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Tet News : देशभर के लाखों प्राथमिक शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर स्थिति गंभीर होती जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश के बाद अब उन शिक्षकों की चिंता बढ़ गई है, जिन्हें आरटीई अधिनियम 2009 लागू होने से पहले नियुक्त किया गया था। इन शिक्षकों के लिए भी टीईटी पास करना अनिवार्य किए जाने के फैसले पर पुनर्विचार याचिकाओं को लेकर जल्द ही महत्वपूर्ण निर्णय आने की संभावना है।
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Tet News के अनुसार, शिक्षा के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 लागू किया गया था। इस कानून के तहत शिक्षकों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए टीईटी परीक्षा को जरूरी माना गया। हालांकि, इस कानून के लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को इस नियम से बाहर रखा गया था।
लेकिन पिछले वर्ष सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा कि आरटीई से पहले नियुक्त शिक्षकों को भी टीईटी पास करना होगा, खासकर उन शिक्षकों को जिनकी सेवा में पांच वर्ष या उससे अधिक समय शेष है।
इस फैसले के खिलाफ देश के कई राज्यों और शिक्षक संगठनों ने पुनर्विचार याचिकाएं दाखिल की हैं। कुल मिलाकर लगभग 40 याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई हैं, जिन पर जल्द निर्णय आने की संभावना है।
इन याचिकाओं पर विचार करते समय न्यायाधीश अपने चेंबर में प्रस्तुत तथ्यों की समीक्षा करेंगे। इस प्रक्रिया में वकीलों को सीधे तौर पर दलील रखने का अवसर नहीं मिलेगा, जब तक कि अदालत इस मामले की खुली सुनवाई का निर्णय न ले।
Tet News के मुताबिक, इस मामले में कई राज्यों की सरकारें भी शामिल हैं, जिनमें प्रमुख रूप से:
वहीं, झारखंड से अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ ने इस फैसले के खिलाफ याचिका दायर की है।
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार:
यह आदेश उन शिक्षकों के लिए राहत भी देता है जिनकी सेवा अवधि 5 वर्ष से कम बची है, क्योंकि उन पर यह नियम लागू नहीं होगा।

इस फैसले के बाद देशभर के लाखों शिक्षकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कई शिक्षक संघों का कहना है कि जो शिक्षक वर्षों से सेवा दे रहे हैं, उनके लिए अचानक टीईटी अनिवार्य करना उचित नहीं है।
उनका तर्क है कि इन शिक्षकों ने अपने अनुभव और कार्यक्षमता के आधार पर शिक्षा व्यवस्था में योगदान दिया है, इसलिए उन्हें इस तरह के नियमों में छूट मिलनी चाहिए।
Tet News में यह सबसे बड़ा सवाल बनकर उभरा है कि क्या इस नियम के चलते लाखों शिक्षकों की नौकरी खतरे में पड़ सकती है? यदि सुप्रीम कोर्ट अपने पुराने फैसले को बरकरार रखता है, तो जो शिक्षक तय समय सीमा के भीतर टीईटी पास नहीं कर पाएंगे, उन्हें सेवा से हटाया जा सकता है।
यह स्थिति खासतौर पर उन शिक्षकों के लिए चुनौतीपूर्ण होगी, जो लंबे समय से नौकरी कर रहे हैं और अब दोबारा परीक्षा देने की स्थिति में नहीं हैं।
यह मामला केवल नियमों का पालन कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता और शिक्षकों के अधिकार दोनों जुड़े हुए हैं। एक ओर सरकार और न्यायालय शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करना चाहते हैं, वहीं दूसरी ओर शिक्षक अपने अनुभव और सेवा को आधार बनाकर राहत की मांग कर रहे हैं।
अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट के आगामी फैसले पर टिकी है। अगर कोर्ट पुनर्विचार याचिकाओं को स्वीकार करता है, तो इस मामले में नई सुनवाई हो सकती है। वहीं, यदि कोर्ट अपने पुराने फैसले को कायम रखता है, तो देशभर के लाखों शिक्षकों को टीईटी पास करना अनिवार्य हो जाएगा।
Tet News के अनुसार, टीईटी अनिवार्यता को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला शिक्षा जगत के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होने वाला है। यह निर्णय न केवल लाखों शिक्षकों के भविष्य को प्रभावित करेगा, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था की दिशा भी तय करेगा। आने वाले दिनों में स्पष्ट हो जाएगा कि शिक्षकों को राहत मिलती है या उन्हें नए नियमों के अनुसार खुद को ढालना होगा।


Bystander (Mukdarshak) In Dis Very World Of Showboat. Worked 4 #RajyaSabhaTV, #VirArjun ETC. Director- Auros MediaTech Convergence Private Limited.