झारखंड में 50 लाख क्विंटल धान खरीद की तैयारी, जमीन सत्यापन के बाद ही होगी खरीद
रांची: झारखंड में खरीफ विपणन मौसम 2026-27 के लिए धान खरीद की तैयारियां तेज हो गई हैं। राज्य सरकार ने इस साल किसानों से 50 लाख क्विंटल धान खरीदने का लक्ष्य निर्धारित किया है। हालांकि सरकारी केंद्रों पर धान बेचने से पहले किसानों की कृषि भूमि का सत्यापन और e-KYC प्रक्रिया पूरी करना जरूरी होगा। सरकार का जोर खरीद व्यवस्था को पारदर्शी बनाने, वास्तविक किसानों तक न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का लाभ पहुंचाने और बिचौलियों की भूमिका कम करने पर है।
धान खरीद से पहले किसानों की जमीन का होगा सत्यापन
इस बार झारखंड में धान अधिप्राप्ति व्यवस्था में भूमि सत्यापन को महत्वपूर्ण चरण बनाया गया है। जिन किसानों का पंजीकरण सरकारी व्यवस्था में है, उनके कृषि भूमि संबंधी विवरण का सत्यापन किया जाएगा। विभागीय सूचना के अनुसार खरीफ विपणन मौसम 2026-27 में धान बेचने वाले किसानों को 15 नवंबर 2026 से पहले e-KYC और भूमि सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
भूमि सत्यापन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी खरीद में वास्तविक कृषि भूमि और किसान का विवरण सही तरीके से दर्ज हो। सत्यापन के बाद किसान की जमीन के अनुरूप ही धान खरीद की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इससे गलत या संदिग्ध पंजीकरण के जरिए सरकारी खरीद व्यवस्था का लाभ लेने की संभावनाओं को कम करने में मदद मिल सकती है।
ऑनलाइन सिस्टम से धान की पूरी आवाजाही पर नजर
राज्य सरकार धान खरीद व्यवस्था में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने की तैयारी में है। प्रस्तावित ऑनलाइन ट्रैकिंग व्यवस्था के जरिए धान की खरीद से लेकर उसके परिवहन और मिल तक पहुंचने की प्रक्रिया पर नजर रखी जाएगी।
इस व्यवस्था में यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि धान किस किसान से खरीदा गया, किस खरीद केंद्र पर पहुंचा, वहां से उसका उठाव कब हुआ, किस वाहन के जरिए उसे ले जाया गया और किस मिलर तक भेजा गया। परिवहन में इस्तेमाल होने वाले वाहनों को भी ट्रैकिंग सिस्टम से जोड़ने की बात कही गई है।
सरकार का मानना है कि डिजिटल निगरानी से खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने और बिचौलियों की भूमिका सीमित करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, धान की आवाजाही का रिकॉर्ड उपलब्ध रहने से किसी स्तर पर गड़बड़ी की स्थिति में प्रक्रिया की जांच करना आसान हो सकता है।
सुरक्षित भंडारण के लिए 15 नए गोदाम
धान की खरीद के साथ उसके भंडारण पर भी सरकार ने ध्यान केंद्रित किया है। समीक्षा बैठक में राज्य में 1000 मीट्रिक टन क्षमता वाले 15 नए गोदाम बनाने की योजना पर चर्चा हुई। नए भंडारण केंद्रों से खरीदे गए खाद्यान्न को सुरक्षित रखने की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
धान खरीद के बाद उसका सही तरीके से भंडारण और समय पर उठाव बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसी वजह से खरीद, परिवहन, मिलिंग और भंडारण को एक-दूसरे से जोड़कर देखने पर जोर दिया जा रहा है।
किसानों के लिए e-KYC क्यों है जरूरी?
सरकारी केंद्रों पर धान बेचने वाले किसानों के लिए इस बार पहचान और जमीन से जुड़े दस्तावेजों का सत्यापन महत्वपूर्ण होगा। विभागीय दिशा-निर्देशों के मुताबिक किसान को अपनी कृषि भूमि से संबंधित विवरण उपलब्ध कराना होगा। संबंधित प्रक्रिया e-उपार्जन व्यवस्था के माध्यम से की जा रही है।
किसानों को समय सीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी करने की सलाह दी गई है। झारखंड सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर भी खरीफ विपणन मौसम 2026-27 में धान अधिप्राप्ति के लिए 15 नवंबर 2026 से पहले e-KYC और भूमि सत्यापन कराने संबंधी सूचना जारी की गई है।
सरकार का लक्ष्य क्या है?
झारखंड सरकार की इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य धान खरीद को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है। 50 लाख क्विंटल धान खरीद के लक्ष्य के साथ किसानों के भुगतान, परिवहन, भंडारण और खरीद केंद्रों की व्यवस्था पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
पिछले खरीद सत्र में राज्य में धान अधिप्राप्ति का लक्ष्य 60 लाख क्विंटल था और सरकारी आंकड़ों के अनुसार 75.29 लाख क्विंटल धान की खरीद दर्ज की गई थी। यह आंकड़ा बताता है कि राज्य में धान खरीद का पैमाना काफी बड़ा है, ऐसे में नई व्यवस्था में किसान पंजीकरण और भूमि सत्यापन को पहले से मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
किसानों के लिए जरूरी बातें
- खरीफ विपणन मौसम 2026-27 में धान खरीद का लक्ष्य 50 लाख क्विंटल है।
- सरकारी केंद्रों पर धान बेचने से पहले e-KYC और भूमि सत्यापन जरूरी होगा।
- भूमि सत्यापन की प्रक्रिया 15 नवंबर 2026 से पहले पूरी करनी है।
- धान की खरीद और परिवहन को ऑनलाइन ट्रैकिंग व्यवस्था से जोड़ने की तैयारी है।
- किसानों की जमीन के अनुरूप ही धान खरीद की व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है।
- खरीद के बाद धान के सुरक्षित भंडारण के लिए नए गोदाम तैयार किए जाएंगे।
कुल मिलाकर, झारखंड में 50 लाख क्विंटल धान खरीद की तैयारी के साथ इस बार सरकार खरीद प्रक्रिया में डिजिटल निगरानी और दस्तावेजी सत्यापन को अधिक महत्व दे रही है। किसानों के लिए समय पर e-KYC और भूमि सत्यापन पूरा करना महत्वपूर्ण होगा, ताकि धान बेचते समय उन्हें अनावश्यक तकनीकी या दस्तावेजी परेशानी का सामना न करना पड़े।