Birth & Death Certificate Rules 2026: 1 अक्टूबर से बदलेंगे जन्म-मृत्यु पंजीकरण के नियम, जानें नया प्रोसेस
नई दिल्ली, 18 सितंबर 2026। Birth & Death Certificate Rules 2026: जन्म और मृत्यु के देर से होने वाले पंजीकरण को लेकर केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण बदलाव किया है। Registration of Births and Deaths (Amendment) Act, 2026 के प्रावधान 1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे। इसके बाद जन्म या मृत्यु की जानकारी निर्धारित अवधि के बाद देने पर देरी के आधार पर अलग-अलग स्तर के अधिकारियों की मंजूरी जरूरी होगी।
नए कानून का मुख्य बदलाव एक साल से अधिक देरी वाले पंजीकरण से जुड़ा है। अब एक वर्ष से अधिक लेकिन दो वर्ष के भीतर जन्म या मृत्यु की जानकारी देने पर संबंधित मामले में जिला मजिस्ट्रेट (DM), उप-मंडल मजिस्ट्रेट (SDM) या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट का आदेश आवश्यक होगा। वहीं, दो वर्ष से अधिक पुरानी घटना के पंजीकरण के लिए Judicial Magistrate First Class के आदेश की जरूरत होगी। दोनों परिस्थितियों में संबंधित अधिकारी को घटना की जानकारी की सत्यता की जांच करनी होगी और निर्धारित शुल्क का भुगतान करना होगा।
1 अक्टूबर से प्रभावी होगा नया कानून
केंद्र सरकार ने 16 सितंबर 2026 को अधिसूचना जारी कर 1 अक्टूबर 2026 को Registration of Births and Deaths (Amendment) Act, 2026 के लागू होने की तारीख निर्धारित की। यह अधिनियम 6 अगस्त 2026 को कानून बना था और अब इसके प्रावधान निर्धारित तारीख से प्रभावी होंगे।
नए कानून में Registration of Births and Deaths Act, 1969 की धारा 13 में संशोधन किया गया है। इसका प्रमुख उद्देश्य जन्म और मृत्यु की घटनाओं के देर से पंजीकरण की प्रक्रिया को स्पष्ट करना और लंबे समय से लंबित मामलों में अतिरिक्त सत्यापन की व्यवस्था करना है।
एक से दो साल की देरी पर DM या SDM की मंजूरी
यदि किसी जन्म या मृत्यु की सूचना घटना के एक वर्ष बाद लेकिन दो वर्ष के भीतर Registrar को दी जाती है, तो पंजीकरण सीधे सामान्य प्रक्रिया से नहीं होगा।
ऐसे मामले में संबंधित क्षेत्र के District Magistrate, Sub-Divisional Magistrate या District Magistrate द्वारा अधिकृत Executive Magistrate का आदेश आवश्यक होगा। अधिकारी को आदेश देने से पहले उपलब्ध जानकारी के आधार पर जन्म या मृत्यु की घटना की सत्यता की जांच करनी होगी।
इसके साथ ही पंजीकरण के लिए निर्धारित शुल्क का भुगतान भी करना होगा। यानी एक साल से अधिक पुराने मामलों में अब प्रशासनिक स्तर पर सत्यापन की प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो जाएगी।
दो साल से अधिक पुराने मामलों में Judicial Magistrate का आदेश
अगर जन्म या मृत्यु की जानकारी दो साल से अधिक समय बाद Registrar को दी जाती है, तो प्रक्रिया और अलग होगी। ऐसे मामलों में पंजीकरण के लिए Judicial Magistrate of the First Class (JMFC) का आदेश जरूरी होगा।
कानून के अनुसार Judicial Magistrate घटना की जानकारी की सत्यता की जांच के बाद ही पंजीकरण का आदेश दे सकते हैं। इस प्रक्रिया में निर्धारित शुल्क का भुगतान भी किया जाएगा।
इस बदलाव के बाद बहुत पुराने जन्म और मृत्यु रिकॉर्ड के पंजीकरण में न्यायिक स्तर की जांच शामिल होगी। इससे ऐसे मामलों में उपलब्ध दस्तावेजों और घटना से संबंधित जानकारी की जांच की भूमिका बढ़ जाएगी।
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पहले क्या व्यवस्था थी?
2026 के संशोधन से पहले, एक वर्ष से अधिक देरी से जन्म या मृत्यु की सूचना दिए जाने पर District Magistrate, Sub-Divisional Magistrate या अधिकृत Executive Magistrate के आदेश की व्यवस्था थी। 2026 के संशोधन ने इस व्यवस्था को दो अलग-अलग समय-सीमाओं में बांट दिया है।
अब एक वर्ष से अधिक लेकिन दो वर्ष तक की देरी वाले मामलों में प्रशासनिक अधिकारी आदेश जारी कर सकते हैं, जबकि दो वर्ष से अधिक की देरी वाले मामलों को Judicial Magistrate First Class के स्तर पर ले जाया जाएगा।
Birth & Death Certificate Rules 2026 का आम लोगों पर असर
नए प्रावधानों का सीधा संबंध उन लोगों से है जिनके जन्म या मृत्यु का पंजीकरण समय पर नहीं हुआ है। सामान्य रूप से समय पर पंजीकरण कराने पर देरी से जुड़े अतिरिक्त आदेश की जरूरत नहीं पड़ती।
लेकिन अगर पंजीकरण में एक वर्ष से ज्यादा समय बीत चुका है, तो संबंधित व्यक्ति या परिवार को देरी की अवधि के अनुसार अतिरिक्त प्रक्रिया पूरी करनी होगी। एक से दो साल की देरी में प्रशासनिक अधिकारी का आदेश और दो साल से अधिक की देरी में Judicial Magistrate का आदेश आवश्यक होगा।
इसलिए जिन मामलों में जन्म या मृत्यु का पंजीकरण अभी लंबित है, उनमें संबंधित Registrar of Births and Deaths से प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेजों की जानकारी लेना महत्वपूर्ण रहेगा।
देरी से पंजीकरण के नए नियम एक नजर में
| देरी की अवधि | पंजीकरण के लिए आवश्यक प्रक्रिया |
|---|---|
| एक वर्ष तक | लागू सामान्य पंजीकरण प्रक्रिया |
| एक वर्ष से अधिक, दो वर्ष तक | DM, SDM या DM द्वारा अधिकृत Executive Magistrate का आदेश |
| दो वर्ष से अधिक | Judicial Magistrate First Class का आदेश |
इन दोनों विलंबित श्रेणियों में संबंधित अधिकारी द्वारा जन्म या मृत्यु की जानकारी की सत्यता का सत्यापन और निर्धारित शुल्क का भुगतान आवश्यक है।
सरकार ने क्यों किया बदलाव?
Registration of Births and Deaths Act के तहत जन्म और मृत्यु का पंजीकरण महत्वपूर्ण नागरिक रिकॉर्ड व्यवस्था का हिस्सा है। 2026 का संशोधन खास तौर पर delayed registration की प्रक्रिया में बदलाव करता है।
सरकार की ओर से संसद में रखे गए विधेयक के अनुसार संशोधन का उद्देश्य देरी से होने वाले पंजीकरण को अधिक सख्त बनाना और जन्म-मृत्यु की घटनाओं की समय पर रिपोर्टिंग को प्रोत्साहित करना है। सरकार ने देर से पंजीकरण के संभावित दुरुपयोग को भी विधेयक की पृष्ठभूमि में बताया था।
1 अक्टूबर के बाद क्या याद रखें?
Birth & Death Certificate Rules 2026 के तहत सबसे महत्वपूर्ण बात देरी की अवधि है। एक वर्ष से अधिक लेकिन दो वर्ष के भीतर रिपोर्ट किए गए मामलों में DM, SDM या अधिकृत Executive Magistrate की मंजूरी की जरूरत होगी। वहीं, दो वर्ष से अधिक पुराने मामलों के लिए Judicial Magistrate First Class का आदेश आवश्यक होगा।
नए प्रावधान 1 अक्टूबर 2026 से लागू होने जा रहे हैं। इसलिए जिन लोगों के जन्म या मृत्यु का पंजीकरण अभी तक नहीं हुआ है, उन्हें अपने स्थानीय Registrar कार्यालय से लागू प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी लेकर पंजीकरण प्रक्रिया पूरी करने पर ध्यान देना चाहिए।