Jharkhand News: खाद्य मिलावट पर सरकार सख्त, 3.31 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट मंजूर
रांची: झारखंड में खाद्य पदार्थों में मिलावट पर रोक लगाने और खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने 3.31 करोड़ रुपये के अतिरिक्त बजट को मंजूरी दी है। यह राशि वित्तीय वर्ष 2026-27 में खाद्य अपमिश्रण की रोकथाम से जुड़ी व्यवस्था पर खर्च की जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने 16 सितंबर 2026 को इस संबंध में आदेश जारी किया है। सरकार के इस फैसले से खाद्य पदार्थों की जांच, निगरानी और मिलावट के खिलाफ कार्रवाई से जुड़ी व्यवस्था को अतिरिक्त संसाधन मिलने की उम्मीद है।
Jharkhand News: कर्मचारियों के वेतन से लेकर उपकरणों तक पर खर्च होगी राशि
सरकार की ओर से मंजूर अतिरिक्त बजट का एक बड़ा हिस्सा कर्मचारियों के वेतन और स्थापना संबंधी खर्चों में इस्तेमाल किया जाएगा। इसके अलावा कार्यालय संचालन, जरूरी सामग्री, उपकरण, यात्रा, टेलीफोन और वर्दी जैसी आवश्यकताओं के लिए भी राशि का प्रावधान किया गया है।
खाद्य अपमिश्रण रोकने वाली व्यवस्था में कर्मचारियों और जरूरी संसाधनों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में अतिरिक्त बजट के जरिए विभागीय कामकाज के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।
खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकना क्यों जरूरी?
खाद्य पदार्थों में मिलावट आम लोगों की सेहत के लिए गंभीर समस्या बन सकती है। दूध, तेल, मसाले, मिठाई, आटा और अन्य खाद्य सामग्री में गुणवत्ता से समझौता होने की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रहती हैं।
मिलावट की रोकथाम के लिए खाद्य पदार्थों के नमूने लिए जाते हैं और उनकी जांच कराई जाती है। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित खाद्य कारोबारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
Duplicate Food और नकली खाद्य पदार्थों पर क्या है कानून?
आम बोलचाल में नकली या मिलावटी खाद्य पदार्थों को “Duplicate Food” कहा जाता है। हालांकि खाद्य सुरक्षा कानून में हर मामले के लिए “Duplicate Food” नाम से अलग अपराध की श्रेणी नहीं है।
मामले की प्रकृति के अनुसार खाद्य उत्पाद मिलावटी, असुरक्षित, घटिया गुणवत्ता वाला या गलत लेबल वाला हो सकता है। ऐसे मामलों में Food Safety and Standards Act, 2006 के प्रावधान लागू होते हैं।
घटिया खाद्य पदार्थ बेचने पर जुर्माना
अगर कोई खाद्य उत्पाद निर्धारित गुणवत्ता या मानक के अनुरूप नहीं पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे मामलों में कानून के तहत जुर्माने का प्रावधान है।
गलत लेबलिंग और भ्रामक जानकारी पर भी कार्रवाई
खाद्य पैकेट पर गलत जानकारी देना, उत्पाद की प्रकृति या गुणवत्ता के संबंध में उपभोक्ता को भ्रमित करना भी कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है।
इसलिए खाद्य कारोबारियों के लिए उत्पाद की पैकेजिंग और लेबल पर सही जानकारी देना जरूरी है।
खतरनाक मिलावट मिलने पर कड़ी सजा का प्रावधान
यदि किसी खाद्य पदार्थ को असुरक्षित पाया जाता है और उससे उपभोक्ता के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचता है, तो मामले की गंभीरता के अनुसार जेल और जुर्माने का प्रावधान है।
अगर असुरक्षित खाद्य पदार्थ की वजह से किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है, तो कानून में गंभीर दंड का प्रावधान किया गया है।
Jharkhand News: मिलावट के खिलाफ बढ़ेगी निगरानी
राज्य सरकार की ओर से 3.31 करोड़ रुपये के अतिरिक्त बजट की मंजूरी खाद्य अपमिश्रण की रोकथाम से जुड़ी व्यवस्था के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में कदम है।
इस राशि से कर्मचारियों के वेतन के अलावा कार्यालय, उपकरण, यात्रा, फोन और अन्य आवश्यक खर्चों को पूरा किया जाएगा। इससे राज्य में खाद्य सुरक्षा से जुड़े विभागीय कामकाज को बेहतर संसाधन मिल सकेंगे।
Jharkhand News: आम लोगों के लिए जरूरी बात
अगर किसी उपभोक्ता को किसी खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता पर संदेह है, तो वह उसका बिल, पैकेट और उत्पाद से जुड़ी जानकारी सुरक्षित रखे। मिलावट या नकली खाद्य पदार्थ की आशंका होने पर संबंधित खाद्य सुरक्षा विभाग में शिकायत की जा सकती है।