Saraikela News : राजनगर सरकारी अस्पताल में मोबाइल की रोशनी में प्रसव की कोशिश, माँ और नवजात की मौत पर उठा आक्रोश
मोबाइल की रोशनी में प्रसव की कोशिश, माँ और नवजात की मौत से आक्रोश
Rajnagar स्थित सरकारी अस्पताल में प्रसव के दौरान कथित रूप से बिजली और बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में माँ और नवजात शिशु की मौत का मामला सामने आने के बाद पूरे Saraikela-Kharsawan जिले में आक्रोश फैल गया है। बताया जा रहा है कि अस्पताल में बिजली नहीं रहने के कारण मोबाइल की रोशनी में प्रसव कराने की कोशिश की जा रही थी, इसी दौरान जच्चा और बच्चा दोनों की मौत हो गई।
Jharkhand समेत देशभर के Important News पायें, Group Join करें
स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल
इस घटना ने झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 21वीं सदी में भी सरकारी अस्पतालों में बिजली, बैकअप और आवश्यक चिकित्सा संसाधनों की कमी को लेकर लोगों में भारी नाराजगी है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने इसे केवल लापरवाही नहीं, बल्कि “संस्थागत हत्या” करार दिया है।
लोगों का कहना है कि जब सरकार आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं और बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के दावे करती है, तब इस तरह की घटनाएं उन दावों की सच्चाई सामने लाती हैं। गरीब और ग्रामीण परिवार आज भी बुनियादी इलाज के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं।
प्रशासन पर लीपापोती का आरोप
घटना के बाद प्रशासन के रवैये पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि मामले में अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई है और पूरी घटना को दबाने की कोशिश की जा रही है। पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के बजाय प्रशासनिक स्तर पर लीपापोती किए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय पर बिजली और आवश्यक चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध होती, तो माँ और नवजात की जान बचाई जा सकती थी।

निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
घटना के बाद विभिन्न सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। लोगों ने जिम्मेदार अधिकारियों और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए हत्या का मामला दर्ज करने की भी मांग उठाई है।
जनता का कहना है कि स्वास्थ्य व्यवस्था में लगातार हो रही लापरवाही के कारण गरीब परिवारों को अपनी जान गंवानी पड़ रही है और अब इस तरह की घटनाओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सरकार से जवाब की मांग
इस दर्दनाक घटना ने राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। लोगों का कहना है कि यदि सरकारी अस्पतालों में बुनियादी सुविधाएं तक सुनिश्चित नहीं की जा सकतीं, तो ग्रामीण क्षेत्रों के मरीज आखिर किस व्यवस्था पर भरोसा करें।

