ठ नेताओं में बनाई थी पहचान
सुदिव्य कुमार सोनू लंबे समय से झारखंड मुक्ति मोर्चा से जुड़े हुए थे। पार्टी संगठन में काम करते हुए उन्होंने धीरे-धीरे अपनी राजनीतिक पहचान बनाई। उन्हें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के करीबी सहयोगियों में भी गिना जाता था।
राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दों पर उनकी सक्रिय भूमिका के कारण पार्टी के भीतर उनका प्रभाव था। हाल के दिनों में छात्रों से जुड़े आंदोलनों और शिक्षा क्षेत्र के विवादों में भी उन्होंने सरकार और प्रदर्शन कर रहे छात्रों के बीच संवाद स्थापित करने की भूमिका निभाई थी।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जताया गहरा दुख
सुदिव्य कुमार सोनू के निधन पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गहरा शोक व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने उन्हें अपने लिए भाई जैसा बताया और कहा कि उनका जाना व्यक्तिगत क्षति है। उन्होंने सुदिव्य कुमार के साथ बिताए समय, संघर्ष और झारखंड के प्रति उनके समर्पण को याद किया।
झारखंड मुक्ति मोर्चा ने भी उनके निधन पर गहरा दुख जताते हुए इसे पार्टी, सरकार और राज्य के लिए अपूरणीय क्षति बताया। पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच भी शोक का माहौल है।
अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ
सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद राज्य सरकार की ओर से शोक की घोषणा की गई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, झारखंड में 6 और 7 सितंबर को दो दिवसीय राजकीय शोक रखा गया है। उनके अंतिम संस्कार की प्रक्रिया भी राजकीय सम्मान के साथ किए जाने की जानकारी सामने आई है। गिरिडीह में बड़ी संख्या में समर्थक, पार्टी कार्यकर्ता और आम लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए पहुंचे।
झारखंड की राजनीति में बड़ी क्षति
सुदिव्य कुमार सोनू का अचानक निधन झारखंड की राजनीति के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। वे विधायक के साथ-साथ सरकार में कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। शिक्षा, शहरी विकास, पर्यटन और खेल जैसे क्षेत्रों में उनकी सक्रिय भूमिका रही।
उनके निधन की खबर से गिरिडीह समेत पूरे झारखंड में समर्थकों और शुभचिंतकों में शोक है। राजनीतिक दलों के नेताओं और सामाजिक संगठनों की ओर से भी उन्हें श्रद्धांजलि दी जा रही है। सुदिव्य कुमार सोनू की राजनीतिक यात्रा, संगठन के प्रति उनकी सक्रियता और सरकार में निभाई गई जिम्मेदारियों के कारण उन्हें लंबे समय तक याद किया जाएगा।
सुदिव्य कुमार सोनू का निधन झारखंड की राजनीति में एक ऐसा शून्य छोड़ गया है, जिसकी भरपाई आसान नहीं होगी।