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झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी Jharkhand JTET में अब अंगिका समेत कई क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं को शामिल किए जाने की उम्मीद तेज हो गई है। राज्य सरकार ने इस मांग पर गंभीर कदम उठाते हुए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। इस फैसले के बाद राज्य के हजारों छात्रों और भाषा प्रेमियों में खुशी का माहौल देखा जा रहा है।
महागामा विधायक और ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की पहल पर यह कदम उठाया गया है। लंबे समय से छात्रों और सामाजिक संगठनों द्वारा क्षेत्रीय भाषाओं को JTET परीक्षा में शामिल करने की मांग की जा रही थी। अब सरकार द्वारा समिति गठन के बाद इस मुद्दे पर सकारात्मक निर्णय की संभावना बढ़ गई है।
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झारखंड एक बहुभाषी और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राज्य है। यहां कई क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाएं बड़े पैमाने पर बोली जाती हैं। बावजूद इसके, शिक्षक पात्रता परीक्षा में इन भाषाओं को विकल्प के रूप में पर्याप्त स्थान नहीं मिलने से छात्र लंबे समय से नाराज थे।
विशेष रूप से:
जैसी भाषाओं को शामिल करने की मांग लगातार उठ रही थी।
छात्रों और सामाजिक संगठनों का कहना था कि स्थानीय भाषाओं को नजरअंदाज करने से ग्रामीण और क्षेत्रीय पृष्ठभूमि के अभ्यर्थियों को नुकसान हो रहा है।
ताजा Jharkhand JTET अपडेट के अनुसार, ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने इस मुद्दे को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सामने प्रमुखता से उठाया।
बताया जा रहा है कि:
मंत्री ने कहा कि झारखंड की सांस्कृतिक पहचान और स्थानीय युवाओं के हितों को ध्यान में रखते हुए क्षेत्रीय भाषाओं को शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में उचित स्थान मिलना चाहिए।
राज्य सरकार ने 5 मई 2026 को अधिसूचना जारी कर इस मामले के अध्ययन के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन किया।
इस समिति का काम होगा:

Jharkhand JTET से जुड़ी इस महत्वपूर्ण समिति में कई वरिष्ठ मंत्रियों को शामिल किया गया है।
सरकार का मानना है कि समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे का फैसला लिया जाएगा।
हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में अंगिका भाषा को शामिल नहीं किए जाने के बाद छात्रों और कई सामाजिक संगठनों में नाराजगी बढ़ गई थी।
अंगिका साहित्य कला मंच सहित कई संगठनों ने:
अब समिति गठन के बाद आंदोलन कर रहे संगठनों को भी सकारात्मक उम्मीद जगी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्रीय भाषाओं को JTET में शामिल किया जाता है, तो इससे हजारों युवाओं को फायदा मिलेगा।
संभावित लाभ:
दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि यह केवल परीक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि झारखंड की संस्कृति और पहचान से जुड़ा विषय है।
उन्होंने कहा:
“क्षेत्रीय भाषाओं का सम्मान और उनका शैक्षणिक उपयोग राज्य की सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करेगा।”
ताजा Jharkhand JTET खबर के बाद अब छात्रों और भाषा प्रेमियों की नजर समिति की रिपोर्ट पर टिकी हुई है। यदि समिति सकारात्मक अनुशंसा देती है, तो भविष्य में JTET परीक्षा में कई नई भाषाएं शामिल हो सकती हैं।
कुल मिलाकर, Jharkhand JTET में अंगिका और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं को शामिल करने की दिशा में सरकार का यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हाई लेवल कमेटी के गठन से छात्रों और सामाजिक संगठनों की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
यदि सरकार इस दिशा में सकारात्मक फैसला लेती है, तो यह झारखंड की भाषाई और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के साथ-साथ हजारों युवाओं के लिए नए अवसर भी पैदा करेगा।


Bystander (Mukdarshak) In Dis Very World Of Showboat. Worked 4 #RajyaSabhaTV, #VirArjun ETC. Director- Auros MediaTech Convergence Private Limited.