Jharkhand News : राज्य में 10–12% लोग ग्लूकोमा से प्रभावित, पलामू में रोज मिल रहे 6–7 मरीज, जानें लक्षण और बचाव

Jharkhand News राज्य में 10–12% लोग ग्लूकोमा से प्रभावित

Jharkhand News राज्य में 10–12% लोग ग्लूकोमा से प्रभावित

मेदिनीनगर (पलामू) : Jharkhand News के अनुसार राज्य में आंखों की एक गंभीर बीमारी ग्लूकोमा (काला मोतियाबिंद) तेजी से चिंता का कारण बनती जा रही है। डॉक्टरों के मुताबिक यह बीमारी बिना स्पष्ट लक्षणों के धीरे-धीरे आंखों की रोशनी कम कर देती है, इसलिए इसे “आंखों का काला चोर” भी कहा जाता है।

पलामू स्थित मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (MMCH) में रोजाना आने वाले लगभग 100 मरीजों में से औसतन 6 से 7 लोग ग्लूकोमा से पीड़ित पाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जांच और इलाज नहीं होने पर यह बीमारी स्थायी अंधेपन का कारण बन सकती है।

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Jharkhand News : क्या है ग्लूकोमा (काला मोतियाबिंद)

ग्लूकोमा एक ऐसी नेत्र बीमारी है जिसमें आंख के अंदर का दबाव (आई प्रेशर) बढ़ जाता है। इससे आंख की ऑप्टिक नर्व धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होने लगती है और मरीज की दृष्टि प्रभावित होती है।

डॉक्टरों के अनुसार इस बीमारी की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि एक बार जो दृष्टि चली जाती है, उसे वापस लाना संभव नहीं होता। इसलिए समय पर जांच बेहद जरूरी है।

Jharkhand News : पलामू में तेजी से बढ़ रहे मामले

मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज के ऑप्थल्मोलॉजी विभाग के अनुसार अस्पताल की ओपीडी में रोजाना आने वाले मरीजों में कई लोग ग्लूकोमा से पीड़ित मिल रहे हैं।

अस्पताल के आंकड़े

विवरणआंकड़ा
प्रतिदिन ओपीडी मरीजलगभग 100
ग्लूकोमा के मरीज6–7 प्रतिदिन
सबसे अधिक जोखिम आयु40 वर्ष से ऊपर

डॉक्टरों के अनुसार Jharkhand News में सामने आ रहे आंकड़े बताते हैं कि राज्य में यह बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है।

Jharkhand News : समय पर इलाज नहीं मिला तो हो सकता है अंधापन

चिकित्सकों के अनुसार यदि ग्लूकोमा का इलाज समय पर नहीं किया गया तो साइड विजन धीरे-धीरे खत्म होने लगता है और अंत में व्यक्ति पूरी तरह से दृष्टिहीन भी हो सकता है।

इस बीमारी में आंख के अंदर तरल पदार्थ का दबाव बढ़ने से ऑप्टिक नर्व को स्थायी नुकसान पहुंचता है।

40 वर्ष के बाद नियमित नेत्र जांच जरूरी

डॉक्टरों का कहना है कि 40 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में ग्लूकोमा का खतरा अधिक होता है। इसलिए नियमित रूप से आंखों की जांच कराना जरूरी है।

जांच के प्रमुख तरीके

  • आई प्रेशर टेस्ट
  • OCT (Optical Coherence Tomography)
  • विजुअल फील्ड टेस्ट
  • रेटिना जांच

इन जांचों के माध्यम से बीमारी का शुरुआती चरण में पता लगाया जा सकता है।

सफेद मोतियाबिंद से अलग है ग्लूकोमा

विशेषज्ञों का कहना है कि लोग अक्सर ग्लूकोमा और सफेद मोतियाबिंद को एक ही बीमारी समझ लेते हैं, जबकि दोनों अलग हैं।

बीमारीइलाज
सफेद मोतियाबिंदसर्जरी से ठीक संभव
ग्लूकोमाकेवल नियंत्रण संभव

ग्लूकोमा में दवाओं, लेजर या सर्जरी के जरिए आगे होने वाले नुकसान को रोका जा सकता है, लेकिन खोई हुई दृष्टि वापस नहीं लाई जा सकती।

Jharkhand News : राज्य में 10–12% आबादी प्रभावित

स्वास्थ्य सर्वेक्षणों और मेडिकल रिपोर्ट्स के अनुसार झारखंड में लगभग 10 से 12 प्रतिशत लोग ग्लूकोमा से प्रभावित हैं। समस्या यह है कि शुरुआती चरण में बीमारी के लक्षण दिखाई नहीं देते, जिससे मरीजों को देर से इसका पता चलता है।

डॉक्टरों का कहना है कि जब तक लोगों को बीमारी की जानकारी मिलती है, तब तक आंखों की नसों को काफी नुकसान हो चुका होता है

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ग्लूकोमा के प्रमुख लक्षण

ग्लूकोमा के शुरुआती चरण में अक्सर लक्षण दिखाई नहीं देते, लेकिन समय के साथ कुछ संकेत नजर आ सकते हैं।

संभावित लक्षण

  • आंख या सिर में दर्द
  • धुंधला दिखाई देना
  • रोशनी के चारों ओर इंद्रधनुषी घेरे दिखना
  • साइड विजन कम होना
  • जी मिचलाना या उल्टी

यदि ऐसे लक्षण महसूस हों तो तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।

ग्लूकोमा के प्रमुख कारण

डॉक्टरों के अनुसार इस बीमारी के कई कारण हो सकते हैं।

जोखिम बढ़ाने वाले कारक

  • बढ़ती उम्र
  • परिवार में ग्लूकोमा का इतिहास
  • मधुमेह
  • उच्च रक्तचाप
  • आंख में चोट
  • आंख के अंदर तरल पदार्थ का सही तरीके से बाहर न निकल पाना

अस्पताल द्वारा जागरूकता अभियान

मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज के ऑप्थल्मोलॉजी विभाग द्वारा मरीजों को ग्लूकोमा के बारे में जागरूक किया जा रहा है।

डॉक्टर मरीजों को बीमारी के कारण, लक्षण, बचाव और इलाज के बारे में विस्तार से जानकारी देते हैं ताकि लोग समय रहते जांच करा सकें।

डॉ. राकेश कुमार, एचओडी, ऑप्थल्मोलॉजी विभाग, एमएमसीएच के अनुसार:

“ग्लूकोमा एक खतरनाक बीमारी है क्योंकि यह बिना लक्षणों के धीरे-धीरे दृष्टि को प्रभावित करती है। इसलिए 40 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को नियमित नेत्र जांच करानी चाहिए।”

बचाव के लिए क्या करें

ग्लूकोमा से बचने के लिए कुछ सावधानियां बेहद जरूरी हैं।

बचाव के उपाय

  • नियमित आंखों की जांच कराएं
  • मधुमेह और ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखें
  • आंखों को चोट से बचाएं
  • डॉक्टर की सलाह के बिना दवाओं का उपयोग न करें

निष्कर्ष

Jharkhand News के अनुसार ग्लूकोमा एक गंभीर नेत्र रोग है जो धीरे-धीरे आंखों की रोशनी को नुकसान पहुंचाता है। झारखंड में इसके बढ़ते मामलों को देखते हुए डॉक्टर लोगों को नियमित जांच और समय पर इलाज की सलाह दे रहे हैं।

यदि समय रहते बीमारी की पहचान हो जाए तो दवाओं और उपचार के माध्यम से दृष्टि को आगे खराब होने से बचाया जा सकता है