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Jharkhand News: तमिलनाडु में फंसे झारखंड के 40 मजदूर, घर लौटने की अनुमति नहीं मिलने का आरोप

तमिलनाडु में काम करने गए झारखंड के करीब 40 प्रवासी मजदूरों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। मजदूरों का कहना है कि एक औद्योगिक हादसे के बाद उन्हें जबरन एक निजी भवन में रखा गया है और अपने घर लौटने की अनुमति नहीं दी जा रही है। पीड़ित मजदूरों ने सोशल मीडिया के माध्यम से झारखंड सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है।

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Jharkhand News:अमोनिया गैस रिसाव के बाद बिगड़े हालात

21 जून को तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले में स्थित सेंट पीटर पॉल सीफूड्स एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड नामक समुद्री खाद्य प्रसंस्करण इकाई में अमोनिया गैस का भीषण रिसाव हुआ था। इस हादसे ने पूरे इलाके में अफरा-तफरी मचा दी। अब तक इस घटना में 15 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 80 से अधिक कर्मचारी अलग-अलग स्तर पर प्रभावित बताए जा रहे हैं।

प्रशासन के अनुसार, कुल 83 कर्मचारियों को गैस रिसाव के बाद स्वास्थ्य समस्याएं हुईं। इनमें से 28 लोगों को इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है, जबकि 40 कर्मचारी अभी भी उपचाराधीन हैं। दो श्रमिक वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं, नौ ऑक्सीजन पर हैं और बाकी की हालत स्थिर बताई जा रही है।

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Jharkhand News:झारखंड की महिला की मौत, मृतकों की संख्या 15 हुई

26 जून को धनबाद जिले की रहने वाली प्रीति देवी की इलाज के दौरान मौत हो गई, जिसके बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 15 हो गई। मृतकों में 12 ओडिशा, दो असम और एक झारखंड राज्य के निवासी शामिल हैं। इस घटना ने प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और औद्योगिक इकाइयों में कामकाज की व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

Jharkhand News:“हमें कैद करके रखा गया है” – मजदूरों का आरोप

झारखंड के मजदूरों का कहना है कि हादसे के दिन से ही उन्हें फैक्ट्री से करीब 10 किलोमीटर दूर एक निजी विवाह भवन में ठहराया गया है। मजदूरों के अनुसार, उन्हें खाना तो दिया जा रहा है, लेकिन बाहर निकलने या अपने राज्य लौटने की इजाजत नहीं है। भवन के बाहर 25 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती ने उनकी आशंकाओं को और बढ़ा दिया है।

धनबाद जिले के बबलू कुमार ने बताया कि उनकी पत्नी अभी भी अस्पताल में भर्ती है। जब भी वह उससे मिलने जाते हैं, पुलिस उनके साथ जाती है और कुछ मिनटों बाद वापस ले आती है। उनका कहना है कि “हम अपराधी नहीं हैं, फिर भी हमें निगरानी में रखा गया है। हम सिर्फ अपने घर लौटना चाहते हैं।”

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Jharkhand News:अन्य राज्यों के मजदूरों को मिल चुकी है मदद

गोमो (धनबाद) निवासी मुकेश कुमार ने बताया कि ओडिशा सरकार और तमिलनाडु प्रशासन के बीच समन्वय के बाद ओडिशा के 60–70 मजदूरों को उनके घर भेजा जा चुका है। असम के 70 से अधिक श्रमिकों को भी सहायता दी जा रही है। झारखंड के मजदूरों को बताया गया है कि राज्य सरकार से समन्वय होने के बाद ही उन्हें जाने दिया जाएगा।

मजदूरों का कहना है कि वे कई दिनों से इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अब तक झारखंड सरकार की ओर से कोई ठोस पहल नजर नहीं आई है। इसी वजह से उन्होंने सोशल मीडिया का सहारा लेकर अपनी स्थिति सार्वजनिक की है।

Jharkhand News:प्रशासन का पक्ष और मजदूरों की मांग

तिरुवल्लूर जिला प्रशासन का कहना है कि झारखंड के श्रम विभाग के साथ संपर्क किया गया है और सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद मजदूरों को सुरक्षित उनके घर भेजा जाएगा। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि मृत श्रमिक के शव को पहचान प्रक्रिया पूरी होने के बाद झारखंड भेजा जाएगा।

हालांकि, मजदूरों की मांग सिर्फ घर वापसी तक सीमित नहीं है। वे चाहते हैं कि फैक्ट्री प्रबंधन और प्रशासन यह सुनिश्चित करें कि गैस रिसाव से प्रभावित सभी श्रमिकों को उचित मुआवजा मिले और तमिलनाडु छोड़ने से पहले उनका बकाया वेतन भी पूरा चुकाया जाए।

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Tamil Nadu Jharkhand Migrant Workers Newsप्रवासी मजदूरों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

यह मामला एक बार फिर देश में प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा, अधिकारों और औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों की हकीकत को उजागर करता है। अब देखना यह होगा कि झारखंड सरकार इस पूरे प्रकरण में कितनी जल्दी हस्तक्षेप कर अपने मजदूरों को राहत दिला पाती है।

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