UPI Payments Charges मामले में अमेरिका के आगे झुकी मोदी सरकार: सुप्रिया श्रीनेत

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नई दिल्ली: देश में UPI पेमेंट को लेकर एक बड़ा बदलाव चर्चा में है। ₹2,000 से अधिक के कुछ मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत Merchant Discount Rate यानी MDR लागू किए जाने की व्यवस्था सामने आई है। इस फैसले को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है।

कांग्रेस की सोशल मीडिया एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की चेयरपर्सन सुप्रिया श्रीनेत ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि UPI पेमेंट पर MDR लागू करने का असर आखिरकार आम लोगों और छोटे कारोबारियों पर पड़ सकता है।

हालांकि, सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि नया MDR सीधे ग्राहक से वसूल किया जाने वाला चार्ज नहीं है। व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P UPI ट्रांजैक्शन मुफ्त रहेंगे।

₹2,000 से ज्यादा के UPI पेमेंट पर क्या है नया नियम?

नई व्यवस्था के तहत ₹2,000 से अधिक के कुछ Person-to-Merchant यानी P2M UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत MDR लगाया जाएगा।

इसे उदाहरण से समझें। अगर कोई ग्राहक किसी व्यापारी को ₹5,000 का पात्र UPI पेमेंट करता है, तो 0.4 प्रतिशत की दर से MDR ₹20 होगा। इसी तरह ₹10,000 के पेमेंट पर यह राशि ₹40 होगी।

हालांकि, MDR की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन निर्धारित की गई है।

इसका मतलब यह है कि 0.4 प्रतिशत की गणना ₹300 से ज्यादा होने पर भी निर्धारित सीमा से अधिक शुल्क नहीं लिया जाएगा।

क्या ग्राहक के खाते से पैसे कटेंगे?

UPI Payments Charges को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ग्राहकों को अब UPI से पेमेंट करने पर अतिरिक्त पैसे देने होंगे?

मौजूदा जानकारी के मुताबिक, MDR ग्राहक से सीधे नहीं लिया जाएगा। यह मर्चेंट साइड पर लागू होने वाला शुल्क है।

यानी ग्राहक अगर किसी दुकान पर ₹5,000 का सामान खरीदता है और पात्र UPI पेमेंट करता है, तो केवल UPI इस्तेमाल करने के कारण उसके खाते से अलग से ₹20 काटे जाने की व्यवस्था नहीं है।

हालांकि, व्यापारियों के लिए यह एक नई लागत हो सकती है और इसी वजह से इस फैसले के संभावित प्रभाव को लेकर चर्चा हो रही है।

₹2,000 तक के UPI पेमेंट पर क्या होगा?

₹2,000 तक के पात्र मर्चेंट UPI पेमेंट को MDR से बाहर रखा गया है।

इसलिए छोटे मूल्य के रोजमर्रा के डिजिटल पेमेंट करने वाले ग्राहकों पर इस बदलाव का सीधा असर नहीं पड़ेगा।

इसके अलावा, व्यक्ति से व्यक्ति को किए जाने वाले UPI ट्रांजैक्शन यानी P2P पेमेंट भी मुफ्त रहेंगे। उदाहरण के लिए, अगर कोई व्यक्ति अपने परिवार के सदस्य या दोस्त को ₹5,000 UPI से भेजता है, तो उस पर नया MDR लागू नहीं होगा।

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सुप्रिया श्रीनेत ने सरकार पर क्या आरोप लगाए?

कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने UPI Payments Charges के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर कई सवाल उठाए हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि UPI पर MDR लागू करने से डिजिटल पेमेंट की लागत बढ़ सकती है और इसका अप्रत्यक्ष असर ग्राहकों पर भी पड़ सकता है। उनका कहना है कि दुकानदार और व्यापारी अपनी बढ़ी हुई लागत को सामान या सेवाओं की कीमत में शामिल कर सकते हैं।

श्रीनेत ने यह भी दावा किया कि भारत की Zero-MDR नीति को लेकर अमेरिकी पेमेंट कंपनियां लंबे समय से सवाल उठाती रही हैं।

कांग्रेस नेता ने अमेरिकी Visa और Mastercard के संदर्भ में भी सरकार पर सवाल खड़े किए और आरोप लगाया कि नए नियमों से विदेशी पेमेंट कंपनियों को फायदा पहुंच सकता है।

इन दावों को कांग्रेस की राजनीतिक प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जाना चाहिए। सरकार की ओर से MDR व्यवस्था को लेकर अलग तर्क दिया गया है।

सरकार MDR क्यों लागू कर रही है?

UPI के जरिए होने वाले डिजिटल ट्रांजैक्शन की संख्या में पिछले कुछ वर्षों में काफी बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही पेमेंट नेटवर्क को चलाने, तकनीकी ढांचे को मजबूत करने, साइबर सुरक्षा और सिस्टम के विस्तार से जुड़ी लागत भी महत्वपूर्ण हो गई है।

सरकार और RBI की ओर से MDR व्यवस्था को UPI इकोसिस्टम की लंबी अवधि की वित्तीय स्थिरता से जोड़कर देखा गया है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य मर्चेंट पेमेंट के कुछ हिस्सों से राजस्व पैदा करना है, जबकि आम यूजर के लिए UPI को व्यापक रूप से मुफ्त बनाए रखना है।

छोटे व्यापारियों को राहत

नए नियमों में छोटे कारोबारियों को ध्यान में रखते हुए कुछ छूट भी रखी गई है।

छोटे मर्चेंट जिनका QR कोड के जरिए UPI से प्राप्त मासिक कारोबार निर्धारित सीमा के भीतर है, उन्हें MDR से राहत दी गई है।

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छोटे दुकानदारों, स्थानीय कारोबारियों और कम मूल्य के डिजिटल पेमेंट पर निर्भर व्यवसायों पर अतिरिक्त लागत का दबाव सीमित रहे।

PhonePe और Google Pay का क्या होगा?

UPI के क्षेत्र में PhonePe और Google Pay जैसे प्लेटफॉर्म की बड़ी मौजूदगी है। इसलिए MDR में बदलाव के बाद इन कंपनियों और पूरे पेमेंट इकोसिस्टम पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर भी चर्चा हो रही है।

हालांकि, यह कहना जल्दबाजी होगी कि MDR लागू होने से किसी एक पेमेंट ऐप को सीधे कितना फायदा होगा। UPI से जुड़ी कमाई और शुल्क का वितरण अलग-अलग हिस्सेदारों, बैंकों और पेमेंट सिस्टम में उनकी भूमिका के आधार पर निर्धारित होता है।

कांग्रेस ने PhonePe के IPO को लेकर भी सवाल उठाए

सुप्रिया श्रीनेत ने अपने बयान में PhonePe के प्रस्तावित IPO और कंपनी के वैल्यूएशन का मुद्दा भी उठाया।

उन्होंने सवाल किया कि क्या नए MDR से बड़े UPI प्लेटफॉर्म की कमाई बढ़ सकती है और क्या इसका असर भविष्य में कंपनी के वैल्यूएशन पर पड़ सकता है।

हालांकि, MDR व्यवस्था और किसी कंपनी के IPO वैल्यूएशन के बीच सीधा संबंध स्थापित करना अभी एक अलग विश्लेषण का विषय है। किसी कंपनी के मूल्यांकन पर कई अलग-अलग कारोबारी और बाजार संबंधी कारकों का असर पड़ता है।

UPI को चलाने की लागत पर भी सवाल

कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाया है कि UPI के संचालन की लागत सरकार और RBI द्वारा क्यों नहीं उठाई जा सकती।

पार्टी ने अपने बयान में UPI सिस्टम की अनुमानित वार्षिक लागत और RBI द्वारा सरकार को दिए जाने वाले सरप्लस का हवाला देते हुए दावा किया कि UPI को बिना मर्चेंट चार्ज के भी संचालित किया जा सकता है।

दूसरी ओर, MDR के समर्थन में यह तर्क दिया जा रहा है कि UPI जैसे बड़े डिजिटल पेमेंट नेटवर्क को लंबे समय तक मजबूत बनाए रखने के लिए एक स्थायी वित्तीय मॉडल जरूरी है।

UPI Payments Charges कब से लागू होंगे?

नए MDR से जुड़ी व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने की बात कही गई है।

इसलिए यह समझना जरूरी है कि अभी से हर UPI पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लगने की बात सही नहीं है।

नया शुल्क मुख्य रूप से निर्धारित शर्तों के तहत आने वाले ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट UPI पेमेंट पर लागू होगा।

आसान भाषा में समझें

UPI Payments Charges को लेकर पूरी तस्वीर कुछ इस तरह है:

  • ₹2,000 तक के पात्र मर्चेंट UPI पेमेंट पर MDR नहीं।
  • ₹2,000 से ज्यादा के कुछ P2M पेमेंट पर 0.4% MDR।
  • MDR की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन।
  • P2P यानी व्यक्ति से व्यक्ति UPI पेमेंट मुफ्त।
  • MDR ग्राहक से सीधे वसूल किए जाने वाला शुल्क नहीं है।
  • छोटे कारोबारियों के लिए निर्धारित छूट मौजूद है।
  • नई व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाली है।

UPI Payments Charges पर बढ़ी राजनीतिक बहस

UPI Payments Charges का मुद्दा अब केवल डिजिटल पेमेंट की फीस तक सीमित नहीं रहा है। कांग्रेस ने इसे आम लोगों, छोटे कारोबारियों और विदेशी पेमेंट कंपनियों से जोड़कर सरकार से कई सवाल किए हैं।

वहीं, सरकार और RBI की तरफ से UPI को ग्राहकों के लिए सस्ता और व्यापक रूप से मुफ्त बनाए रखने तथा सिस्टम को आर्थिक रूप से टिकाऊ रखने पर जोर दिया गया है।

आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नई MDR व्यवस्था का व्यापारियों की लागत, पेमेंट कंपनियों के कारोबार और डिजिटल पेमेंट के इस्तेमाल पर वास्तविक प्रभाव क्या पड़ता है।

फिलहाल ग्राहकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि हर UPI पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत शुल्क नहीं लगाया जा रहा है। नया MDR केवल निर्धारित शर्तों के तहत आने वाले मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर लागू होगा।

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