Vimla Pradhan: पूर्व मंत्री विमला प्रधान का निधन, सिमडेगा की राजनीति में शोक की लहर
सिमडेगा/रांची: झारखंड की पूर्व मंत्री और सिमडेगा से दो बार विधायक रह चुकीं Vimla Pradhan का शुक्रवार शाम इलाज के दौरान निधन हो गया। उनके निधन की खबर सामने आने के बाद सिमडेगा समेत पूरे झारखंड में शोक की लहर है। लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानी से जूझ रहीं विमला प्रधान का इलाज रांची के सैमफोर्ड अस्पताल में चल रहा था।
विमला प्रधान झारखंड की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख महिला चेहरों में शामिल रही थीं। उन्होंने सामाजिक कार्यों से सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की और बाद में सक्रिय राजनीति में कदम रखा। वर्ष 2009 में उन्होंने पहली बार सिमडेगा विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव जीता। इसके बाद वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने अपनी सीट बरकरार रखी और लगातार दूसरी बार विधायक बनीं।
Vimla Pradhan का राजनीतिक सफर सामाजिक कार्यों से शुरू हुआ
विमला प्रधान का सार्वजनिक जीवन राजनीति में सीधे प्रवेश से नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों से शुरू हुआ था। उन्होंने वर्ष 1989 के आसपास सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय होकर लोगों के बीच काम करना शुरू किया। इसके बाद वर्ष 1994 में वह भारतीय जनता पार्टी से जुड़ीं और पार्टी संगठन के साथ काम करते हुए सिमडेगा क्षेत्र में अपनी राजनीतिक पहचान मजबूत की।
लगातार संगठन और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रहने के बाद भाजपा ने उन्हें वर्ष 2009 में सिमडेगा विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा। इस चुनाव में जीत हासिल कर वह पहली बार झारखंड विधानसभा पहुंचीं।
विधायक बनने के बाद उन्हें राज्य सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी भी मिली। सरकार में रहते हुए उन्होंने सामाजिक कल्याण, महिला एवं बाल विकास और पर्यटन जैसे विभागों की जिम्मेदारी संभाली।
Vimla Pradhan ने सामाजिक कार्यकर्ता से विधायक और फिर मंत्री तक का सफर तय किया था।
2009 और 2014 में लगातार जीता विधानसभा चुनाव
विमला प्रधान के राजनीतिक जीवन में वर्ष 2009 और 2014 महत्वपूर्ण रहे। दोनों ही विधानसभा चुनावों में उन्होंने सिमडेगा सीट से जीत दर्ज की।
वर्ष 2014 में दूसरी बार विधायक बनने के बाद भी उन्होंने क्षेत्रीय राजनीति में अपनी सक्रियता बनाए रखी। उनके राजनीतिक योगदान को देखते हुए वर्ष 2017 में उन्हें झारखंड विधानसभा की ओर से उत्कृष्ट विधायक के सम्मान से भी नवाजा गया।
हालांकि वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव में सिमडेगा सीट पर उन्हें जीत नहीं मिली। इसके बाद वह सक्रिय विधानसभा राजनीति से बाहर हो गईं, लेकिन क्षेत्र से उनका जुड़ाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।
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मंत्री के रूप में संभाली कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां
विमला प्रधान को झारखंड सरकार में मंत्री के रूप में कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी मिली थी। इनमें समाज कल्याण, महिला एवं बाल विकास और पर्यटन जैसे विभाग शामिल रहे।
मंत्री पद पर रहते हुए उनका फोकस सामाजिक कल्याण और महिलाओं एवं बच्चों से जुड़े मुद्दों पर भी रहा। सिमडेगा और आसपास के क्षेत्रों में उनकी राजनीतिक सक्रियता लंबे समय तक बनी रही।
राजनीतिक जीवन से दूर रहने के बाद भी वह सामाजिक और क्षेत्रीय मुद्दों पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराती रही थीं।
आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों पर रही सक्रिय
सिमडेगा आदिवासी बहुल क्षेत्र है और विमला प्रधान का राजनीतिक जीवन भी इसी क्षेत्र से गहराई से जुड़ा रहा। पूर्व मंत्री के तौर पर उन्होंने आदिवासी क्षेत्रों के विकास और ग्रामीण समस्याओं से जुड़े मुद्दों पर कई मौकों पर अपनी बात रखी।
वर्ष 2025 में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने आदिवासी क्षेत्रों में विकास के लिए CSR फंड के बेहतर इस्तेमाल और स्किल डेवलपमेंट जैसी गतिविधियों पर जोर दिया था।
उनकी राजनीति में ग्रामीण क्षेत्र, आदिवासी समाज और स्थानीय विकास से जुड़े मुद्दे प्रमुख रूप से दिखाई देते रहे।
बीमारी के बाद इलाज के दौरान निधन
विमला प्रधान पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानी से जूझ रही थीं। तबीयत खराब होने के बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शुक्रवार को उनकी तबीयत को लेकर भाजपा नेताओं की ओर से भी अस्पताल पहुंचकर परिवार से जानकारी ली गई थी।
बाद में इलाज के दौरान उनके निधन की खबर सामने आई। उनके निधन की सूचना मिलते ही भाजपा कार्यकर्ताओं, समर्थकों और सिमडेगा क्षेत्र के लोगों में शोक का माहौल बन गया।
विमला प्रधान के निधन से झारखंड भाजपा और सिमडेगा के राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्र में एक लंबे सार्वजनिक जीवन का अंत हुआ है।
परिवार में पति और तीन पुत्र
विमला प्रधान अपने पीछे पति और तीन पुत्रों समेत भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं। उनके निधन की खबर के बाद परिवार के साथ-साथ पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों में भी शोक है।
लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन में रहने के कारण सिमडेगा और आसपास के क्षेत्रों में उनका व्यापक राजनीतिक और सामाजिक संपर्क रहा। उनके निधन से उनके समर्थकों और परिचितों के बीच गहरा दुख है।
सिमडेगा की राजनीति में रहा अहम योगदान
सिमडेगा विधानसभा क्षेत्र से लगातार दो बार विधायक रहना विमला प्रधान के राजनीतिक जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल रहा। वर्ष 2009 में पहली बार विधानसभा पहुंचने के बाद उन्होंने 2014 में दोबारा चुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक पकड़ साबित की।
उनका राजनीतिक सफर करीब तीन दशक से अधिक समय तक सार्वजनिक जीवन से जुड़ा रहा। सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर शुरुआत करने वाली विमला प्रधान ने भाजपा संगठन में सक्रिय भूमिका निभाई और बाद में विधायक तथा मंत्री के रूप में राज्य की राजनीति में अपनी पहचान बनाई।
Vimla Pradhan के राजनीतिक सफर की प्रमुख बातें
- वर्ष 1989 के आसपास सामाजिक कार्यों से सार्वजनिक जीवन की शुरुआत।
- वर्ष 1994 में भाजपा से जुड़ीं।
- वर्ष 2009 में पहली बार सिमडेगा से विधायक बनीं।
- पहली बार विधायक बनने के बाद झारखंड सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी संभाली।
- वर्ष 2014 में लगातार दूसरी बार सिमडेगा विधानसभा सीट से जीत दर्ज की।
- वर्ष 2017 में उत्कृष्ट विधायक सम्मान से सम्मानित हुईं।
- वर्ष 2019 के बाद विधानसभा राजनीति से बाहर रहीं।
- सामाजिक और क्षेत्रीय मुद्दों पर सक्रियता बनाए रखी।
- शुक्रवार को रांची में इलाज के दौरान निधन।
झारखंड की राजनीति में याद की जाएंगी Vimla Pradhan
विमला प्रधान का राजनीतिक जीवन सिमडेगा की राजनीति से गहराई से जुड़ा रहा। सामाजिक कार्यों से शुरुआत कर विधानसभा तक पहुंचना और फिर राज्य सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी संभालना उनके लंबे सार्वजनिक जीवन की प्रमुख उपलब्धियां रहीं।
उनके निधन से सिमडेगा ने एक ऐसे राजनीतिक चेहरे को खो दिया है, जिसने कई वर्षों तक क्षेत्र की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। उनके निधन की खबर के बाद राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र के लोगों की ओर से शोक व्यक्त किया जा रहा है।
निष्कर्ष
Vimla Pradhan का निधन झारखंड की राजनीति के लिए एक दुखद घटना है। सिमडेगा से दो बार विधायक और राज्य सरकार में मंत्री रहीं विमला प्रधान ने सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में शुरू हुए अपने सफर को राजनीति के महत्वपूर्ण पड़ावों तक पहुंचाया।
वर्ष 2009 और 2014 में लगातार विधानसभा चुनाव जीतना, मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभालना और लंबे समय तक सिमडेगा क्षेत्र से जुड़े रहना उनके राजनीतिक जीवन की प्रमुख पहचान रही। उनके निधन से सिमडेगा और झारखंड के राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्र में शोक का माहौल है।