Census 2027: जनगणना या पहचान का डेटाबेस? निजता को लेकर क्यों उठ रहे सवाल

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Census 2027: भारत में होने वाली आगामी जनगणना इस बार कई मायनों में अलग है। पहली बार जनगणना प्रक्रिया बड़े पैमाने पर डिजिटल माध्यम से संचालित की जा रही है और इसके प्रश्नावली में पारंपरिक जनसांख्यिकीय जानकारी के साथ कुछ ऐसे विवरण भी शामिल किए गए हैं, जिनसे व्यक्तिगत पहचान और डेटा सुरक्षा को लेकर बहस तेज हुई है। सरकार की ओर से जनगणना को नीति निर्माण और देश की सामाजिक-आर्थिक स्थिति समझने के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है, जबकि कुछ विशेषज्ञ और विपक्षी दल पूछ रहे हैं कि इतने विस्तृत व्यक्तिगत विवरण जुटाने की जरूरत और उनके इस्तेमाल की सीमाएं क्या होंगी।

Census 2027 में क्या बदला है?

2027 की जनगणना के दूसरे चरण यानी Population Enumeration के लिए कुल 40 सवाल निर्धारित किए गए हैं। इनमें 2011 की जनगणना की तुलना में कई नए या संशोधित प्रश्न जोड़े गए हैं। इनमें राष्ट्रीयता, माता-पिता की जानकारी, जाति, शिक्षा और डिजिटल साक्षरता जैसे विषयों के अलावा कुछ पहचान संबंधी विवरण भी शामिल हैं।

नए या बदले गए सवालों में मोबाइल नंबर, आधार, वोटर आईडी, पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस से संबंधित जानकारी तथा परिवार के बैंक खातों की संख्या जैसे विवरण शामिल हैं। यही हिस्सा डेटा निजता को लेकर सबसे अधिक चर्चा का कारण बना है।

मोबाइल और पहचान दस्तावेजों की जानकारी क्यों चर्चा में?

पिछली जनगणनाओं में मुख्य रूप से आबादी, शिक्षा, रोजगार, भाषा, धर्म, प्रवास और सामाजिक-आर्थिक स्थिति जैसी जानकारियां जुटाई जाती रही हैं। Census 2027 में पहचान से जुड़े विवरणों का दायरा बढ़ने के कारण सवाल उठ रहा है कि इन जानकारियों को किस उद्देश्य से रखा जाएगा और इनकी सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी।

विशेषज्ञों की चिंता का एक हिस्सा यह है कि यदि किसी बड़े डेटाबेस में मोबाइल नंबर और अलग-अलग पहचान दस्तावेजों से संबंधित जानकारी मौजूद हो, तो उसकी सुरक्षा के लिए मजबूत तकनीकी और कानूनी व्यवस्था जरूरी होगी। इसी वजह से चर्चा केवल डेटा संग्रह तक सीमित नहीं है, बल्कि डेटा का इस्तेमाल, स्टोरेज, एक्सेस और संभावित लिंकिंग जैसे मुद्दों तक पहुंच गई है।

Census और NPR में क्या अंतर है?

इस बहस में Census और National Population Register (NPR) के बीच अंतर समझना भी जरूरी है।

जनगणना का मुख्य उद्देश्य देश की आबादी और उसकी सामाजिक, आर्थिक तथा जनसांख्यिकीय स्थिति से संबंधित आंकड़े जुटाना है। दूसरी तरफ NPR देश में सामान्य रूप से रहने वाले लोगों का रजिस्टर है। दोनों की कानूनी और प्रशासनिक भूमिका अलग है।

हालांकि Census 2027 की कुछ नई जानकारियां उन विवरणों से मिलती-जुलती हैं जो 2020 के NPR शेड्यूल में शामिल थे। एक रिपोर्ट के मुताबिक 14 नए या संशोधित सवालों में से आठ ऐसे थे जिनका संबंध NPR शेड्यूल में पूछी गई जानकारी से भी था। इसी समानता के कारण राजनीतिक स्तर पर सवाल उठे हैं।

माता-पिता की जानकारी पर भी बहस

Census 2027 में पिता और माता से संबंधित विवरण भी पूछे जाने हैं। इस वजह से भी निजता और नागरिकता से जुड़ी बहस को बल मिला है।

आलोचकों का तर्क है कि माता-पिता से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी किसी व्यक्ति की पहचान को अन्य रिकॉर्ड से जोड़ने की क्षमता बढ़ा सकती है। वहीं, सरकार की तरफ से जनगणना को निर्धारित कानूनों के तहत संचालित प्रक्रिया बताया गया है।

इसलिए यहां महत्वपूर्ण सवाल यह है कि एकत्र किए गए विवरण का इस्तेमाल केवल निर्धारित जनगणना उद्देश्यों तक सीमित कैसे रखा जाएगा और संवेदनशील जानकारी तक अनधिकृत पहुंच को किस तरह रोका जाएगा।

सरकार का क्या कहना है?

सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि जनगणना के दौरान एकत्र किया गया व्यक्तिगत डेटा कानून के तहत गोपनीय रखा जाता है। सरकार के अनुसार व्यक्तिगत स्तर की जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती और प्रकाशित आंकड़े समेकित यानी aggregated रूप में जारी किए जाते हैं।

Census 2027 के आधिकारिक मोबाइल ऐप की Privacy Policy में भी कहा गया है कि ऐप के जरिए जुटाई गई जानकारी का इस्तेमाल संबंधित कानूनों और नियमों के तहत किया जाएगा। यानी डेटा संग्रह की प्रक्रिया को Census Act, 1948 और Census Rules, 1990 के कानूनी ढांचे के तहत संचालित किया जाना है।

सरकारी प्रकाशन में Census 2027 के लिए साइबर सुरक्षा और व्यक्तिगत जानकारी की गोपनीयता पर भी जोर दिया गया है।

क्या Census 2027 को पहचान डेटाबेस कहना सही है?

यह सवाल फिलहाल बहस का विषय है। जनगणना का मूल उद्देश्य आबादी से संबंधित आंकड़े तैयार करना है, जबकि पहचान से जुड़े अधिक विवरण शामिल होने के कारण विशेषज्ञों ने डेटा संरक्षण को लेकर अतिरिक्त सावधानी की जरूरत बताई है।

इसलिए Census 2027 को सीधे “पहचान डेटाबेस” कहना एक निष्कर्ष होगा, जबकि उपलब्ध जानकारी के आधार पर इतना जरूर कहा जा सकता है कि इस बार प्रश्नावली में व्यक्तिगत और पहचान-संबंधी डेटा का दायरा पहले की तुलना में व्यापक है।

डेटा सुरक्षा क्यों होगी सबसे बड़ी चुनौती?

इतनी बड़ी आबादी से डेटा जुटाने के बाद उसकी सुरक्षा एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक और तकनीकी जिम्मेदारी होगी। डेटा को सुरक्षित रखने के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित करना होगा कि केवल अधिकृत अधिकारी ही आवश्यक जानकारी तक पहुंच सकें।

इसके अलावा साइबर हमले, अनधिकृत एक्सेस और डेटा के गलत इस्तेमाल से बचाव के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था जरूरी होगी। विशेषज्ञों की चिंता का मुख्य बिंदु भी यही है कि संवेदनशील जानकारी जितनी अधिक होगी, उसके संरक्षण की जिम्मेदारी उतनी ही बड़ी होगी।

Census 2027 क्यों महत्वपूर्ण है?

जनगणना केवल लोगों की संख्या गिनने की प्रक्रिया नहीं है। इससे सरकार को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आवास, प्रवास और सामाजिक-आर्थिक योजनाओं के लिए आवश्यक आंकड़े मिलते हैं। सरकार के अनुसार Census नीति निर्माण और प्रशासनिक योजना के लिए महत्वपूर्ण आधार उपलब्ध कराता है।

ऐसे में Census 2027 के सामने दोहरी जिम्मेदारी है—एक ओर देश के लिए उपयोगी और सटीक आंकड़े जुटाना तथा दूसरी ओर नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा सुनिश्चित करना।

निष्कर्ष

Census 2027 को लेकर उठ रही निजता की बहस मुख्य रूप से इस बात पर केंद्रित है कि जनगणना में अब पहले की तुलना में अधिक व्यक्तिगत जानकारी क्यों ली जा रही है और उस डेटा की सुरक्षा कैसे होगी। सरकार का कहना है कि व्यक्तिगत जानकारी कानूनी प्रावधानों के तहत गोपनीय रहेगी, जबकि विशेषज्ञ डेटा संग्रह की जरूरत, सुरक्षा और संभावित उपयोग को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

आने वाले समय में इस बहस का केंद्र केवल यह नहीं होगा कि “सरकार कौन-सा डेटा ले रही है?”, बल्कि यह भी होगा कि “डेटा कहां रखा जाएगा, किसे पहुंच मिलेगी और उसका इस्तेमाल किस सीमा तक किया जा सकेगा?” यही सवाल Census 2027 की विश्वसनीयता और नागरिकों के भरोसे के लिए महत्वपूर्ण होंगे।

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