क्या झारखंड के स्वास्थ्य महकमे को नहीं चाहिए ‘कामगार’ ऑफिसर? RIMS Director Dr. Raj Kumar का इस्तीफा और सवालों के घेरे में व्यवस्था…

ChatGPT Image Jun 26, 2026, 11_17_06 PM

रांची: RIMS Director Dr. Raj Kumar: झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) में बुधवार, 25 जून 2026 की शाम जो हुआ, वह केवल एक इस्तीफा नहीं है, बल्कि यह उस बड़े सवाल की ओर इशारा करता है जो राज्य के प्रशासनिक गलियारों में दबी जुबान से पूछा जा रहा है—“क्या झारखंड का स्वास्थ्य महकमा वास्तव में एक कामगार और सुधारवादी अधिकारी को झेलने के लिए तैयार है?”

रिम्स के निदेशक डॉ. राज कुमार का इस्तीफा एक ऐसे घटनाक्रम का परिणाम है जिसने फिर से यह साबित कर दिया कि यहाँ ‘काम करने’ की कीमत अक्सर पद खोने से चुकानी पड़ती है।

क्या था RIMS Director Dr. Raj Kumar का कसूर ?

RIMS Director Dr. Raj Kumar Resignation के बाद यह चर्चा अब आम हो गई है कि क्या झारखंड में ईमानदार अफसरों के लिए कोई जगह बची है?

Jharkhand समेत देशभर के Important News पायें, Group Join करें

RIMS Director Dr. Raj Kumar का 22 बिंदुओं का पत्र और ‘उत्पीड़न’ की कहानी

उस पत्र में उन्होंने साफ तौर पर स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव Ajay Kumar पर ‘प्रशासनिक हस्तक्षेप’ और ‘उत्पीड़न’ के गंभीर आरोप लगाए थे। अब सवाल यह उठता है कि क्या रिम्स को स्वायत्तता देने के बजाय, उसे एक कठपुतली की तरह चलाने की कोशिश की जा रही थी? क्या डॉ. कुमार का कसूर सिर्फ यह था कि वे नियमों की लकीर पर चलने की जिद कर रहे थे?

22 बिंदुओं का पत्र और ‘सिस्टम’ का डर

इस्तीफे से पहले, 8 जून 2026 को स्वास्थ्य मंत्री को लिखा गया डॉ. राज कुमार का 22-बिंदुओं वाला पत्र इस पूरे मामले की ‘असली कहानी’ बयां करता है। उन्होंने साफ तौर पर स्वास्थ्य विभाग के शीर्ष अधिकारियों पर हस्तक्षेप और उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे।

  • क्या था डॉ. कुमार का कसूर? आरोप है कि डॉ. कुमार ने रिम्स के टेंडर और भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाने की कोशिश की थी। क्या एक संस्थान को नियमों के दायरे में चलाना, झारखंड में ‘गुनाह’ बन गया है?
  • प्रशासनिक हस्तक्षेप: बार-बार के प्रशासनिक दबाव और कोर्ट के फैसलों के बीच, क्या RIMS प्रशासन अपनी स्वायत्तता खो चुका है?
RIMS Director Dr. Raj Kumar

Jharkhand समेत देशभर के Important News पायें, Group Join करें

RIMS Director Dr. Raj Kumar का इस्तीफा: संयोग या प्रयोग?

25 जून 2026 की शाम जब RIMS निदेशक डॉ. राज कुमार ने अपना पद छोड़ा, तो राज्य भर में यह चर्चा तेज हो गई कि क्या यह इस्तीफा वास्तव में ‘स्वास्थ्य कारणों’ से था, या यह उसी ‘दबाव’ का नतीजा था जिसकी चर्चा पिछले कई महीनों से गलियारों में थी?

महज 24 घंटे पहले CID की छापेमारी और फिर उसके अगले दिन निदेशक का इस्तीफा—यह घटनाक्रम किसी बड़े पटकथा (Script) की तरह लगता है। लेकिन सवाल यह है कि RIMS Director Dr. Raj Kumar के कार्यकाल में ऐसा क्या था जो सत्ता के गलियारों में खलबली मचा रहा था?

RIMS Director Dr. Raj Kumar पर जांच और ‘इस्तीफे’ का खेल

स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकता क्या है?

झारखंड की जनता आज यह पूछ रही है कि क्या स्वास्थ्य विभाग को ऐसे डॉक्टरों की जरूरत है जो फाइलों पर दस्तखत करके चुपचाप काम चला लें, या ऐसे अधिकारियों की जो अस्पताल की बुनियादी सुविधाओं को सुधारने का साहस करें?

RIMS Director Dr. Raj Kumar (डॉ. राज कुमार) के जाने के बाद अब डॉ. दीपेंद्र कुमार सिन्हा ने कमान संभाली है। लेकिन असली चुनौती निदेशक बदलने से हल नहीं होगी। चुनौती है—उस सिस्टम को बदलना, जो ‘कामगार’ अधिकारियों के लिए कब्रगाह बनता जा रहा है।

क्या रिम्स में ‘कामगार’ ऑफिसर टिक पाएंगे?

RIMS Director Dr. Raj Kumar का जाना यह संकेत देता है कि झारखंड के स्वास्थ्य महकमे में शायद अब ऐसे अधिकारियों के लिए कोई जगह नहीं बची है जो ‘काम’ करना चाहते हैं। जब भी कोई ईमानदार अधिकारी सिस्टम की जड़ों में जमी गंदगी को साफ करने की हिम्मत करता है, तो उसे छापेमारी, जांच और अंततः अपमानित होकर बाहर जाने के लिए मजबूर कर दिया जाता है।

Note: Jharkhand Reporter के Editor In Chief Hariom Rai व्दारा लिखित यह खबर विश्लेषणात्मक रिपोर्ट है जो वर्तमान परिस्थितियों और सार्वजनिक चर्चाओं पर आधारित है।

Jharkhand समेत देशभर के Important News पायें, Group Join करें

You may have missed