JPSC JSSC News: परीक्षा घोटाले में कोचिंग संचालकों की भूमिका संदिग्ध, CID ने तेज की जांच
रांची: झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी कथित गड़बड़ियों की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। JPSC JSSC News के तहत सामने आए ताजा घटनाक्रम में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितता, पेपर लीक, OMR शीट में हेरफेर और अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोपों की जांच कर रही CID ने कोचिंग संस्थानों से जुड़े लोगों पर भी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। जांच एजेंसी को आशंका है कि कुछ कोचिंग संचालकों ने केवल पढ़ाई कराने तक सीमित रहने के बजाय कथित तौर पर बिचौलिये या एजेंट की भूमिका निभाई।
CID की जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर रांची सहित झारखंड के अलग-अलग इलाकों में सक्रिय कुछ लोगों की भूमिका जांच के दायरे में आई है। इस मामले में अब तक कोचिंग संचालक रवि कुमार और संजीत कुमार के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। रवि कुमार ने अदालत में आत्मसमर्पण किया था, जबकि संजीत कुमार को CID ने गिरफ्तार किया है।
कोचिंग संचालकों पर क्या है आरोप?
जांच एजेंसी के अनुसार, कुछ कोचिंग संचालकों पर आरोप है कि वे कथित तौर पर अभ्यर्थियों और परीक्षा से जुड़े नेटवर्क के बीच संपर्क का काम कर रहे थे। रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे लोगों के माध्यम से अभ्यर्थियों को परीक्षा में अनुचित तरीके से फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई।
हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी। फिलहाल CID विभिन्न आरोपितों के बयानों, संपर्कों और लेन-देन से संबंधित पहलुओं की पड़ताल कर रही है।
मामले में CID थाना कांड संख्या 16/2026 के तहत जांच चल रही है। जांच के दौरान गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ में अन्य लोगों और कोचिंग संचालकों के बारे में जानकारी मिलने की बात सामने आई है। इसके बाद जांच एजेंसी ने संदिग्ध भूमिका वाले अन्य लोगों की तलाश भी तेज कर दी है।
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दो कोचिंग संचालक जांच के केंद्र में
इस मामले में पतंजलि IAS एकेडमी से जुड़े रवि कुमार का नाम सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, जांच के दौरान खुद को घिरता देखकर उन्होंने अदालत में आत्मसमर्पण किया था।
इसके बाद CID ने रांची के सरकुलर रोड स्थित शिवांगन की पाठशाला के संचालक संजीत कुमार को गिरफ्तार किया। एजेंसी के अनुसार, संजीत पर JPSC परीक्षा में अभ्यर्थियों को कथित रूप से अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए एजेंट की भूमिका निभाने का आरोप है। गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया।
कई अन्य नाम भी जांच के दायरे में
CID की जांच केवल दो कोचिंग संचालकों तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, जांच एजेंसी को पूछताछ के दौरान कुछ अन्य संदिग्ध लोगों के बारे में भी जानकारी मिली है। इनमें आदित्य पांडेय, पवन कुमार सिंह, संतोष कुमार सिंह, सानंद प्रकाश, लालू कुमार यादव और सौरभ कुमार पांडेय के नाम शामिल हैं।
जांच एजेंसी इन लोगों की कथित भूमिका, आपसी संपर्क और परीक्षा से जुड़े नेटवर्क में उनकी स्थिति की पड़ताल कर रही है। CID का फोकस इस बात पर भी है कि क्या इन लोगों ने अभ्यर्थियों को परीक्षा में अनुचित लाभ दिलाने के लिए किसी तरह की व्यवस्था या संपर्क उपलब्ध कराया था।
रिमांड पर पूछताछ की तैयारी
CID अब गिरफ्तार कोचिंग संचालकों से विस्तृत पूछताछ की तैयारी में है। जांच एजेंसी यह जानना चाहती है कि कथित तौर पर कितने अभ्यर्थियों से संपर्क किया गया, किसी तरह का आर्थिक लेन-देन हुआ या नहीं और यदि हुआ तो उसकी प्रकृति क्या थी।
इसके अलावा जांच में यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि अभ्यर्थियों को कथित तौर पर किस प्रकार की मदद देने का दावा किया गया था। जांच एजेंसी उन अभ्यर्थियों से भी पूछताछ कर सकती है, जिनका नाम इस कथित नेटवर्क से जुड़कर सामने आया है।
JPSC परीक्षा विवाद में आगे क्या होगा?
JPSC परीक्षा से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच अब कई स्तरों पर आगे बढ़ रही है। OMR शीट, परीक्षा प्रक्रिया, कथित पेपर लीक और अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोपों के साथ-साथ परीक्षा संचालन से जुड़े लोगों और बाहरी नेटवर्क की भूमिका भी जांच का हिस्सा है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी और कुछ तकनीकी कर्मियों की भूमिका को लेकर भी जांच हुई है। इससे संकेत मिलता है कि CID पूरे मामले में केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था की भूमिका देखने के बजाय कथित नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने की कोशिश कर रही है।
अभ्यर्थियों की नजर CID की कार्रवाई पर
JPSC और JSSC जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में बड़ी संख्या में युवा सरकारी नौकरी की तैयारी करते हैं। ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी किसी भी कथित गड़बड़ी का सीधा असर अभ्यर्थियों के भरोसे पर पड़ता है। यही वजह है कि वर्तमान जांच को लेकर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों की भी नजर बनी हुई है।
CID की जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि कथित अनियमितताओं में किन लोगों की भूमिका थी और परीक्षा प्रक्रिया में किस स्तर पर गड़बड़ी हुई। फिलहाल जांच एजेंसी गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है।
महत्वपूर्ण: इस मामले में सामने आए आरोप अभी जांच के स्तर पर हैं। किसी भी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी अदालत के अंतिम निर्णय के बाद ही निर्धारित होगी।