Parimal Nathwani: सांसद Parimal Nathwani ने विश्व शेर दिवस पर गिर के शेरों को समर्पित डॉक्यूमेंट्री जारी की
Parimal Nathwani: विश्व शेर दिवस के अवसर पर राज्यसभा सांसद Parimal Nathwani ने एशियाई शेरों के संरक्षण और गिर के समृद्ध वन्यजीवन को समर्पित डॉक्यूमेंट्री ‘गिर की अमूल्य धरोहर’ जारी की। डॉक्यूमेंट्री में गिर के शेरों के संरक्षण की अब तक की यात्रा, शेरों की बढ़ती संख्या, स्थानीय मालधारी समुदाय की भूमिका और वन विभाग के अधिकारियों एवं Frontline Forest Workers के प्रयासों को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया है।
Table of Contents
- Parimal Nathwani ने जारी की ‘गिर की अमूल्य धरोहर’
- गिर के शेरों के संरक्षण की यात्रा
- एशियाई शेरों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि
- Parimal Nathwani ने स्थानीय समुदाय की भूमिका को किया रेखांकित
- प्राकृतिक आवास और शेरों की अगली पीढ़ी पर फोकस
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Parimal Nathwani ने जारी की ‘गिर की अमूल्य धरोहर’
रांची, 10 अगस्त। विश्व शेर दिवस के अवसर पर राज्यसभा सांसद Parimal Nathwani ने एशियाई शेरों के संरक्षण पर आधारित डॉक्यूमेंट्री ‘गिर की अमूल्य धरोहर’ जारी की। डॉक्यूमेंट्री के जरिए गिर के जंगलों में एशियाई शेरों के संरक्षण की दशकों लंबी यात्रा और उससे जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को सामने लाया गया है।
Parimal Nathwani द्वारा जारी इस डॉक्यूमेंट्री में गिर के शेरों के संरक्षण के साथ-साथ उनके प्राकृतिक आवास, स्थानीय समुदायों के साथ सह-अस्तित्व और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विभिन्न प्रयासों को दर्शाया गया है।
डॉक्यूमेंट्री में शेरों की शेरनियों की भूमिका, शावकों के पालन-पोषण और शेरों की अगली पीढ़ी के विकास की प्राकृतिक प्रक्रिया को भी प्रमुखता से दिखाया गया है।
गिर के शेरों के संरक्षण की यात्रा
Parimal Nathwani की ओर से जारी डॉक्यूमेंट्री में बताया गया है कि गिर में एशियाई शेरों के संरक्षण के लिए लंबे समय से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इन प्रयासों में वन विभाग, वन्यजीव विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं, स्थानीय समुदायों और Frontline Forest Workers की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
डॉक्यूमेंट्री में गिर के पारिस्थितिकी तंत्र और शेरों के प्राकृतिक जीवन को भी दर्शाया गया है। साथ ही, वन्यजीवों और स्थानीय समुदायों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सह-अस्तित्व को संरक्षण की सफलता के महत्वपूर्ण आधार के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
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एशियाई शेरों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि
डॉक्यूमेंट्री में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक दशक में एशियाई शेरों की संख्या में 70 प्रतिशत से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2025 में शेरों की संख्या बढ़कर 891 तक पहुंच गई थी। वहीं, वयस्क शेरनियों की संख्या भी 330 तक पहुंचने की जानकारी डॉक्यूमेंट्री में सामने रखी गई है।
गिर के शेरों का प्राकृतिक विचरण क्षेत्र भी लगातार विस्तृत हुआ है। यह क्षेत्र अब लगभग 35 हजार वर्ग किलोमीटर तक फैल चुका है। डॉक्यूमेंट्री में बताया गया है कि शेरों की मौजूदगी अब गिर के पारंपरिक क्षेत्र से आगे भी दिखाई दे रही है।
शेरों के विस्तार वाले क्षेत्रों में स्थानीय लोगों और वन विभाग के बीच समन्वय भी संरक्षण व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।
Parimal Nathwani ने स्थानीय समुदाय की भूमिका को किया रेखांकित
Parimal Nathwani ने शेरों के संरक्षण में स्थानीय मालधारी समुदाय की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया है। गिर क्षेत्र में स्थानीय समुदाय और वन्यजीवों के बीच लंबे समय से चला आ रहा सह-अस्तित्व संरक्षण की एक विशिष्ट मिसाल माना जाता है।
डॉक्यूमेंट्री में वन अधिकारियों, वनकर्मियों, शोधकर्ताओं और स्थानीय लोगों के सामूहिक प्रयासों को भी सामने लाया गया है। इन प्रयासों का उद्देश्य शेरों के प्राकृतिक आवास की सुरक्षा के साथ-साथ मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलन बनाए रखना है।
Parimal Nathwani ने संरक्षण की इस सफलता में प्रधानमंत्री की सोच, वन अधिकारियों, वनकर्मियों, शोधकर्ताओं और स्थानीय लोगों के योगदान को भी महत्वपूर्ण बताया।
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प्राकृतिक आवास और शेरों की अगली पीढ़ी पर फोकस
‘गिर की अमूल्य धरोहर’ डॉक्यूमेंट्री में केवल शेरों की बढ़ती संख्या को ही नहीं, बल्कि उनके सुरक्षित प्राकृतिक आवास और आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षण की जरूरत को भी प्रमुखता दी गई है।
डॉक्यूमेंट्री में शेरनियों और शावकों के जीवन से जुड़े पहलुओं को दिखाते हुए यह समझाने का प्रयास किया गया है कि किसी प्रजाति के संरक्षण के लिए उसके पूरे पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा जरूरी है।
Parimal Nathwani की इस पहल के माध्यम से गिर के एशियाई शेरों की संरक्षण यात्रा, उनके प्राकृतिक आवास और उनसे जुड़े लोगों के योगदान को व्यापक स्तर पर सामने लाने का प्रयास किया गया है।
विश्व शेर दिवस के अवसर पर जारी यह डॉक्यूमेंट्री एशियाई शेरों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ गिर की प्राकृतिक और जैविक विरासत के महत्व को रेखांकित करती है।
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Content Edited & Published By
Niraj Kumar Sharma