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Ranchi News: रांची में बच्चों पर मंडरा रहा रैट फीवर का खतरा, 25 दिनों में 28 मामले, डॉक्टरों ने बरसात में सतर्क रहने की दी सलाह

Table of Contents

  • रांची में तेजी से बढ़ रहे रैट फीवर के मामले
  • किन बच्चों में अधिक मिल रहा संक्रमण?
  • क्या है लेप्टोस्पायरोसिस (रैट फीवर)?
  • बीमारी के प्रमुख लक्षण
  • संक्रमण कैसे फैलता है?
  • समय पर इलाज क्यों है जरूरी?
  • डॉक्टरों ने अभिभावकों को क्या सलाह दी?
  • बचाव के आसान उपाय

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Ranchi News: बारिश के मौसम में बढ़ा लेप्टोस्पायरोसिस का खतरा

रांची में मानसून के दौरान बच्चों के बीच लेप्टोस्पायरोसिस, जिसे आम भाषा में रैट फीवर कहा जाता है, के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सकों के अनुसार पिछले लगभग 25 दिनों में 28 बच्चों में इस संक्रमण की पुष्टि हुई है। संक्रमित बच्चों की आयु 2 से 12 वर्ष के बीच बताई जा रही है। बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकारी और निजी अस्पतालों में बच्चों की जांच और उपचार के लिए आने वाले मरीजों की संख्या में भी वृद्धि दर्ज की गई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बरसात के मौसम में जलभराव, गंदगी और दूषित पानी के संपर्क में आने से यह संक्रमण तेजी से फैलता है। इसलिए अभिभावकों को बच्चों की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्क रहने की आवश्यकता है।

Ranchi News: अस्पतालों में बढ़ रही मरीजों की संख्या

रिम्स, सदर अस्पताल और कई निजी अस्पतालों के शिशु रोग विभागों में इन दिनों बुखार से पीड़ित बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जांच के दौरान कुछ बच्चों में लेप्टोस्पायरोसिस की पुष्टि हुई है। गंभीर स्थिति वाले कई बच्चों को आईसीयू में भर्ती करना पड़ा है। विभिन्न अस्पतालों में फिलहाल एक दर्जन से अधिक बच्चों का इलाज गहन निगरानी में चल रहा है। रानी अस्पताल में भी कई बच्चों का उपचार जारी है।

Ranchi News: क्या है लेप्टोस्पायरोसिस (रैट फीवर)?

लेप्टोस्पायरोसिस एक जीवाणुजनित जूनोटिक बीमारी है, जो लेप्टोस्पाइरा नामक बैक्टीरिया के कारण होती है। यह संक्रमण मुख्य रूप से चूहों, कुत्तों, सूअरों, मवेशियों और अन्य संक्रमित जानवरों के मूत्र से फैलता है।

जब संक्रमित जानवरों का मूत्र बारिश के पानी, कीचड़ या जलभराव में मिल जाता है, तब यह बैक्टीरिया लंबे समय तक सक्रिय रह सकता है। यदि कोई बच्चा ऐसे पानी के संपर्क में आता है, विशेषकर त्वचा पर कट या घाव होने पर, तो संक्रमण शरीर में प्रवेश कर सकता है। आंख, नाक और मुंह की श्लेष्मा झिल्ली के माध्यम से भी यह बैक्टीरिया शरीर में पहुंच सकता है।

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Ranchi News: बच्चों में जोखिम क्यों अधिक?

बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि बरसात के दौरान बच्चे अक्सर पानी में खेलते हैं, नंगे पैर चलते हैं या गंदे पानी के संपर्क में आते हैं। यही कारण है कि उनमें संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। जिन बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, उनमें बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।

इसके अलावा शुरुआती लक्षण डेंगू, वायरल बुखार या टाइफाइड जैसे होने के कारण कई बार सही पहचान में देरी हो जाती है। इसलिए बुखार लंबे समय तक रहने पर तुरंत चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए।

Ranchi News: रैट फीवर के प्रमुख लक्षण

लेप्टोस्पायरोसिस के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे दिखाई दे सकते हैं, लेकिन समय के साथ स्थिति गंभीर हो सकती है। प्रमुख लक्षण इस प्रकार हैं—

  • तेज बुखार और ठंड लगना
  • सिर और पूरे शरीर में दर्द
  • पिंडलियों और मांसपेशियों में तेज दर्द
  • आंखों का लाल होना
  • उल्टी और दस्त
  • भूख कम लगना
  • त्वचा या आंखों का पीला पड़ना
  • पेशाब कम आना
  • सांस लेने में तकलीफ

यदि इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दें तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

Ranchi News: समय पर इलाज से बीमारी पर पाया जा सकता है नियंत्रण

विशेषज्ञों के अनुसार शुरुआती चरण में पहचान होने पर एंटीबायोटिक दवाओं की मदद से इस संक्रमण को नियंत्रित किया जा सकता है। लेकिन यदि इलाज में देरी हो जाए तो स्थिति गंभीर हो सकती है।

गंभीर मरीजों को अस्पताल में भर्ती कर ऑक्सीजन, नसों के माध्यम से दवाएं, तरल पदार्थ तथा आवश्यकता पड़ने पर आईसीयू में उपचार दिया जाता है। चिकित्सकों का कहना है कि स्वयं दवा लेने या बिना जांच के इलाज शुरू करने से बचना चाहिए।

Ranchi News: इलाज में देरी के हो सकते हैं गंभीर परिणाम

यदि संक्रमण तेजी से फैल जाए और समय पर उपचार न मिले, तो मरीज में कई गंभीर जटिलताएं विकसित हो सकती हैं। इनमें—

  • लीवर को नुकसान
  • किडनी फेल होने का खतरा
  • फेफड़ों में रक्तस्राव
  • मस्तिष्क संक्रमण (मेनिनजाइटिस)
  • मल्टी ऑर्गन फेल्योर

जैसी समस्याएं शामिल हैं। इसलिए शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है।

Ranchi News: विश्व स्तर पर भी गंभीर बीमारी

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार हर वर्ष दुनिया भर में 10 लाख से अधिक लोग लेप्टोस्पायरोसिस से प्रभावित होते हैं और लगभग 60 हजार लोगों की मौत इस संक्रमण के कारण होती है। भारत में भी मानसून और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में इसके मामले अपेक्षाकृत अधिक देखने को मिलते हैं। झारखंड में पिछले कुछ वर्षों से बरसात के मौसम में इस बीमारी के मामलों में वृद्धि दर्ज की जा रही है।

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Ranchi News: बचाव के लिए अपनाएं ये सावधानियां

विशेषज्ञों ने अभिभावकों को कुछ जरूरी सावधानियां अपनाने की सलाह दी है—

  • बच्चों को जलभराव और गंदे पानी में खेलने से रोकें।
  • नंगे पैर बाहर न जाने दें।
  • हाथ-पैरों की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।
  • खुले घाव को अच्छी तरह ढककर रखें।
  • घर और आसपास चूहों की संख्या नियंत्रित रखने का प्रयास करें।
  • लगातार बुखार या अन्य लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से जांच कराएं।
  • बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक या अन्य दवाएं न दें।

Ranchi News: निष्कर्ष

रांची में बच्चों के बीच तेजी से बढ़ते लेप्टोस्पायरोसिस (रैट फीवर) के मामलों ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। बरसात के मौसम में थोड़ी सी लापरवाही भी संक्रमण का कारण बन सकती है। ऐसे में अभिभावकों को बच्चों की स्वच्छता, सुरक्षित वातावरण और समय पर चिकित्सकीय जांच पर विशेष ध्यान देना चाहिए। शुरुआती पहचान और उचित उपचार से इस बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण संभव है, जबकि देर होने पर यह जानलेवा भी साबित हो सकती है।

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Content Edited & Published By
Niraj Kumar Sharma