Jharkhand News: कोडरमा-पारसनाथ रेलखंड पर रेलवे की नई पहल, हाथियों की निगरानी के लिए लगाया जा रहा अत्याधुनिक सिस्टम
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झुमरीतिलैया (कोडरमा): Jharkhand News के तहत भारतीय रेलवे ने झारखंड में हाथियों और ट्रेनों के बीच होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। रेलवे अब कोडरमा से पारसनाथ रेलखंड के बीच अत्याधुनिक Elephant Monitoring System स्थापित कर रहा है। इस तकनीक का उद्देश्य रेलवे ट्रैक के आसपास हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखना और समय रहते रेल प्रशासन को सतर्क करना है, ताकि किसी भी संभावित दुर्घटना को टाला जा सके।
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रेलवे अधिकारियों के अनुसार धनबाद रेल मंडल के अंतर्गत चौबे से चिचाकी स्टेशन के बीच लगभग 20 किलोमीटर लंबे रेलखंड में इस परियोजना पर तेजी से काम किया जा रहा है। यह इलाका लंबे समय से हाथियों के आवागमन के लिए संवेदनशील माना जाता है।
Jharkhand News: हाथियों की आवाजाही से प्रभावित होता है रेल परिचालन
कोडरमा और गिरिडीह जिले के कई वन क्षेत्रों से होकर हाथियों के झुंड अक्सर गांवों के साथ-साथ रेलवे ट्रैक तक पहुंच जाते हैं। ऐसी स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण दोनों को ध्यान में रखते हुए रेलवे को कई बार ट्रेनों की गति कम करनी पड़ती है या उनका परिचालन कुछ समय के लिए रोकना पड़ता है।
इसका असर राजधानी एक्सप्रेस, वंदे भारत, दुरंतो एक्सप्रेस जैसी प्रीमियम ट्रेनों के अलावा कई मेल, एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों पर भी पड़ता है। इससे यात्रियों को असुविधा के साथ रेलवे संचालन भी प्रभावित होता है।
Jharkhand News: कैसे काम करेगा Elephant Monitoring System?
रेलवे द्वारा लगाया जा रहा यह आधुनिक सिस्टम ट्रैक के आसपास होने वाली गतिविधियों की लगातार निगरानी करेगा। जैसे ही कोई हाथी रेलवे लाइन के पास पहुंचेगा या ट्रैक पर आएगा, तुरंत धनबाद रेल कंट्रोल कार्यालय और हजारीबाग रोड रेलवे स्टेशन स्थित कंट्रोल सिस्टम में अलर्ट जारी हो जाएगा।
अलार्म बजते ही संबंधित अधिकारियों, स्टेशन मास्टर और लोको पायलट को तत्काल सूचना भेजी जाएगी। इसके बाद जरूरत के अनुसार ट्रेन की गति कम की जाएगी या उसे सुरक्षित स्थान पर रोक दिया जाएगा। इससे हाथियों के ट्रेन की चपेट में आने की घटनाओं में काफी कमी आने की उम्मीद है।
Jharkhand News: केबल नेटवर्क से मजबूत होगी निगरानी व्यवस्था
इस परियोजना के तहत रेलवे हजारीबाग रोड और चौबे स्टेशन के बीच केबल आधारित संचार नेटवर्क भी विकसित कर रहा है। इस नेटवर्क के माध्यम से अप और डाउन दोनों रेल लाइनों की रियल टाइम निगरानी संभव होगी।
नई संचार व्यवस्था के कारण किसी भी आपात स्थिति की जानकारी कुछ ही सेकंड में संबंधित कंट्रोल रूम तक पहुंच जाएगी। इससे निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी और दुर्घटनाओं की संभावना काफी कम हो सकेगी।
Jharkhand News: पहले भी हो चुकी हैं दर्दनाक घटनाएं
रेलवे अधिकारियों के अनुसार लगभग तीन वर्ष पहले चिचाकी और गरिया बिहार स्टेशन के बीच एक हाथी ट्रेन की चपेट में आ गया था। इस हादसे में हाथी की मौत हो गई थी और कई घंटों तक रेल परिचालन बाधित रहा था।
ऐसी घटनाओं को देखते हुए रेलवे ने आधुनिक तकनीक का सहारा लेने का फैसला किया है, ताकि वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ-साथ ट्रेनों का संचालन भी सुचारु रूप से जारी रखा जा सके।
Jharkhand News: दिल्ली-हावड़ा रेलखंड पर भी बढ़ रही सुरक्षा
भारतीय रेलवे दिल्ली-हावड़ा मुख्य रेल मार्ग पर ट्रेनों की अधिकतम गति 160 किलोमीटर प्रति घंटा तक बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। हाई-स्पीड संचालन को सुरक्षित बनाने के लिए रेलवे ट्रैक के किनारे क्रैश बैरियर और सुरक्षा दीवारों का निर्माण भी किया जा रहा है।
रेलवे का मानना है कि आधुनिक सुरक्षा उपायों से न केवल दुर्घटनाओं में कमी आएगी बल्कि ट्रेनों की समयबद्धता और परिचालन क्षमता भी बेहतर होगी।
Jharkhand News: चक्रधरपुर मंडल में भी लगेगा AI आधारित अलर्ट सिस्टम
रेलवे ने झारखंड के चक्रधरपुर रेल मंडल में भी इसी तरह की परियोजना शुरू की है। चांडिल से कोकिन के बीच करीब 24 किलोमीटर लंबे रेलखंड पर AI आधारित Elephant Alert System लगाया जा रहा है।
इस परियोजना में रेलवे और वन विभाग संयुक्त रूप से कार्य कर रहे हैं। हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस सीसीटीवी कैमरे और ड्रोन का उपयोग किया जाएगा।
यदि ट्रैक के आसपास हाथियों की मौजूदगी दर्ज होती है, तो संबंधित क्षेत्र में ट्रेनों की गति तत्काल 25 से 30 किलोमीटर प्रति घंटा तक सीमित कर दी जाएगी। इससे हाथियों और ट्रेनों के बीच टकराव की संभावना काफी कम हो जाएगी।
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Jharkhand News: वन्यजीव संरक्षण और यात्री सुरक्षा को मिलेगा लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि Elephant Monitoring System रेलवे सुरक्षा के साथ-साथ वन्यजीव संरक्षण की दिशा में भी एक प्रभावी पहल साबित हो सकता है। आधुनिक तकनीक के माध्यम से हाथियों की समय रहते पहचान होने पर न केवल उनकी जान बचाई जा सकेगी, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा और रेल संचालन भी अधिक सुरक्षित एवं सुचारु बनाया जा सकेगा।
रेलवे की यह पहल भविष्य में झारखंड के अन्य संवेदनशील रेलखंडों में भी लागू की जा सकती है, जिससे मानव-हाथी संघर्ष और रेल दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आने की संभावना है।
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Bystander (Mukdarshak) In Dis Very World Of Showboat. Worked 4 #RajyaSabhaTV, #VirArjun ETC. Director- Auros MediaTech Convergence Private Limited.