Babulal Marandi ने खादगढ़ा बस स्टैंड टेंडर पर उठाए सवाल, 7.50 करोड़ की बोली रद्द कर 3.20 करोड़ में टेंडर क्यों?
रांची: नेता प्रतिपक्ष Babulal Marandi ने रांची नगर निगम के नगर आयुक्त एवं IAS अधिकारी सुशांत गौरव की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए खादगढ़ा बस स्टैंड की टेंडर प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस टेंडर प्रक्रिया में 7.50 करोड़ रुपये की बोली लग चुकी थी, उसे रद्द कर महज 3.20 करोड़ रुपये में टेंडर दिए जाने का निर्णय कई सवाल खड़े करता है।
Babulal Marandi ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर नगर आयुक्त सुशांत गौरव के आचरण पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि नगर आयुक्त का व्यवहार एक प्रशासनिक अधिकारी की तुलना में जेएमएम कार्यकर्ता की तरह अधिक नजर आ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर आयुक्त छवि रंजन और विनय चौबे की राह पर चलते हुए दिखाई दे रहे हैं।
नक्शे और होल्डिंग को लेकर भी उठाए सवाल
Babulal Marandi ने कहा कि रांची में हजारों घरों के नक्शे लंबित हैं और आम लोग नगर निगम के चक्कर लगाते-लगाते परेशान हैं। इसके बावजूद निगम की प्राथमिकता उन भवनों पर कार्रवाई करने की अधिक दिखाई दे रही है, जिनसे जुड़े लोग किसी न किसी रूप में छात्रों के आंदोलन के साथ खड़े रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि हजारों लोग ऑनलाइन होल्डिंग टैक्स जमा कर चुके हैं, इसके बावजूद उन्हें बार-बार नगर निगम की ओर से नोटिस भेजे जा रहे हैं। लोगों को अपनी ही जमा राशि और दस्तावेजों से संबंधित मामलों के लिए निगम कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
7.50 करोड़ की बोली के बाद 3.20 करोड़ का टेंडर क्यों?
नेता प्रतिपक्ष ने खादगढ़ा बस स्टैंड की टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब टेंडर में 7.50 करोड़ रुपये की बोली लग चुकी थी, तो उस प्रक्रिया को रद्द कर 3.20 करोड़ रुपये में टेंडर क्यों दिया गया?
उन्होंने कहा कि इस फैसले को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। Babulal Marandi ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या निगम के फैसलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा रही है।
उन्होंने सुशांत गौरव के पूर्व पदों और विभिन्न विभागों एवं जिलों में उनके कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके उच्च शिक्षा, खेल विभाग और उद्योग विभाग में निदेशक तथा विभिन्न जिलों में उपायुक्त रहते हुए कथित अनियमितताओं से जुड़े विषय भी जनता के संज्ञान में हैं।
‘सत्ता के इशारे पर काम न करें अधिकारी’
Babulal Marandi ने कहा कि यदि अधिकारी जनता की सेवा करने के बजाय सत्ता के इशारे पर काम करने लगें, तो आम जनता न्याय के लिए कहां जाए? उन्होंने अधिकारियों से निष्पक्ष होकर काम करने की अपील करते हुए कहा कि प्रशासनिक पद का इस्तेमाल जनता को परेशान करने के लिए नहीं होना चाहिए।
उन्होंने नगर आयुक्त को चेतावनी देते हुए कहा कि मनचाही पोस्टिंग, आर्थिक लाभ और मुख्यमंत्री को संतुष्ट करने के प्रयास में चाटुकारिता का रास्ता नहीं अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता को प्रताड़ित करना बंद किया जाए।
Babulal Marandi ने कहा कि जेएमएम की कठपुतली बनकर काम करने वाले अधिकारियों का अंजाम राज्य की जनता पहले भी देख चुकी है। उन्होंने कहा, “इतिहास खुद को दोहराता है, बस किरदार बदल जाते हैं।”
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