कांग्रेस का बड़ा आरोप- Sir In Bengal के जरिए भाजपा पश्चिम बंगाल में कर रही वोट चोरी की तैयारी

पश्चिम बंगाल वोट चोरी आरोप

पश्चिम बंगाल वोट चोरी आरोप

कांग्रेस की मांग- न्यायिक समीक्षा में रखे गए मतदाताओं के मामलों का निपटारा होने तक चुनाव की घोषणा न की जाए

नई दिल्ली, 05 मार्च

कांग्रेस ने चुनाव आयोग द्वारा की जा रही एसआईआर प्रक्रिया के जरिए भाजपा पर पश्चिम बंगाल में वोट चोरी का गंभीर आरोप लगाया। पार्टी का दावा है कि राज्य में चुनाव घोषित होने से ठीक पहले लगभग 60 लाख मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने की साजिश रची जा रही है।

कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए पश्चिम बंगाल के प्रभारी महासचिव गुलाम अहमद मीर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुभांकर सरकार, सांसद ईशा खान चौधरी, प्रसेनजित बोस, प्रदेश के संगठन महासचिव आशुतोष, बीपी सिंह और मुनीश तमांग ने कहा कि राज्य में बड़ी संख्या में असली मतदाताओं को मतदान प्रक्रिया से बाहर रखा जा रहा है।

गुलाम अहमद मीर ने कहा कि पश्चिम बंगाल में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान लाखों मतदाताओं को न्यायिक समीक्षा के नाम पर मतदाता सूची से बाहर रखा गया है। उनके अनुसार अभी तक करीब 60 लाख वोटरों की स्थिति स्पष्ट नहीं है, जबकि चुनाव की घोषणा अगले कुछ दिनों में हो सकती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर इन मतदाताओं के मामलों का फैसला किए बिना चुनाव की घोषणा की जाती है, तो यह सबसे बड़ी वोट चोरी होगी।

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उन्होंने मालदा जिले के कई विधानसभा क्षेत्रों का उदाहरण देते हुए बताया कि बड़ी संख्या में मतदाता अभी भी मतदाता सूची से बाहर हैं। उनके अनुसार गाज़ोल विधानसभा सीट में करीब 32,391 वोटर, चंचल विधानसभा क्षेत्र में 73,897 वोटर, हरीशचंद्रपुर में 91,978 वोटर, मालतीपुर में 94,737 वोटर, रतुआ में 1,04,485 वोटर, मानिकचक में 65,496 वोटर, मालदा सीट में 36,557 वोटर, इंग्लिश बाजार में 37,775 वोटर, मोथाबाड़ी में 79,682 वोटर, सुजापुर में सबसे ज्यादा 1,34,518 वोटर और वैष्णवनगर में 68,787 वोटर मतदाता सूची से बाहर हैं।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सिर्फ एक जिले में इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं का सूची से बाहर होना संदेह पैदा करता है। उन्होंने यह बताया कि मुर्शिदाबाद जिले में भी करीब 11 लाख वोटर अभी तक सूची से बाहर बताए जा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब एक विधानसभा क्षेत्र में एक लाख के करीब मतदाताओं के नाम न्यायिक समीक्षा या जांच के नाम पर हटा दिए गए हैं, तो वहां निष्पक्ष चुनाव कैसे संभव है? उन्होंने कहा कि यह एक “टारगेटेड एक्सरसाइज” है जिसके तहत एक विशेष समूह के मतदाताओं को निशाना बनाया जा रहा है।

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कांग्रेस नेताओं ने यह भी बताया कि राज्य में प्रथम चरण में लगभग 25 लाख लोगों को मृत घोषित कर दिया गया, 12-13 लाख लोगों को प्रवासी दिखाकर लिस्ट से हटाया गया और लाखों लोगों के पते न मिलने का बहाना बनाया गया था।

गुलाम अहमद मीर ने कहा कि पिछले कई महीनों से लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी देश में वोट चोरी के मुद्दे को उठा रहे हैं और पश्चिम बंगाल का मामला उसी का एक बड़ा उदाहरण है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी पश्चिम बंगाल में पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ेगी, लेकिन साथ ही यह सुनिश्चित करने के लिए संघर्ष भी करेगी कि कोई भी वास्तविक मतदाता अपने मतदान अधिकार से वंचित न रहे।

कांग्रेस नेताओं ने आंकड़ों के हवाले से कहा कि 28 फरवरी 2026 को प्रकाशित पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची में कुल 7,04,59,284 मतदाता दर्ज हैं, जिनमें से करीब 60,06,675 मतदाता यानी लगभग 8.5 प्रतिशत को “अंडर एडजुडिकेशन” श्रेणी में रखा गया है। उन्होंने बताया कि 24 फरवरी 2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश दिया था कि लंबित मामलों के निपटारे तक पूरक सूचियां लगातार प्रकाशित की जाएं। नेताओं ने यह भी कहा कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 24 के तहत मतदाताओं को अपील का अधिकार है, जबकि धारा 23 के अनुसार नामांकन की अंतिम तिथि के बाद मतदाता सूची में नया नाम जोड़ा नहीं जा सकता। इसलिए कांग्रेस ने मांग की कि सभी लंबित मामलों का निपटारा होने से पहले चुनाव प्रक्रिया शुरू न की जाए और अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने से पहले फॉर्म-6 और फॉर्म-7 आवेदनों की पुनः जांच कराई जाए। कांग्रेस नेताओं ने मांग की कि जब तक समीक्षा में रखे गए सभी मतदाताओं के मामलों का निपटारा नहीं हो जाता, तब तक चुनाव की घोषणा नहीं की जाए।

कांग्रेस नेता प्रसेनजीत बोस ने पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय से जारी डेटा में गंभीर गड़बड़ी की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने बताया कि 20 जनवरी को दावों और आपत्तियों की प्रक्रिया खत्म होने के बाद मुख्य चुनाव अधिकारी के अनुसार नाम जोड़ने के लिए लगभग 9.64 लाख फॉर्म-6 एप्लीकेशन और नाम हटाने के लिए सिर्फ 99,000 फॉर्म-7 एप्लीकेशन मिले थे। हालांकि, 28 फरवरी को राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी प्रेस नोट में कहा गया है कि सिर्फ 1.8 लाख फॉर्म-6 एप्लीकेशन ही स्वीकृत किए गए, यानी नाम जोड़ने के लिए करीब 7.8 लाख एप्लीकेशन अस्वीकार कर दिए गए। इससे भी ज़्यादा चिंता की बात यह है कि दावों और आपत्तियों के आखिरी दिन तक सिर्फ 99,000 फॉर्म सात के एप्लीकेशन रिपोर्ट किए गए थे, लेकिन फाइनल रिपोर्ट कहती है कि फॉर्म-7 एप्लीकेशन के जरिए 5,46,000 मतदाताओं के नाम काटे गए। उन्होंने सवाल किया कि समयसीमा बीत जाने के बाद ये अतिरिक्त फॉर्म-7 एप्लीकेशन कहां से आए?

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