Jharkhand News: देवघर में साइबर ठगी के बड़े नेटवर्क का खुलासा, मनीष कुमार समेत छह आरोपी गिरफ्तार

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देवघर: झारखंड के देवघर जिले में साइबर अपराध के खिलाफ पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने साइबर ठगी से जुड़े एक गिरोह का पर्दाफाश करते हुए मनीष कुमार समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच के दौरान पुलिस के सामने कथित तौर पर ऐसे कई तथ्य आए हैं, जिनसे पता चलता है कि आरोपी लंबे समय से साइबर अपराध की गतिविधियों से जुड़े हुए थे। इस कार्रवाई के बाद देवघर में सक्रिय साइबर ठगी के नेटवर्क को लेकर पुलिस की जांच और तेज हो गई है।

मजदूर परिवार से निकलकर साइबर अपराध की दुनिया में पहुंचा मनीष

पुलिस की जांच में मनीष कुमार का नाम इस पूरे नेटवर्क में प्रमुखता से सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, साधारण मजदूर परिवार से आने वाला मनीष कथित तौर पर साइबर ठगी के जरिए बड़ी रकम जुटाने लगा था। धीरे-धीरे उसने अपने आसपास युवाओं का नेटवर्क तैयार किया और उन्हें ऑनलाइन धोखाधड़ी के तरीकों से जोड़ने लगा।

मनीष की कथित गतिविधियों के कारण वह स्थानीय स्तर पर साइबर अपराध से जुड़े लोगों के बीच प्रभावशाली बन गया था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि उसके संपर्क किन-किन लोगों से थे और इस नेटवर्क का संचालन कितने समय से किया जा रहा था।

करोड़ों की ठगी और लग्जरी लाइफ की चर्चा

जांच से जुड़े विवरणों के अनुसार, साइबर ठगी से कमाए गए पैसों का इस्तेमाल कथित तौर पर महंगी जीवनशैली में किया जाता था। मनीष के बारे में रिपोर्ट में करोड़ों रुपये की ठगी और लग्जरी लाइफ से जुड़े दावे किए गए हैं। पुलिस इन दावों की जांच कर रही है और यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित ठगी से प्राप्त रकम का इस्तेमाल कहां-कहां किया गया।

साइबर अपराध में शामिल गिरोह अक्सर अलग-अलग तरीकों से लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं। ऐसे मामलों में फर्जी पहचान, मोबाइल नंबर, बैंक खातों और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आती रही है। देवघर पुलिस की इस कार्रवाई से एक बार फिर जिले में साइबर अपराध के बढ़ते नेटवर्क पर ध्यान गया है।

छह आरोपियों की गिरफ्तारी से बढ़ी जांच की रफ्तार

देवघर पुलिस ने कार्रवाई के दौरान कुल छह संदिग्ध साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर गिरोह के पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटा रही है। जांच का उद्देश्य केवल गिरफ्तार किए गए लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके संपर्कों और कथित वित्तीय लेन-देन की कड़ियों को भी समझना है।

पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस नेटवर्क से और कितने लोग जुड़े हुए हैं। साथ ही, कथित तौर पर ठगी से जुड़े पैसों के लेन-देन की भी जांच की जा रही है। यदि जांच में अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

देवघर में साइबर अपराध पर पुलिस की नजर

देवघर और आसपास के क्षेत्रों में साइबर अपराध के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। पुलिस समय-समय पर छापेमारी और गिरफ्तारी के जरिए ऐसे गिरोहों पर कार्रवाई करती रही है। हाल के एक अन्य मामले में भी देवघर पुलिस ने साइबर ठगी से जुड़े आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जिन पर फर्जी कस्टमर केयर और सरकारी योजनाओं के नाम पर लोगों को निशाना बनाने के आरोप सामने आए थे।

साइबर अपराधी आम लोगों को फोन कॉल, मैसेज या इंटरनेट के माध्यम से अलग-अलग बहाने बनाकर संपर्क कर सकते हैं। इसलिए किसी अनजान व्यक्ति के साथ बैंकिंग जानकारी, OTP, PIN या अन्य संवेदनशील जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।

लोगों को सतर्क रहने की जरूरत

देवघर में हुई इस पुलिस कार्रवाई के बाद साइबर ठगी को लेकर आम लोगों की सतर्कता एक बार फिर महत्वपूर्ण हो गई है। किसी भी संदिग्ध कॉल या ऑनलाइन संदेश पर तुरंत भरोसा करने के बजाय उसकी पुष्टि करना जरूरी है। यदि किसी व्यक्ति को ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी का सामना करना पड़ता है, तो उसे तुरंत अपने बैंक और संबंधित आधिकारिक साइबर अपराध शिकायत व्यवस्था से संपर्क करना चाहिए।

कुल मिलाकर, देवघर पुलिस की यह कार्रवाई साइबर अपराध के खिलाफ महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। मनीष कुमार समेत छह आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस की नजर इस कथित नेटवर्क की अगली कड़ियों पर है। आने वाली जांच में गिरोह के संचालन, कथित वित्तीय लेन-देन और अन्य संभावित आरोपियों के बारे में और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

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