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रांची : झारखंड सरकार ने राज्य में बालू (रेत) उपलब्धता बढ़ाने और अवैध खनन पर अंकुश लगाने के लिए एक अहम कदम उठाया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बालू घाटों की खनन लीज प्रक्रिया को सरल बनाने का फैसला लिया है। अब संबंधित जिलों के उपायुक्त (DC) सीधे बालू घाटों की लीज निष्पादित और मंजूर कर सकेंगे।
खान एवं भूतत्व विभाग ने इस संबंध में सभी जिलों को आदेश जारी कर दिए हैं। इस फैसले से लंबे समय से लीज डीड के कारण बंद पड़े सैकड़ों बालू घाट जल्द चालू हो सकेंगे।
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पहले बालू घाटों की लीज मंजूरी की प्रक्रिया पूरी तरह केंद्रीकृत थी, जिसके चलते काफी देरी होती थी। अब जिला स्तर पर अधिकार सौंपने से प्रक्रिया तेज होगी। सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि आम नागरिकों, छोटे-मोटे ठेकेदारों और निर्माण कार्यों में लगे लोगों को सस्ती और वैध बालू आसानी से मिल सके।
इस कदम से न सिर्फ बालू की किल्लत दूर होगी बल्कि अवैध खनन करने वाले माफिया पर भी लगाम लगेगी। सरकारी राजस्व में बढ़ोतरी के साथ-साथ नदियों के पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।
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झारखंड में पिछले कई वर्षों से रेत की कमी एक बड़ी चुनौती रही है। NGT की गाइडलाइंस के कारण मानसून सीजन में खनन बंद रहता है। निर्माण गतिविधियों, सड़क-ब्रिज प्रोजेक्ट्स और आवास निर्माण के तेजी से बढ़ते कामों के कारण साल के बाकी महीनों में डिमांड बहुत ज्यादा हो जाती है।
कई जिलों में एक ट्रैक्टर बालू की कीमत ₹6,000 से ₹8,000 तक पहुंच गई थी। इससे छोटे निर्माण कार्य प्रभावित हो रहे थे और आम लोगों को महंगे ब्लैक मार्केट पर निर्भर रहना पड़ रहा था। रांची, दुमका, गोड्डा, साहिबगंज समेत कई जिलों में अवैध खनन की शिकायतें भी लगातार आ रही थीं।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पहले ही BPL परिवारों के लिए मुफ्त बालू योजना शुरू की थी। यह नया फैसला उसी दिशा में एक और मजबूत प्रयास माना जा रहा है।
वैध बालू खनन शुरू होने से राज्य सरकार को अच्छा राजस्व मिलेगा। ट्रांसपोर्ट, मजदूरी और संबंधित क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। निर्माण कार्य बिना रुके चलेंगे, जिससे राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को गति मिलेगी।
सरकार ने साफ कहा है कि पर्यावरण संरक्षण पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। हर घाट पर सस्टेनेबल माइनिंग प्लान, EIA (पर्यावरण प्रभाव आकलन) और PESA कानून का पूरा पालन अनिवार्य रहेगा।
झारखंड सरकार बालू खनन नीति को और अधिक पारदर्शी और मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रही है। ग्राम सभाओं को अधिक अधिकार देने, डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए आवेदन और निगरानी व्यवस्था विकसित करने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।
यदि यह मॉडल सफल रहा तो झारखंड पूरे देश के लिए बालू खनन के क्षेत्र में एक बेहतर उदाहरण पेश कर सकता है।
यह फैसला झारखंड के आम लोगों के लिए राहत की खबर है। अब उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही राज्य के विभिन्न जिलों में अटके बालू घाट चालू हो जाएंगे और बाजार में बालू की कीमतें सामान्य स्तर पर आ जाएंगी।
Jharkhand News के पाठकों को इस विकास पर नजर रखनी चाहिए। हम लगातार राज्य की महत्वपूर्ण खबरों को आपके सामने ला रहे हैं।


Bystander (Mukdarshak) In Dis Very World Of Showboat. Worked 4 #RajyaSabhaTV, #VirArjun ETC. Director- Auros MediaTech Convergence Private Limited.