JMM News : पीएम मोदी को झामुमो का खुला पत्र, सुप्रियो भट्टाचार्य ने रखीं 9 मांगें
रांची : झारखंड की राजनीति में एक बार फिर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। झारखंड मुक्ति मोर्चा की केंद्रीय समिति की ओर से प्रधानमंत्री को एक खुला पत्र जारी किया गया है, जिसमें देश की आर्थिक स्थिति, महंगाई, कॉर्पोरेट नीति और रोजगार जैसे मुद्दों को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं। यह पत्र JMM के महासचिव सह प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य की ओर से जारी किया गया है।
इस खुले पत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कुल 9 प्रमुख मांगें रखी गई हैं। पत्र में कहा गया है कि देशहित और आम नागरिकों की भलाई के लिए केंद्र सरकार को अपनी प्राथमिकताओं में बदलाव करना चाहिए।
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JMM की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने रखी गईं 9 प्रमुख मांगें
- विशेष परिस्थितियों को छोड़कर प्रधानमंत्री अपनी विदेश यात्राएं एक वर्ष तक स्थगित रखें।
- भाजपा के रोड शो और राजनीतिक रैलियों को एक वर्ष तक रोका जाए।
- बड़े कॉर्पोरेट घरानों के ऋण माफ करना बंद किया जाए।
- भाजपा शासित 22 राज्यों के मुख्यमंत्रियों के काफिलों पर एक वर्ष तक रोक लगाई जाए।
- जल, जंगल और जमीन जैसे प्राकृतिक संसाधनों को कॉर्पोरेट समूहों को सौंपना बंद किया जाए।
- देश के मध्यम एवं लघु उद्योगों को बढ़ावा देकर स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहित किया जाए।
- विदेशी खाद्य भंडारण व्यवस्था समाप्त कर कृषि उत्पादों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) लागू किया जाए।
- सोना नहीं खरीदने की अपील वापस ली जाए, क्योंकि भारतीय समाज में सोना महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है।
- देश में दोबारा लॉकडाउन जैसी स्थिति लागू नहीं की जाए ताकि रोजगार और विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
एक साल तक विदेश यात्राएं और भाजपा रैलियां रोकने की मांग
JMM की ओर से जारी पत्र में प्रधानमंत्री से अपील की गई है कि वे विशेष परिस्थितियों को छोड़कर एक वर्ष तक अपनी विदेश यात्राएं स्थगित रखें। साथ ही भाजपा के रोड शो और राजनीतिक रैलियों पर भी एक साल तक रोक लगाने की मांग की गई है।
पत्र में कहा गया है कि देश आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है और ऐसे समय में सरकार को संसाधनों की बचत और जनता की समस्याओं पर अधिक ध्यान देना चाहिए।
कॉर्पोरेट ऋण माफी पर उठाए सवाल
खुले पत्र में JMM ने बड़े कॉर्पोरेट घरानों के ऋण माफ करने की नीति पर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि वे अपने “12 कॉर्पोरेट मित्रों” का ऋण माफ करना बंद करें।
इसके साथ ही भाजपा शासित 22 राज्यों के मुख्यमंत्रियों के काफिलों पर भी एक वर्ष तक रोक लगाने की मांग की गई है। पत्र में इसे सरकारी खर्च कम करने का उपाय बताया गया है।
प्राकृतिक संसाधनों को लेकर केंद्र पर निशाना
JMM ने पत्र में आरोप लगाया कि देश के प्राकृतिक संसाधनों जैसे जल, जंगल और जमीन को निजी कॉर्पोरेट समूहों को लाभ पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। पार्टी ने केंद्र सरकार से इसे तत्काल बंद करने की मांग की है।
पत्र में कहा गया है कि देश के संसाधन जनता की संपत्ति हैं और उनका उपयोग जनहित में होना चाहिए।
लघु उद्योग और किसानों के समर्थन की मांग
JMM ने देश के मध्यम एवं लघु उद्योगों को बढ़ावा देने की मांग करते हुए कहा कि इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और स्थानीय उत्पादों को मजबूती मिलेगी।
इसके अलावा विदेशी खाद्य भंडारण व्यवस्था समाप्त करने और कृषि उत्पादों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) लागू करने की भी मांग की गई है। पार्टी का कहना है कि इससे किसानों की आर्थिक स्थिति बेहतर होगी।
सोना खरीदने और लॉकडाउन को लेकर भी टिप्पणी
पत्र में प्रधानमंत्री के उस बयान का भी जिक्र किया गया जिसमें लोगों से सोना नहीं खरीदने की बात कही गई थी। JMM ने कहा कि भारतीय समाज में सोना महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इस तरह की अपील उचित नहीं है।
इसके अलावा पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अप्रत्यक्ष रूप से देश में फिर लॉकडाउन जैसी स्थिति लाना चाहती है, जिससे रोजगार और विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज
प्रधानमंत्री को लिखे गए इस खुले पत्र के बाद झारखंड की राजनीति में चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में भाजपा और JMM के बीच इस मुद्दे को लेकर बयानबाजी और तेज हो सकती है।
पत्र के अंत में सुप्रियो भट्टाचार्य ने खुद को “आकांक्षी नागरिक” बताते हुए प्रधानमंत्री से इन मांगों पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया है।